बिश्रामपुर। कोल इंडिया की सरप्लस हाउसिंग सदसयोग समिति की तीसरी बैठक शुक्रवार को आयोजित हुई, लेकिन लंबी चर्चा के बावजूद कोई ठोस निर्णय नहीं निकल सका। समिति की बैठक में यूनियन और प्रबंधन आमने-सामने दिखाई दिए। सूत्रों के अनुसार प्रबंधन ने केंद्र सरकार के प्रस्तावों का हवाला देते हुए कंपनी के खाली आवासों को लीज पर देने से साफ इंकार कर दिया। यूनियन प्रतिनिधियों का मानना है कि यदि आवासों को लीज पर देना संभव नहीं है, तो उन्हें किराए पर देकर भी कंपनी को आर्थिक फायदा पहुंचाया जा सकता है, लेकिन प्रबंधन ने किराए का विकल्प भी खारिज कर दिया। बैठक में उपस्थित यूनियन प्रतिनिधियों ने प्रबंधन की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि एचईसी रांची और बोकारो स्टील जैसी संस्थाओं में आवासीय व्यवस्था को लीज मॉडल पर लागू कर सफलता पाई गई है। यदि लीज व्यवस्था में दिक्कत है, तो किराए का विकल्प अपनाना कंपनी और कर्मचारियों दोनों के हित में होगा। प्रबंधन का दोनों प्रस्तावों को खारिज करना समझ से परे है। यूनियन प्रतिनिधियों का कहना है कि यदि जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो वे इस मुद्दे को लेकर सीधे कोयला मंत्री से चर्चा करेंगे। वहीं दूसरी ओर प्रबंधन ने स्पष्ट कर दिया है कि आवासों से जुड़ी लीज और किराया नीति पर अंतिम निर्णय केवल केंद्र सरकार की स्वीकृति के बाद ही संभव है। इस संबंध में जल्द ही केंद्र को पत्र भेजा जाएगा। बैठक में यह भी सहमति बनी कि अधिकारियों की एक टीम आवासों की स्थिति का निरीक्षण करेगी। इस टीम में ईसीएल, सीसीएल, एसईसीएल और डब्ल्यूसीएल के प्रतिनिधि शामिल रहेंगे। टीम 7 अक्टूबर को ईसीएल का दौरा करेगी और वहां आवास नीति के व्यावहारिक पहलुओं का अध्ययन करेगी।

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