सरस्वती शिक्षा महाविद्यालय में ‘विश्व एड्स दिवसÓ पर कार्यक्रम का आयोजन

अंबिकापुर। सरस्वती शिक्षा महाविद्यालय सुभाषनगर में रेड रिबन क्लब इकाई के अंतर्गत ‘विश्व एड्स दिवस कार्यक्रमÓ का आयोजन किया गया। मिथलेश कुमार गुर्जर ने कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि विश्व एड्स दिवस हर वर्ष 1 दिसंबर को मनाया जाता है। यह दिवस एड्स के प्रति जागरूकता बढ़ाने, एचआईवी वायरस से होने वाले संक्रमण की रोकथाम के संदेश को प्रसारित करने तथा एचआईवी-एड्स से पीड़ित लोगों के प्रति सहानुभूति और समर्थन व्यक्त करने के उद्देश्य से मनाया जाता है। उन्होंने कहा इस दिन का मुख्य उद्देश्य लोगों को यह समझाना है कि एचआईवी/एड्स एक बीमारी ही नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता का विषय है, जिसे सही जानकारी, सावधानी और उपचार द्वारा नियंत्रित किया जा सकता है।
मुख्य अतिथि डॉ. परमानन्द ने कहा कि सबसे पहले हमें यह जानने की आवश्यकता है कि वास्तव में एड्स क्या है। उन्होंने कहा एड्स की शुरुवात 1920 के आसपास अफ्रीका से हुई थी। सबसे पहला केस चिपांजी में हुआ था, परंतु 1980 तक यह वायरस छिपा हुआ था। 1987 में एड्स के रूप में इसका पहचान हुआ और उसका इलाज शुरू हुआ। उन्होंने कहा यदि किसी व्यक्ति को एड्स हो जाता है तो हमें उससे भेदभाव नहीं करना चाहिए, हमें उनसे अलग नहीं होना चाहिए, उनके साथ सहानुभूति पूर्वक व्यवहार करना चाहिए। एड्स का मुख्य कारण एचआईवी नामक वायरस है। जब यह वायरस शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यून सिस्टम) को कमजोर कर देता है, तब व्यक्ति को एड्स हो सकता है। डॉ. दीपक गुप्ता ने कहा कि एड्स एक प्रकार के बीमारियों का समूह है। यदि किसी व्यक्ति को एड्स होता है तो वह बताने से डरता है कि लोग उससे दूर होने लगेंगे, परंतु इसका इलाज संभव है। उन्होंने कहा कि हमें अपने दैनिक दिनचर्या को सही रखना चाहिए। एड्स है या नहीं जानने के लिए ब्लड टेस्ट कराना चाहिए। वर्तमान में रैपिड टेस्ट की सुविधा है, इससे हमें एड्स है, या नहीं इसका पता चल सकता है। अलाईजा टेस्ट से हम एड्स  परीक्षण करते हंै। एड्स होने के कई कारण हैं। एक ही सुई का कई लोगों में उपयोग, असुरक्षित यौन संबंध, नशा करने वालों के सुई या इंजेक्शन का साझा उपयोग करने से बचना चाहिए। डॉ. मनीषा यादव ने अपने उद्बोधन में एड्स फैलाव व कारकों, डॉ. अमित यादव ने एड्स के लक्षण, उपचार पर प्रकाश डाला और कहा कि शुरुआती चरण में इलाज शुरू करने से एड्स तक पहुंचने की संभावना बहुत कम हो जाती है। एड्स के बारे में भ्रांतियां फैलाने से बचना चाहिए। छूने, साथ बैठने, खाने-पीने, हाथ मिलाने से एड्स नहीं फैलता है। कार्यक्रम के अंत में महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. श्रद्धा मिश्रा ने कार्यक्रम के बारे मे संक्षिप्त जानकारी दी, और कहा कि हमारा महाविद्यालय एड्स जागरूकता पर विभिन्न कार्य करने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा एक शिक्षक के रूप में हम समाज में जागरूकता लाने का कार्य कर सकते हंै। कार्यक्रम में महाविद्यालय की विभागाध्यक्ष रानी रजक, सहायक प्राध्यापक प्रियलता जायसवाल, उर्मिला यादव, मिथलेश कुमार गुर्जर, सविता यादव, सीमा बंजारे, ज्योत्स्ना राजभर, अर्चना सोनवानी, गोल्डन सिंह, नितेश कुमार यादव एवं बी.एड के प्रशिक्षणार्थियों की उपस्थिति रही।
आईटीआई में विश्व एड्स दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय सेवा योजना द्वारा जागरूकता आधारित विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने एड्स से संबंधित भ्रांतियों, रोकथाम एवं रक्तदान के महत्व पर विस्तारपूर्वक जानकारी दी।
मुख्य वक्ता डॉ. शारदा भगत ने एड्स संक्रमण, लक्षण और बचाव के उपायों पर प्रकाश डालते हुए रक्तदान को जीवन रक्षक कर्तव्य बताया। वार्ड पार्षद मनोज गुप्ता ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया और कहा कि रक्तदान करने वाले व्यक्ति समाज के सच्चे सेवी हैं। कार्यक्रम में रेडक्रास के पूर्व चेयरमेन करताराम गुप्ता ने युवाओं को सेवा कार्यों के लिए प्रेरित करते हुए संक्षिप्त उद्बोधन दिया। रेडक्रास सदस्य आर्यन गुप्ता एवं पॉलिटेक्निक के रासेयो अधिकारी अमित बघेल ने रासेयो को व्यक्तित्व विकास और जनसेवा का महत्वपूर्ण मंच बताया। इस अवसर पर रासेयो प्रभारी शब्बीर आलम, राजपति मेहता, प्रियंका पटेल, गुनीता राणा, स्नेहलता मिश्रा, अमित ठाकुर, राजेंद्र, राजेश सोनी सहित समस्त प्रशिक्षण अधिकारी एवं बड़ी संख्या में प्रशिक्षु उपस्थित रहे।
आईटीआई अंबिकापुर को मिला प्रशस्ति पत्र
एड्स दिवस कार्यक्रम के दौरान रेडक्रॉस एवं मेडिकल कॉलेज अंबिकापुर द्वारा आईटीआई अंबिकापुर को प्रतिवर्ष रक्तदान शिविर आयोजित करने के लिए प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया। संस्था को यह सम्मान निरंतर सामाजिक सेवा और जनहित कार्यों में सक्रिय योगदान के लिए दिया गया। समापन सत्र में संस्था के प्राचार्य सी.एस. पैकरा ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए रक्तदान को समाजिक उत्तरदायित्व का सर्वोत्तम रूप बताया

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