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बेनकाब हुआ अवैध मेडिकल नेटवर्क

दो क्लिनिक सील..स्वास्थ्य सेवाओं का काला चेहरा उजागर

रामानुजगंज

इलाज के नाम पर खुलेआम हो रही जान से खिलवाड़ की तस्वीर सामने आई है। रामानुजगंज में बिना किसी डिग्री और नर्सिंग एक्ट रजिस्ट्रेशन के झोलाछाप डॉक्टरों ने क्लीनिक और मेडिकल स्टोर के नाम पर इलाज का धंधा खोल रखा था। स्वास्थ्य और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए जीवन ज्योति पैथोलॉजी और नेयाजुद्दीन क्लीनिक को सील कर दिया है। कार्रवाई के दौरान ये चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि बिना रजिस्ट्रेशन बोड लगाकर मरीज भर्ती किए जा रहे थे और दवाइयाँ बिना किसी अनुमति के बेची जा रही थीं।

अवैध इलाज का अड्डा बना रामानुजगंज

रामानुजगंज शहर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में लंबे समय से झोलाछाप डॉक्टरों के क्लीनिक चल रहे थे। शिकायतें लगातार आती रहीं,लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। शनिवार को आखिरकार एसडीएम आनंद नेताम, बीएमओ डॉ.महेश गुप्ता,नायब तहसीलदार दिनेश नरेटी और पुलिस की संयुक्त टीम ने तड़के से ही छापेमारी शुरू की। जांच के दौरान मिले दस्तावेज़,लाइसेंस,मेडिकल वेस्ट प्रबंधन और रजिस्टरों की जांच में यह साफ हो गया कि न तो रजिस्ट्रेशन था,न योग्य चिकित्सक,फिर भी इलाज जारी था।

मेडिकल स्टोर के पीछे क्लीनिक का खेल

ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ.महेश गुप्ता ने माना कि कई जगह मेडिकल स्टोर के नाम पर पीछे क्लीनिक का संचालन हो रहा है। उन्होंने कहा हमारी जांच में पाया गया है कि कई क्लीनिक नर्सिंग एक्ट के तहत रजिस्टर्ड नहीं हैं। बिना रजिस्ट्रेशन इलाज और भर्ती पूरी तरह अवैध है। ऐसी जगहों पर सीलबंदी की कार्रवाई की जा रही है।”

प्रशासन ने दी चेतावनी यह सिर्फ शुरुआत

एसडीएम आनंद नेताम ने कहा कि कार्रवाई अभी शुरू हुई है। जहां भी बिना रजिस्ट्रेशन या फर्जी तरीके से इलाज किया जा रहा हैl वहां हमारी टीम दबिश देगी। ऐसे लोगों पर कानूनी कार्रवाई होगी। इलाज के नाम पर धोखाधड़ी अब नहीं चलेगी।”

विभाग की लापरवाही पर उठे सवाल

हालांकि सवाल यह भी उठ रहा है कि इतने समय से अवैध क्लीनिक खुलेआम चल रहे थे तो स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था कहां थी? अगर यह कार्रवाई आज संभव है,तो कल तक ये क्लीनिक कैसे बचते रहे ? स्पष्ट है कि विभाग की लापरवाही ने इन फर्जी डॉक्टरों को मनोबल दिया। प्रशासन को अब नियमित निरीक्षण और पंजीकृत चिकित्सकों की सूची सार्वजनिक करनी चाहिए ताकि ग्रामीणों को गुमराह होने से बचाया जा सके।

   एसडीएम अरविंद नेताम ने कहा 

 झोलाछाप डॉक्टरों के पास इलाज का कोई अधिकार नहीं। इनके पास न डिग्री है,न अनुभव। ऐसे लोगों से इलाज कराना खुद अपनी जान जोखिम में डालने जैसा है।”

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