रामानुजगंज वन अमले की निगरानी सवालों के घेरे में की, 3 जबड़े बरामद  

रामानुजगंज। बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के रामानुजगंज वन परिक्षेत्र में वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (डब्ल्यूसीसीबी) और राज्य उड़नदस्ता दल की संयुक्त कार्रवाई ने अंतरराज्यीय वन्यजीव तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। कार्रवाई में हाथी के जबड़े की तस्करी करने वाले तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और मौके से 3 नग हाथी का जबड़ा बरामद किया गया है।
वन विभाग की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार] 3 अगस्त को रामानुजगंज स्थित आमंत्रण धर्मशाला के कमरा क्रमांक-205 में गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी की गई। यहां तलाशी के दौरान एक बैग से हाथी के जबड़े बरामद हुए। मौके से तीन संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, इसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तार आरोपियों में झारखंड के पलामू निवासी संतोष कुमार विश्वकर्मा पिता स्व. जगरनाथ विश्वकर्मा 42 वर्ष, निवसी ग्राम तुकवेरा, पोस्ट कांडा, थाना नवा बजार, रामानुजगंज वार्ड क्रमांक 11 निवासी अजय कुमार गुप्ता पिता आदित्य नारायण गुप्ता 49 वर्ष, और वार्ड क्रमांक 5 निवासी सतेन्द्र कुमार रजक पिता लखन राम 50 वर्ष शामिल हैं। आरोपियों के कब्जे से 3 हाथी के जबड़े बरामद करके वन्य प्राणी (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 9, 39, 48(क), 50, 51 एवं 52 के तहत मामला दर्ज कर तीनों को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, रामानुजगंज की अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
स्थानीय वन अमले की भूमिका पर उठे सवाल  
इस कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा प्रश्न स्थानीय वन विभाग की सतर्कता को लेकर खड़ा हो गया है। रामानुजगंज वन परिक्षेत्र अंतरराज्यीय सीमा से लगा संवेदनशील क्षेत्र है। यदि हाथी दांत की तस्करी का नेटवर्क सक्रिय था तो यह गतिविधियां एक-दो दिन में विकसित नहीं हुई होंगी। सवाल यह है कि इतने लंबे समय तक तस्करों की आवाजाही की भनक स्थानीय वन अधिकारियों को क्यों नहीं लगी? आखिर कार्रवाई के लिए केंद्रीय एजेंसी और राज्य उड़नदस्ता दल को मैदान में क्यों उतरना पड़ा? स्थानीय लोगों का कहना है कि वन विभाग का फोकस पौधारोपण और उससे जुड़ी प्रचार गतिविधियों पर है, जबकि वन्यजीव संरक्षण और तस्करी रोकने जैसे मूल दायित्वों पर गंभीरता नहीं दिख रही।
जानकारी छिपाने डील के प्रयास का आरोप
वन विभाग की कार्यशैली के बीच कार्रवाई की जानकारी चयनित माध्यमों तक सीमित रखना और जांच का हवाला देकर टालमटोल करना समझ से परे है। सूत्रों का दावा है कि इस मामले को दबाने के लिए कुछ स्थानीय युवकों द्वारा मीडिया मैनेजमेंट के नाम पर लाखों की डील की जा रही थी, लेकिन वन विभाग की टीम ने समय रहते नकेल कसा, जिससे ऐसे लोगों की मंशा पर पानी फिर गया। मामला अब पूरे रामानुजगंज में चर्चा का विषय बना हुआ है। नागरिकों की मांग है कि, जिस प्रकार तस्करों पर कार्रवाई हुई है, उसी तरह निगरानी में चूक की भी जांच होनी चाहिए, ताकि सीमावर्ती क्षेत्रों में वन्यजीव तस्करी पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।

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