18,000 से अधिक बेजुबान पशुओं का रेस्क्यू, 30,000 से अधिक का मौके पर उपचार

अंबिकापुर। शहर में नि:स्वार्थ सेवा का दूसरा नाम अगर कोई है तो वह है Óगौ सेवा मंडलÓ। गौवंश की रक्षा और संवर्धन के संकल्प के साथ शुरू हुआ ये सफर 10 जुलाई को 9 वर्ष पूरे कर चुका है। 9 साल में हजारों गौवंशों को नया जीवन देने वाले इस मंडल का काम सच में बोलता है। इस दौरान स्वयंसेवकों ने शहर के विभिन्न क्षेत्रों में घूम-घूमकर निराश्रित गौवंश को हरा चारा खिलाया तथा सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के उद्देश्य से उनके गले में रेडियम बेल्ट भी बांधा। गौ सेवा मंडल की स्थापना से अब तक संस्था ने 18,000 से अधिक गौवंश एवं अन्य बेजुबान पशुओं का सफल रेस्क्यू किया है। इसके अतिरिक्त 30,000 से अधिक घायल एवं बीमार गौवंश तथा अन्य बेजुबान पशुओं का मौके पर ही उपचार करके उन्हें स्वस्थ किया गया है।
शहर की भागदौड़ के बीच जब लोग अपनी धुन में मस्त रहते हैं। सड़क किनारे, गड्ढे, असुरक्षित सेप्टिक टैंक में, या किसी दुर्घटना में घायल पड़ी गौ माता नजर भी आ जाये, कई आंखें उन्हें निहारते निकल लेती हैं। कईयों की सोच तो इसकी सूचना संचार या अन्य माध्यमों से ऐसे लोगों तक पहुंचाने की भी नहीं होती है, ताकि गौवंश को सुरक्षित किया जा सके। इधर शहर के युवाओं की टीम गौ सेवा मंडल के नाम को साकार करने में लगी है। इन्हें बस सूचना मिलने का इंतजार रहता है, और ये एक फोन पर बीमार या गड्ढे में गिरे गौवंश को खतरे के बीच भी निकालने के लिये पहुंच जाते हैं। रोजाना इनके काम की शुरूआत घायल, बीमार गौवंश के इलाज और चारा-पानी जैसे सेवा से होती है। गौ सेवा मंडल ने अपने कार्यों की बदौलत शहर के लोगों के बीच एक अलग ही पहचान बना ली है। कोरोना महामारी के दौरान, जब अधिकांश लोग घरों से बाहर निकलने से भी डर रहे थे, तब भी इनकी सेवा निरंतर जारी रही। संस्था ने अपने प्रारंभिक सेवा कार्यों के दौरान जरूरतमंद लोगों के लिए रोटी एवं अचार वितरण का कार्य भी किया। गौ सेवा मंडल सरगुजा ने अपने सभी सदस्यों, सहयोगियों, दानदाताओं एवं शुभचिंतकों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए कहा है कि आप सभी के सहयोग, विश्वास और समर्पण से ही संस्था ने सेवा के गौरवपूर्ण 9वां वर्ष पूर्ण किया है। गौ सेवा मंडल ने विश्वास व्यक्त किया है कि भविष्य में भी समाज का सहयोग एवं मार्गदर्शन इसी प्रकार मिलता रहेगा।
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बेजुबान पशुओं को चारा, भोजन एवं बिस्किट खिलाया
गौ सेवा मंडल के स्वयंसेवकों ने सफल 9 वर्ष पूर्ण होने पर शहर के विभिन्न क्षेत्रों में जाकर गायों, कुत्तों एवं बिल्लियों सहित निराश्रित बेजुबान पशुओं को चारा, भोजन एवं बिस्किट उपलब्ध कराया, ताकि कोई भी जीव भूखा न रहे। भीषण गर्मी के मौसम में शहर के प्रमुख चौक-चौराहों एवं उन स्थानों पर, जहां बड़ी संख्या में गौवंश रहते हैं, पानी का नाद रखवाया, ताकि इनकी प्यास बुझ सके। साथ ही नागरिकों से अपने आसपास के निराश्रित पशुओं के लिए पानी एवं चारे की व्यवस्था करने की अपील की।
मूक प्राणियों की नि:स्वार्थ सेवा का जुनून
गौ सेवा में लगे युवाओं की रोजाना हाथ में दवाई और मरहम लेकर गौ वंश को गड्ढे से निकालने के बाद मरहम-पट्टी करने जैसी कई तस्वीरें देखने को मिल जाती हैं। जरूरत के अनुरूप इन्हें इंजेक्शन और भूखे-प्यासे गौ वंश को चारा-पानी देकर ये संतुष्टि महसूस करते हैं। ना कोई शोर, ना कोई प्रचार, सिर्फ नि:स्वार्थ सेवा का जुनून इनमें रहता है। जब समाज के लोग इनके काम को देखते हैं, तो दिल अपने आप पिघल जाता है। मदद के लिये स्वस्फूर्त लोग आगे आने लगते हैं। कोई चारे के लिए मदद करता है, कोई इलाज के खर्च के लिए। क्योंकि यहां नाम नहीं, काम बोलता है, और ये काम ही लोगों में जनसहयोग की भावना प्रबल करता है।
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धूप में जलते हैं, कीचड़ में सनते हैं पर गौ माता का दर्द मिटाकर ही दम लेते हैं
गौ सेवा मंडल के गौ सेवक बिना बोले, बिना थके, मूक प्राणियों की सेवा में लगे रहते हैं। रात के 12 बजे हों, या दोपहर की तपती धूप, फोन की घंटी बजी नहीं कि निकल पड़े गंतव्य की ओर। आज के जमाने में, जब लोग एक दूसरे की मदद नहीं करते, ऐसे में ये लोग बिना खून के रिश्ते वाले मूक प्राणियों को प्यार भरी थपकी देते नजर आते हैं। इनका ग्लैमर, तालियों की गड़गड़ाहट से नहीं, सिर्फ सेवा और समर्पण के भाव से वास्ता रहता है। शहर के लोग जब इनमें सेवा भाव के जज्बा को देखते हैं, तो पत्थर दिल भी मोम हो जाता है। मदद के लिये लोग हाथ बढ़ाते हैं। गौ सेवा मंडल के हर उस योद्धा को ‘छत्तीसगढ़ फ्रंटलाइनÓ परिवार का सलाम, जो धूप में जलते हैं, कीचड़ में सनते हैं पर गौ माता का दर्द मिटाकर ही दम लेते हैं। गौ बचेगी, तभी संस्कृति बचेगी, गौ बचेगी, तभी हम बचेंगे, इसे साकार कर रहा है गौ सेवा मंडल।  

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