इलाज के नाम पर कराते रहे झाड़-फूंक, मेडिकल कॉलेज में तोड़ा द
अंबिकापुर। जशपुर जिले की एक महिला की कुत्ता के काटने के तीन माह बाद इलाज दौरान मौत हो गई। परिजनों के अनुसार महिला ने घटना की जानकारी किसी को नहीं दी थी और गांव में ही जड़ी-बूटी से इलाज करवा रही थी।
जानकारी के मुताबिक, जशपुर जिले के ग्राम मकरीबंधा निवासी स्थरेंस केरकेट्टा को करीब तीन माह पहले पड़ोस के पालतू कुत्ते ने काट लिया था। महिला ने इसे गंभीरता से नहीं लिया और अस्पताल जाने के बजाय स्थानीय वैद्य से जड़ी-बुटी से इलाज कराती रही। तीन दिन पहले महिला की तबीयत अचानक बिगड़ गई, उसे कमर और पैरों में तेज दर्द होने लगा। परिजन उसे जशपुर अस्पताल ले गए, यहां से हालत गंभीर होने पर उसे अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर किया गया, यहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
डॉक्टरों का कहना है कि कुत्ते के काटने के बाद तुरंत एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाना जरूरी होता है। झाड़-फूंक या जड़ी-बूटी के भरोसे रहने से संक्रमण बढ़ सकता है, जो बाद में जानलेवा साबित होता है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, इस तरह के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। कुछ दिन पहले भी इसी तरह की लापरवाही के कारण एक अन्य व्यक्ति की मौत हो चुकी है। डॉक्टरों ने लोगों से अपील की है कि कुत्ते या किसी भी जानवर के काटने पर तुरंत अस्पताल जाकर इलाज कराएं, ताकि ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।  

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