खबर प्रकाशन के बाद हरकत में आया विभाग, 3 दिन में जांच प्रतिवेदन देने के निर्देश

सूरजपुर। जिले के सरहदी जंगलों में पिछले कई सालों से अतिक्रमण का सिलसिला बदस्तूर जारी है। लाखों पेड़ पौधों को धरासायी करके बड़े-बड़े खेत बनाने का सिलसिला आज भी बड़े पैमाने पर चल रहा है, जिससे जंगलों का अस्तित्व संकट में आ गया है वहीं पर्यावरण की समस्या भी विकराल रूप ले रही है। बावजूद इसके जंगलों की सुरक्षा के लिए तैनात जिम्मेदारों का मौन रहना समझ से परे है।
हम बात कर रहे हैं वन विकास निगम परिक्षेत्र लैंगा की, जहां सैकड़ों हेक्टेयर वन भूमि अतिक्रमण के चपेट में है। चाहे वह सड़क के किनारे की भूमि हो या फिर जंगल के भीतर वर्षों से जंगलों के बीच बहते आ रहे नाला की, सभी जगह एक्सीवेटर मशीन चलाकर वन भूमि पर कब्जा करने की होड़ सी मच गई है। इन सबके बीच सबसे बड़ा सवाल है कि, बड़े पैमाने पर चल रहे अतिक्रमण के बावजूद वन विकास निगम के अधिकारी-कर्मचारी आखिर सुरक्षा क्यों नहीं कर पा रहे हैं। कहीं कब्जाधारी, भू माफियाओं से इनका कभी न टूटने वाला गठजोड़ तो नहीं..! दैनिक छत्तीसगढ़ फ्रंटलाइन अखबार में रविवार, 3 मई के अंक में उक्ताशय की खबर प्रमुखता से प्रकाशित की गई थी। इसे विभाग के आला अधिकारियों ने गम्भीरता से लेते हुए जांच हेतु चार सदस्यीय दल का गठन किया है। मंडल प्रबंधक कार्यालय सरगुजा परियोजना मंडल अंबिकापुर ने उप मंडल प्रबंधक सरगुजा परियोजना मंडल अभिनन्दन गोस्वामी की अध्यक्षता में 3 मई को जांच समिति का गठन किया है, जिसमें परियोजना क्षेत्रपाल राकेश कुमार चौहान व जय प्रकाश राम तथा सहायक परियोजना क्षेत्रपाल मुन्नू प्रसाद को सदस्य नियुक्त किया गया है। जांच टीम को प्रकाशित बिंदुओं की विस्तृत एवं तथ्यात्मक जांच प्रतिवेदन 03 दिवस के भीतर मण्डल कार्यालय में प्रस्तुत करने हेतु निर्देशित किया गया है ताकि नियमानुसार आगामी कार्रवाई की जा सके।
घने जंगलों में शुमार जंगल पूरी तरह से हुआ बर्बाद
बता दें कि वर्षों से वन विकास निगम परिक्षेत्र लैंगा में पदस्थ अधिकारी-कर्मचारियों के ऊपर सुविधा शुल्क के साथ कब्जा कराने का आरोप भी लगते रहा है। व्यापक रूप से हो रहे भूमि कब्जे के इस खेल में लाखों पेड़ पौधों की बली चढ़ा दी गई है। इसका नतीजा यह हुआ है कि सालाना करोड़ों रुपये खर्च करके लगाए गए पौधे भी अब मौके पर नजर नहीं आ रहे है। सरकार द्वारा करोड़ों की स्वीकृति के बाद लगाए गए विभिन्न प्रकार के पौधों को कर्मचारियों की लापरवाही और सुरक्षा के अभाव में उजाड़ दिया जा रहा है। अतिक्रमण करने वालों की खबर वन विकास निगम के द्वारा नहीं लेना सवालों के घेरे में है। वर्षों पहले घने जंगलों में शुमार यह जंगल आज पूरी तरह से बर्बाद हो चुका है, इसके लिए वन विकास निगम के अधिकारी से लेकर मैदानी कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
करोड़ों खर्च करके लगाए गए पौधे हुए गायब
बड़े पैमाने पर चल रहे अतिक्रमण के इस खेल में वर्षों पुरानी वन संपदा तबाह तो हो ही रही है, हाल के वर्षों में करोड़ों खर्च करके लगाए गए पौधों को उजाड़ दिया जा रहा है। सड़क किनारे बड़े-बड़े घर बना दिए गए, जंगल के भीतर सैकड़ों हेक्टेयर भूमि पर एक्सीवेटर चला कर खेत बनाये जा रहे हैं। वन्यजीवों की प्यास बुझाने वाले नालों को विभिन्न जगहों पर बांध दिया गया है, जिससे नालों का अस्तित्व ही खत्म सा हो गया है। यहां के अधिकारी लगभग 15 वर्षों से विभिन्न पदों पर इसी परिक्षेत्र में पदस्थ हंै। ग्रामीणों का आरोप है कि वे हमेशा धृतराष्ट्र की भूमिका में रहकर माफियाओं को संरक्षण देते आ रहे हैं। घना जंगल आज तबाही की मार झेल रहा है, मजाल है कि जिम्मेदार कुछ कर सकें। जंगलों की सुरक्षा व संरक्षण की जिम्मेदारी के नाम पर जिन्हें सरकार हर महीने मोटी रकम वेतन के तौर पर देती है, वही भक्षक बन जायें तो हालात कुछ इसी तरह का होना स्वाभाविक है।
वन विकास निगम के अध्यक्ष का है गृह जिला
वन विकास निगम के अध्यक्ष के गृह जिले में ऐसे हालात हैं, तो सहजता से अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रदेश के बाकी जिलों के जंगलों का हाल क्या होगा। बर्बाद होते जंगल को देखकर कई बार जागरूक लोगों एवं पर्यावरण प्रेमियों ने इसकी शिकायत निगम के उच्च अधिकारियों से की लेकिन हमेशा जांच के नाम पर खाना पूर्ति की गई। इस जंगल के आसपास आने वाले  दुर्गापुर, सायरबहर, गडरी, धवपुर, सूजीडांड, गवहानी, पथरी, कौशलपुर, राजापुर, पोतका, नावापाराखुर्द, महंगई, खूंटियां, लैंगा, निम्हा, मूटकी, दमउकुड, गेतरा, खेड़हिपाटी, इन सभी गांवों के जंगलों में खुलेआम प्रति घंटा बड़ी रकम किराया देकर एक्सीवेटर मशीन से अतिक्रमणकारी बड़े-बड़े खेत बनाकर हर साल फसल उगा रहे हैं। बताया गया है कि कब्जा की शिकायत पर वन विकास निगम के अधिकारी दुर्गापुर क्षेत्र स्थित जंगल के एक बड़े हिस्से को वन विभाग का क्षेत्र बताकर पल्ला झाड़ लेते हैं, वहीं वन परिक्षेत्र रामानुजनगर कब्जे की चपेट में आए जंगल क्षेत्र को वन विकास निगम का बताता है।
जंगल बचाने ग्रामीणों ने किया आग्रह
इस मामले में ग्रामीणों ने वन विकास निगम अध्यक्ष रामसेवक पैकरा व कलेक्टर एस. जयवर्धन से आग्रह किया है कि विभाग में सर्जरी करके बड़ी कार्रवाई की जाए, जिससे बचे जंगल को लापरवाह जिम्मेदारों के चंगुल से बचाया जा सके।

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