बिश्रामपुर। ग्राम पंचायत मदनपुर व पण्डोनगर के मध्य प्रस्तावित गैस गोदाम परियोजना को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। पहले पण्डो समाज की जमीन अधिग्रहण की कोशिश ने क्षेत्र में हलचल मचाई थी और अब सिलफिली महाविद्यालय के बगल में भारत पेट्रोलियम की गैस गोदाम बनाने की तैयारी से ग्रामीणों में रोष व्याप्त है। राजस्व विभाग द्वारा भूमि के नापजोख की प्रक्रिया का ग्रामीणों ने विरोध कर आज गांव में विशेष बैठक बुलाकर फैसला लिया गया है कि यदि प्रशासन द्वारा जबरन गैस गोदाम हेतु भूमि यहां पर आबंटित की जाएगी तो उग्र प्रदर्शन किया जाएगा। गौरतलब है कि शुक्रवार को लटोरी तहसीलदार सुरेंद्र पैकरा व पिलखा नायब तहसीलदार मीना सिंह के नेतृत्व में राजस्व विभाग की टीम प्रस्तावित गैस गोदाम के चिन्हित स्थल का सीमांकन कार्य हेतु मौके पर पहुंची थी। यहां पर ग्रामीणों की आपत्ति पर तहसीलदार, नायब तहसीलदार के अलावा राजस्व निरीक्षक, हल्का पटवारी विनोद सिंह व अन्य अधिकारी मौके से लौट गए थे। जिस पर शनिवार को ग्राम पंचायत मदनपुर में विशेष बैठक जिला पंचायत सदस्य नरेंद्र यादव व मदनपुर सरपंच पति प्रकाश अगरिया की उपस्थिति में बुलाई गई थी, जिसमें सभी ग्रामीणों ने एक स्वर में प्रस्तावित गैस गोदाम के चिन्हित स्थल पर गैस गोदाम निर्माण की स्वीकृति पर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। ग्रामीणों का कहना है कि इतनी बड़ी और संवेदनशील परियोजना को घनी आबादी व शैक्षणिक संस्थानों के बीच स्थापित करना भविष्य के लिए बड़ा खतरा होगा। गौरतलब है कि ग्राम पंचायत मदनपुर व पण्डोनगर के मध्य एनएच 43 किनारे संचालित शासकीय महाविद्यालय सिलफिली के बाजू में स्थित खसरा नंबर 142, 143, 144, 145, 147 कुल रकबा 1.00 हेक्टेयर भूमि को भारत पेट्रोलियम के गैस गोदाम निर्माण हेतु स्थल चिन्हांकन की प्रक्रिया गत दिनों पूर्ण की गई है। प्रस्तावित गोदाम स्थल के समीप ही सिलफिली महाविद्यालय के अलावा पार्वती बीएड कॉलेज और कई सरकारी व निजी स्कूल स्थित हैं। प्रतिदिन सैकड़ों छात्र-छात्राएं यहां अध्ययन के लिए आते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि यहां सरगुजा संभाग के पांचों जिला हेतु गैस सिलेंडर का भंडारण केंद्र स्थापित हुआ तो किसी भी समय छोटी सी चूक एक भयावह हादसे का कारण बन सकती है। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चे पढ़ाई के लिए कॉलेज और स्कूल जाते हैं, वहां उनके सिर पर हमेशा खतरा मंडराता रहेगा। लोगों का मानना है कि गैस गोदाम के आसपास हमेशा रिसाव, आगजनी और धमाके जैसी दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। यदि ऐसी कोई घटना घटित हुई तो न सिर्फ संपत्ति का नुकसान होगा, बल्कि दर्जनों जिंदगियां भी खतरे में पड़ सकती हैं। भीड़भाड़ वाले इलाके और शैक्षणिक संस्थानों के बीच ऐसा प्रोजेक्ट पूरी तरह असुरक्षित है। लोगों का कहना है कि सरकार चाहती है तो गोदाम गांव से दूर, सुनसान जगह पर बनाए। पूरा गांव इस प्रोजेक्ट के खिलाफ लामबंद हो चुका है। लोगों ने साफ कहा कि वे संगठित होकर विरोध करेंगे और यदि जरूरत पड़ी तो धरना-प्रदर्शन और उग्र आंदोलन का रास्ता भी अपनाए जाने के साथ ही उच्च न्यायालय की शरण में भी जाएंगे। लटोरी तहसीलदार सुरेंद्र पैकरा ने बताया कि गैस गोदाम हेतु स्थल चयन की प्रक्रिया पूर्ण कर ली गई है। यहां पर अब सोमवार को पुनः पुलिस बल व राजस्व विभाग की संयुक्त टीम द्वारा सीमांकन कार्य को पूर्ण करने पहल किया जाएगा। 

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