बिश्रामपुर। कोयला उत्पादन में 75 प्रतिशत की अहम हिस्सेदारी रखने वाले ठेका श्रमिकों को दीपावली का बोनस न मिलने से एसईसीएल बिश्रामपुर क्षेत्र में बड़ा आंदोलन शुरू हो गया है। संयुक्त कोयला मजदूर संघ एटक के नेतृत्व में आक्रोशित ठेका मजदूरों ने शनिवार को क्षेत्रीय महाप्रबंधक कार्यालय के समक्ष धरना प्रदर्शन कर प्रबंधन पर जानबूझकर बोनस लंबित करने का गंभीर आरोप लगाया है। आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि कोल इंडिया प्रबंधन के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद क्षेत्रीय प्रबंधन ठेका मजदूरों के बोनस भुगतान में मनमानी कर रहा है। संघ ने दावा किया कि हड़बड़ी में गायत्री भूमिगत खदान के श्रमिकों को आधा-अधूरा बोनस दिया गया है, जबकि करीब 650000 रुपए का बोनस अभी भी बकाया है। वहीं केतकी खदान में बोनस का भुगतान अभी तक शुरू ही नहीं हो पाया है। मुख्य वक्ता अजय विश्वकर्मा ने अपने संबोधन में क्षेत्रीय प्रबंधन को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि ठेका मजदूरों को अपने हक के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि चेयरमैन ने स्वयं एसईसीएल का दौरा कर समय पर बोनस भुगतान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था, लेकिन क्षेत्रीय प्रबंधन न केवल देरी कर रहा है, बल्कि उच्च प्रबंधन को भी धोखे में रख रहा है। विश्वकर्मा ने ठेकेदारों द्वारा बिना भुगतान किए ही प्रबंधन से बोनस राशि का इनकैशमेंट करा लेने की शिकायतों को जांच का विषय बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोल इंडिया का निर्देश है कि 21000 रुपए से अधिक मासिक वेतन और 30 दिन की वार्षिक उपस्थिति वाले सभी कर्मचारियों को पीएलआई बोनस का भुगतान किया जाना चाहिए। संघ के क्षेत्रीय सचिव पंकज कुमार गर्ग ने प्रबंधन को अल्टीमेटम देते हुए कहा कि अगर 3 दिन के अंदर बिश्रामपुर क्षेत्र के सभी ठेका श्रमिकों को बोनस का भुगतान नहीं किया जाता है, तो संघ के नेतृत्व में ठेका श्रमिक क्रमिक भूख हड़ताल शुरू कर देंगे। आंदोलन में धर्मजीत सिंह, मुरली सिंह, सोमार साय, आरके द्विवेदी, सजल मित्रा और सलमान खान ने भी सभा को संबोधित कर श्रमिकों के साथ एकजुटता दिखाई। धरना प्रदर्शन उपरांत संघ द्वारा ज्ञापन भी प्रबंधन के नाम पर सौंपा गया है। 

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