भटगांव। बसदेई पुलिस चौकी अंतर्गत घरेलू विवाद में भाई की हत्या भाई और भाई ने मिलकर कर दी थी। घटना का रूख मोडऩे के लिए मोटरसाइकिल से गिरने मेें आई चोट बताया जा रहा था, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट से स्पष्ट हो गया कि मौत का कारण मोटरसाइकिल से गिरना नहीं बल्कि मारपीट में आई चोट और समय पर इलाज नहीं कराना है। इसके बाद फरार हत्यारोपी भाई और भाभी को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
जानकारी के मुताबिक ग्राम शिवप्रसादनगर निवासी गंगा सिंह पिता हिन्दुलाल ने पुलिस चौकी बसदेई में सूचना दी थी कि 27 अगस्त को जवाहिर व उसकी पत्नी धनेश्वरी दोनों मिलकर घरेलू विवाद पर जवाहिर के छोटे भाई इन्द्रपाल को मारपीट किए थे, जिसमें उसे गंभीर चोटें आई थी और वह बेहोश हो गया था। मृतक के पिता गांव के ऑटो रिक्शा को बुलवाकर उसे अस्पताल ले जाने का प्रयास किए किन्तु आरोपी ने ऑटो चालक को भगा दिया। ईलाज हेतु वाहन नहीं मिलने से मृतक के पिता अपने नाती के मोटरसाइकिल में उसे सूरजपुर भेजे थे। उमेशपुर नर्सरी के पास मोटरसाइकिल का संतुलन बिगडऩे से वे गिर गए, जिससे मृतक के सिर के पीछे तरफ चोट आई थी। एम्बुलेंस से इन्हें जिला अस्पताल सूरजपुर लाया गया, यहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। सूचना पर चौकी बसदेई पुलिस ने मर्ग कायम किया था। पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर से मृत्यु का स्पष्ट कारण जानने अभिमत लिया गया, जिसमें डॉक्टर ने मोटरसाइकिल से गिरने से आई चोट के कारण मृत्यु नहीं होने का उल्लेख किया था और मृत्यु का कारण मारपीट से शरीर में आई गंभीर चोट व ईलाज नहीं होना बताया था। पुलिस ने इसके बाद आरोपी जवाहिर व धनेश्वरी के विरूद्ध धारा 103, 3(5) बीएनएस के तहत मामला पंजीबद्ध किया था। घटना के बाद से दोनों आरोपी फरार थे। मामले की सूचना पर डीआईजी व एसएसपी सूरजपुर एम.आर.आहिरे ने फरार आरोपियों को जल्द पकडऩे के निर्देश दिए थे। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संतोष महतो, सीएसपी एस.एस. पैंकरा के मार्गदर्शन में चौकी बसदेई पुलिस ने दबिश देकर जवाहिर सिंह उर्फ जवाहिर लाल पिता हिन्दुलाल 30 वर्ष व धनेश्वरी पति जवाहिर 24 वर्ष दोनों निवासी ग्राम शिवप्रसादनगर को पकड़ा। पूछताछ में दोनों ने घटना को अंजाम देना स्वीकार किया। आरोपियों को गिरफ्तार करके न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया है। कार्रवाई में चौकी प्रभारी बसदेई विजय सिंह, एएसआई संजय सिंह, प्रधान आरक्षक आनंद सिंह, आरक्षक देवदत्त दुबे, अमित सिंह व महिला आरक्षक सुषमा मिंज सक्रिय रहे।

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प्रशिक्षु उप निरीक्षकों को आरएफएसएल की जानकारी देने हुई दो दिवसीय कार्यशाला  संयुक्त संचालक, क्षेत्रीय न्यायालयिक विधि विज्ञान प्रयोगशाला कार्यालय के अधिकारियों ने दी विस्तृत जानकारीफोटो-2  छ.ग.फ्रंटलाइनअंबिकापुर। सरगुजा रेंज के विभिन्न जिलों में व्यवहारिक प्रशिक्षण करने हेतु आये सभी नव पदस्थ प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों को नई तकनिकी फोरेंसिक साइंस थ्योरी एवं प्रेटिकल प्रशिक्षण (आरएफएसएल) की जानकारी हेतु रेंज स्तर पर कार्यशाला का आयोजन पुलिस को-ऑडिनेशन सेन्टर, सरगुजा भवन में पुलिस महानिरीक्षक सरगुजा रेंज दीपक कुमार झा के निर्देशन में किया गया। इस दौरान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सरगुजा राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में फोरेंसिक साइंस थ्योरी एवं प्रेक्टिकल प्रशिक्षण के अधिकारी आर.के. पैकरा एवं कुलदीप कुजूर के द्वारा प्रशिक्षण दिया गया। इस नई तकनीकी प्रयोगशाला प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य किसी भी गंभीर प्रकरण के विवेचना के शुरूआती दौर से ही संग्रहित किये जाने वाले साक्ष्यों को पूर्णत: पारदर्शिता के साथ सुरक्षित एकत्रित किया जाता है ताकि भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय के समक्ष सुरक्षित पेश किया जा सके, जो कि अपराधिक कानूनों में फॉरेंसिक जांच की महत्ता दिया गया है।रेंज स्तर पर इस प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन दो बैच में कराया गया। प्रथम बैच 03 जुलाई को संपन्न हुआ, जिसमें जिला सूरजपुर, बलरामपुर एवं कोरिया के 38 प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों को प्रशिक्षण मिला। द्वितीय बैच में 07 जुलाई को सरगुजा, जशपुर एवं एमसीबी जिले के 40 प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों को इस प्रशिक्षण दिया गया। फोरेंसिक साइंस थ्योरी एवं प्रेटिकल प्रशिक्षण कार्यशाला में मुख्य रूप से संयुक्त संचालक, क्षेत्रीय न्यायालयिक विधि विज्ञान प्रयोगशाला अंबिकापुर के अधिकारी आर. के पैकरा एवं कुलदीप कुजूर के द्वारा अपने अनुभवों को साझा करते हुये कई ऐसे पुराने प्रकरणों के बारे में बताया जो कि बहुत ही बारीकी से उन्होंने साल्व किया है। उन्होंने कहा कि आप सब जब भी मैदानी थाना, चौकी क्षेत्रों में कार्य करेंगे तो अलग-अलग तरह के अनसुलझे प्रकरण आयेंगे, जैसे में बर्निंग केश, डिकम्पोज बॉडी, इलेक्ट्रिक शॉक, हैंगिंग, ड्रावनिंग, हत्या, शव निरीक्षण, घटनास्थल का निरीक्षण जैसे प्रकरणों का शुरूआती दौर से ही एक-एक साक्ष्यों का तकनीकी उपकरणों के माध्यम से सावधानी पूर्वक साक्ष्य संग्रहित करने के तरीके एवं बारीकियों के बारे में अधिकारियों ने विस्तृत जानकारी दी।बताया गया कि 1 जुलाई 2024 से लागू हुये नये अपराधिक कानून भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता एवं भारतीय साक्ष्य अधिनियम में फारेंसिक जांच की भूमिका को विशेष महत्व दिया गया है। इसमें विशेष रूप से 7 वर्ष या उससे अधिक सजा वाले अपराधों में फारेंसिक टीम के अधिकारियों के द्वारा जांच की अनिवार्यता है। इस हेतु रेंज के सभी जिलों में फारेंसिक वैज्ञानिक अधिकारी पदस्थ किये गये हंै, एवं आधुनिक मोबाइल फारेंसिक वैन प्रदाय किया है। प्रशिक्षण के अगली कड़ी में सभी प्रशिक्षु उप निरीक्षकों को क्षेत्रीय न्यायालयिक विधि विज्ञान प्रयोगशाला अंबिकापुर में ले जाकर बारीकी से एक-एक कर तकनीकि उपकरणों के बारे में जानकारी देकर घटना स्थल पर किस प्रकार प्रयोग/जांच किया जाना चाहिए, इन सारी तकनीकि उपकरणों के बारे में अवगत कराया गया। इसके उपरांत दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला में हर बिन्दुओं पर बारी-बारी से सभी प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों से उपस्थित अधिकारियों के द्वारा फीडबैक लिया गया, इस दौरान प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों से एक-एक करके पुन: तकनीकी उपकरणों एवं उसके उपयोग जैसे प्रश्नों के बाद त्रुटियों में सुधार किया गया।पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों एवं संयुक्त संचालक, क्षेत्रिय न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला के अधिकारियों ने कहा कि क्षेत्रिय एफएसएल से जांच में पारदर्शिता बढ़ेगी और बैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर अपराधियों तक पहुंचने में आसानी होगी जो कि न्यायिक प्रक्रिया में गति मिलेगी एवं लंबित मामलों के निपटारे में शीघ्रता आयेगी। प्रशिक्षण कार्यशाला के दौरान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सरगुजा अमोलक सिंह ढिल्लो, सीएसपी अंबिकापुर राहुल बंसल, रक्षित निरीक्षक अंबिकापुर तृप्ति सिंह राजपुत, पुमनि. कार्यालय के रीडर रेशम लाल साहू, स्थापना प्रभारी सुनील वर्मा सहित रेंज में पदस्थ सभी प्रशिक्षु उपनिरीक्षक उपस्थित रहे।