कहा-कार्यों में लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं, कई अधिकारियों को लगाई फटकार

बलरामपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश में सुशासन तिहार का आगाज हो गया है, इसी क्रम में सरगुजा संभाग के बलरामपुर जिला पहुंचे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कई कार्यक्रमों में शिरकत करते हुए सरगुजा संभाग के तीन जिलों की समीक्षा बैठक ली, और कहीं नरम तो कहीं सख्त नजर आए। मुख्यमंत्री उन महिलाओं तक भी पहुंचे, जो गांव की तस्वीर बदल रही हैं। ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी) में कोई बड़ा मंच नहीं था, बस एक प्रशिक्षण कक्ष था, जहां ऐसी महिलाएं बैठी थीं, जो कभी घर की चारदीवारी तक सीमित थीं, और आज अपने गांव के पशुओं की सेहत की जिम्मेदारी उठा रही हैं। आरसेटी केवल एक संस्थान नहीं बल्कि उन सैकड़ों सपनों का पड़ाव बन गया है। जिले में आरसेटी संस्थान के माध्यम से ग्रामीण बेरोजगार युवक-युवतियों और महिलाओं को कौशल आधारित प्रशिक्षण दिया जा रहा है। अब तक 16 बैचों में 510 प्रशिक्षणार्थी विभिन्न उद्यमी क्षेत्रों में तैयार हो चुके हैं, और हर कोई अपने-अपने गांव में बदलाव की एक छोटी सी लौ बन गया है। मुख्यमंत्री ने संस्थान की गतिविधियों का विस्तार से अवलोकन किया, प्रशिक्षणार्थियों से बात की और उनका उत्साह बढ़ाया। मुख्यमंत्री ने देखा कि, छत्तीसगढ़ के गांवों में बदलाव की असली ताकत वहां की महिलाओं के हाथों में है।
एक साधारण महिला की असाधारण जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री ने प्रशिक्षणार्थियों से उनके अनुभवों को जाना। विकासखंड रामचंद्रपुर के बगरा क्लस्टर, ग्राम केवली की अनुराधा गुप्ता आगे आईं। उन्होंने बताया कि वे बिहान योजना से जुड़कर पशु सखी के रूप में काम कर रही हैं। सुबह उठकर वे अपने गांव के पशुओं का सर्वे करती हैं, पशु चिकित्सकों को जानकारी देती हैं, और ग्रामीणों को पशुपालन की बारीकियां समझाती हैं। जो गाय-बैल कभी बीमार पड़ते थे और किसान हाथ मलते रह जाते थे, आज अनुराधा उस किसान के दरवाजे तक पहले पहुंच जाती हैं। इस बदलाव को मुख्यमंत्री ने करीब से देखा और महसूस किया।
यहां 510 जिंदगियां  जो आत्मनिर्भरता की राह पर चल पड़ी हैं
जीराफूल की खुशबू बनी पूर्णिमा के सपने की उड़ान
कुछ साल पहले तक पूर्णिमा बासिन के लिए घर चलाना रोजाना की जद्दोजहद थी। खेत था, मेहनत थी, लेकिन आमदनी उतनी नहीं थी कि बच्चों की फीस भर सके या घर की जरूरतें बिना सोचे-समझे पूरी कर सकें। वही पूर्णिमा आज जिले में लखपति दीदी के नाम से जानी जाती हैं। बदलाव की शुरुआत स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद हुई। बैंक लिंकेज और सीआईएफ के जरिए उन्हें ऋण मिला और उन्होंने उस पैसे को किसी साधारण काम में नहीं लगाया। उन्होंने जैविक खेती का रास्ता चुना और जीराफूल चावल उगाया। एक पारंपरिक, सुगंधित किस्म का चावल, जिसकी मांग आज पूरे प्रदेश में है। पूर्णिमा ने मुख्यमंत्री को बताया कि एक साल में 3 लाख रुपये का चावल वे बेच चुकी हैं, जो उसकी वर्षों की मेहनत और आत्मविश्वास का परिणाम था।
बच्चों को बेहतर पढ़ा पा रही हूं, यही असली कमाई है
पूर्णिमा बताती हैं कि पैसे से बड़ी जो चीज उन्हें मिली, वह है बच्चों के लिए बेहतर कल की उम्मीद। आज वे अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिला रही हैं, परिवार की जरूरतें आसानी से पूरी हो रही हैं। सबसे बड़ी बात, अब उन्हें किसी के आगे हाथ नहीं फैलाना पड़ता है। बलरामपुर जिले में बरियों का गांधी समूह, दुर्गापुर का संतरा समूह और दुर्गा समूह जैसी महिलाएं हस्तशिल्प से लेकर खाद्य उत्पादों तक अपने हुनर को बाजार तक पहुंचा रही हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने संयुक्त जिला कार्यालय परिसर में इन स्व-सहायता समूहों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया, तो वे सिर्फ स्टाल नहीं देख रहे थे, बल्कि उन हजारों हाथों की ताकत को देख रहे थे, जो आज खाली नहीं हैं। उन्होंने 5 समूहों को बैंक लिंकेज के तहत 21 लाख रुपये का चेक भी प्रदान किया।
कछिया की सरपंच निभा रही मां जैसी जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बलरामपुर जिले में एक ऐसी महिला का सम्मान किया, जो दिल को छू गया। जनपद पंचायत वाड्रफनगर अंतर्गत ग्राम पंचायत कछिया की सरपंच खुशबू सिंह और सचिव सुनीता मरावी को मुख्यमंत्री ने शील्ड और प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया। इस छोटे से गांव ने पीएआई 2.0 सर्वे में प्रदेश भर में बाल हितैषी पंचायत की श्रेणी में 95.71 अंकों के साथ प्रथम स्थान हासिल किया। यह उपलब्धि बताती है कि जब एक गांव की महिला नेतृत्व में आती है, तो वह सबसे पहले बच्चों का भविष्य सुनिश्चित करती है।
बाक्स में
पीडब्ल्यूडी के अधिकारी को फटकारा, कहा-बाहर जाओ, सही जानकारी लेकर आओ
सुशासन तिहार के तहत आयोजित समीक्षा बैठक में जब पीडब्ल्यू के एक अधिकारी सड़क मरम्मत की सही जानकारी नहीं दे पाए, तो मुख्यमंत्री ने सीधे कहा मीटिंग से निकलो, बाहर जाओ, अपने सचिव से बात करो और सही जानकारी लेकर आओ। इसके बाद कमरे में सन्नाटा छा गया। संदेश साफ था अब बहानेबाजी नहीं चलेगी। मुख्यमंत्री ने कुछ देर बाद अधिकारियों से कहा कि हम सब जनता के सेवक हैं। हम सभी को अपने कार्यालय को सेवा तीर्थ समझना है, यह आम जनता की सेवा करने का मंदिर है। इन दोनों बातों से मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय एक कड़क प्रशासक और जनता के हमदर्द दोनों रूप में एक साथ दिखे। मुख्यमंत्री ने बैठक में साफ कहा कि सरकार का विकास सड़क से दिखता है। पीडब्ल्यूडी विभाग के द्वारा सड़क मरम्मत में देरी पर उन्होंने कड़ी नाराजगी जताई और निर्देश दिया कि, मानसून आने से पहले सभी सड़कों की मरम्मत पूरा हो। उन्होंने कहा कि आबादी क्षेत्रों की सड़कों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। चेतावनी देते हुए कहा कि ध्यान दो, नहीं तो ठीक नहीं होगा।
राजस्व अभिलेख अब डिजिटल, घर बैठे मिलेगा खसरा-नक्शा
आम नागरिकों के लिए बड़ी घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरे राज्य के राजस्व अभिलेखों का डिजिटलीकरण किया जाएगा। सभी भूमि खंडों के खसरा-नक्शे डिजिटल प्रामाणिक हस्ताक्षर सहित सीधे लोगों को वितरित किए जाएंगे। साथ ही मुख्यमंत्री हेल्प लाइन सेवा जल्द शुरू होगी, जिसमें टोल फ्री नंबर पर समस्या दर्ज कराई जा सकेगी। उन्होंने कलेक्टर्स  को स्पष्ट निर्देश दिया कि,  राजस्व मामले समय-सीमा में निपटाएं, आम जनता को दफ्तरों के चक्कर न लगाना पड़े।
मुख्यमंत्री ने जिला खनिज निधि के दुरुपयोग पर भी कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि डीएमएफ की 70 फीसदी राशि खदान के पास के गांवों पर खर्च होनी चाहिए।  मुख्यालय के नाम पर इसे खर्च करना स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने  बलरामपुर के सीमावर्ती क्षेत्रों में खनिज संसाधनों के बेहतर उपयोग करने के निर्देश दिए।
पानी, बीमारी और खाद हर मोर्चे पर तैयार रहो
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि कोई भी नागरिक पेयजल के लिए न भटके। जहां साधन नहीं हैं, वहां टैंकर से पानी पहुंचाया जाए। गर्मी और बारिश के बीच मौसमी बीमारियों से निपटने की अग्रिम तैयारी करने को कहा। साथ ही सुनिश्चित किया जाए कि धान, बीज और खाद की कमी को लेकर किसानों से कोई शिकायत न आए। उन्होंने कहा हम सभी जनता का सम्मान करें, उन्हें इज्जत दें, धैर्य से सुनें और उनका काम समय पर पूरा करें। साथ ही कलेक्टरों को भी निर्देश दिया कि वे अपने अधीनस्थ अधिकारियों के काम का नियमित मूल्यांकन करें और जरूरत पड़ने पर कठोर कार्रवाई से न हिचकें।

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