पार्षद ने मुख्यमंत्री, वन मंत्री को लिखा पत्र, कहा-प्लांटेशन का हुआ सफाया

अंबिकापुर। शहर से लगे संरक्षित वन क्षेत्र खैरबार बधियाचुंवा, बाकी डेम के कक्ष क्रमांक 2581 एवं 2582 में बेतहाशा अवैध कब्जे पर वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की संलिप्तता की जांच कराने बावत वरिष्ठ भाजपा नेता एवं पार्षद आलोक दुबे ने पत्र प्रेषित करके छत्तीसगढ़ शासन के मुख्यमंत्री, वन मंत्री का ध्यानाकर्षण कराया है। इसमें उल्लेख है कि शहर की सीमा से लगा सघन एवं संरक्षित वन क्षेत्र करीब 1500 एकड़ के आस-पास का है। इसमें महामाया पहाड़, खैरबार, बधियाचुंवा बाकी डेम एवं लालमाटी लुचकी का इलाका आता है। जनवरी 2025 एवं जून 2025 में महामाया पहाड़ एवं रनपुर खुर्द चोरकाकछार में जिला प्रशासन एवं वन विभाग की संयुक्त टीम ने शासन के निर्देश पर करीब 100 मकानों के अतिक्रमण को हटाया, इसके बाद भी इस हरे-भरे वन संरक्षित क्षेत्र में अवैध कब्जा की प्रकिया नहीं रुक रही है। आरोप है कि वन विभाग के बीटगार्ड, वन रक्षक, फॉरेस्टर, डिप्टी रेंजर, रेंजर, एसडीओ वन की भू-माफियाओं से मिलीभगत एवं लाखों रुपये की अवैध वसूली के कारण इस संरक्षित वन क्षेत्र में हो रहे अवैध कब्जे की खबर लेने ग्रामीणों एवं जन प्रतिनिधियों की शिकायत पर वन संरक्षित क्षेत्र में रेंजर, एसडीओ एवं वन मण्डलाधिकारी मौके पर नहीं पहुंचते है। उन्होंने मुख्यमंत्री, वन मंत्री सहित वन विभाग के उच्च अधिकारियों से आग्रह किया  है कि अति महत्वपूर्ण वन संरक्षित क्षेत्र, जो संपूर्ण अंबिकापुर का ऑक्सीजन हब है, इस इलाके में वन विभाग के उच्चधिकारियों को टीम का गठन करने के लिए निर्देशित किया जाए और अवैध अतिक्रमण को हटाकर अगामी बारिश में नए सिरे से पौधा रोपध कराकर हरियाली वापस लाने की पहल की जाए। उन्होंने कहा है कि अभी से कार्य जोजना बनाकर जांच टीम को मौके का निरीक्षण करना होगा और इस मामले में वन विभाग का अमला, जो लाखों रुपये अवैध उगाही करके कब्जा को संरक्षण देने में लगा है, उनके उपर कार्रवाई की जानी चाहिए, क्योंकि होली के आस-पास खैरबार क्षेत्र में सागौन प्लांटेशन को बड़ी मात्रा में काटकर अवैध अतिक्रमण का प्रयास किया गया है।

Spread the love