रामानुजगंज जेल से न्यायालय लाते वक्त यात्री बस की खिड़की से कूदकर भागा था
निलम्बित प्रधान आरक्षक और आरक्षक ने पकड़ा, हत्या की कोशिश का है आरोपी

अंबिकापुर। बलरामपुर जिला के रामानुजगंज जेल से पेशी के लिये यात्री बस से लाते समय बस की खिड़की से कूदकर भागा हत्या की कोशिश मामले में, धारा 307 का बंदी अंबिकापुर शहर के सत्तीपारा में चोरी की मोटरसायकल में धारदार हथियार के साथ घूमते पकड़ में आया। मामले में निलम्बित हुये जिले के पुलिस लाइन में पदस्थ प्रधान आरक्षक और आरक्षक करीब एक सप्ताह से बंदी के खोजबीन में लगे थे।
जानकारी के मुताबिक, हत्या का प्रयास करने मामले में विचाराधीन बंदी विकास दास पिता मनोज दास को अंबिका बस से बीते 6 जुलाई को रामानुजगंज जेल से पेशी के लिये न्यायालय लेकर प्रधान आरक्षक रामकुमार और आरक्षक प्रमोद टोप्पो लेकर आ रहे थे। चलगली मोड़ में बस की रफ्तार कम हुई और बंदी मौका देखकर बस की खिड़की से कूदकर आसानी से फरार हो गया था। काफी खोजबीन के बाद भी उसका पता नहीं चला।
दोनों पुलिस कर्मियों को किया गया था निलंबित
वरिष्ठ अधिकारियों को प्रधान आरक्षक ने न्यायालय ले जाते वक्त यात्री बस की खिड़की से बंदी के भागने सूचना दी थी। इसके बाद फरार बंदी के खोजबीन में पुलिस जुटी, लेकिन उसका पता नहीं चल रहा था। घटना प्रकाश में आने के बाद अगले दिन 7 जुलाई को प्रधान आरक्षक और आरक्षक की लापरवाही मानते हुये दोनों को निलम्बित करने की कार्रवाई की गई थी। बंदी के भागने और हुई विभागीय कार्रवाई के बीच दोनों निरंतर इसे तलाश रहे थे।
भागने की कोशिश विफल, दौड़ाकर पकड़ा
मंगलवार को पूरी रात शहर का चप्पा-चप्पा छानने के बाद बुधवार को दोपहर करीब एक बजे फरार बंदी विकास दास अंबिकापुर के सत्तीपारा मोहल्ले में मोटरसायकल में घूमते मिला। भगोड़े को पकड़ने ये मोटरसायकल के सामने आ गये, लेकिन वह मोटरसायकल गिराकर भागने लगा। इसके बाद भी पुलिस कर्मियों ने हार नहीं मानी और धारदार हथियार पास में रहने के बावजूद दौड़ाकर उसे अपने कब्जे में ले लिया, और कोतवाली थाना में इसकी जानकारी देने के लिये बलरामपुर जिले के प्रधान आरक्षक और आरक्षक पहुंचे थे।
गांधीनगर थाना क्षेत्र से चोरी किया मोटरसायकल
पूछताछ में सामने आया कि, जिस मोटरसायकल में वह चाकूनुमा हथियार लेकर दिनदहाड़े घूम रहा था, उसे अंबिकापुर के गांधीनगर थाना क्षेत्र से चोरी किया था। अंबिकापुर में वह कहां ठिकाना बनाकर रह रहा था, यह अस्पष्ट है। पास में मिले हथियार से इतना तो स्पष्ट है कि, वह किसी वारदात को अंजाम देने की फिराक में था। भगोड़े बंदी के हाथ लगने से जहां एक ओर निलम्बित पुलिस कर्मी राहत महसूस कर रहे हैं, वहीं फरार अवधि में इसके द्वारा किसी प्रकार की वारदात को तो अंजाम नहीं दिया गया, इसकी तहकीकात भी चल रही है।  

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