21 दिन पहले भागे मास्टर माइंड ने वापसी के बाद सुरक्षा व्यवस्था को पुन: दी चुनौती  

अंबिकापुर। शहर के कन्या परिसर रोड बिशुनपुर स्थित बाल संप्रेक्षण गृह से मंगलवार, 14 जुलाई की शाम 13 अपचारी बालक पुराने दरवाजे को तोड़कर फरार हो गए। 21 दिन के अंतराल में बाल गृह से बच्चों के भागने की यह दूसरी घटना है। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए इनमें से 5 बालकों को बरामद कर लिया है, जबकि 8 बालकों की तलाश जारी है। इसके पहले यहां से 11 अपचारी बालक भागे थे। भागने वालों में मास्टर माइंड भी शामिल है, जिसने बाल संप्रेक्षण गृह की सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देने का काम किया है। बाल संप्रेक्षण गृह प्रबंधन की ओर से इसकी सूचना गांधीनगर थाने में दी गई थी। इसके बाद हरकत में आई पुलिस ने 13 में से 5 अपचारी बालकों को बारमद कर लिया है। इनमें से 2 कोरिया जिले के चरचा चले गये थे, जबकि 3 बालकों को अलग-अलग स्थान से बरामद किया गया है।
जानकारी के मुताबिक, 14 जुलाई की रात करीब 8 बजे अंबिकापुर के बिशुनपुर स्थित बाल संप्रेक्षण गृह से 14 अपचारी बालक पुराने दरवाजे को तोड़कर बाहर परिसर में निकल गये। इनमें से एक को तो पकड़ लिया गया, लेकिन अन्य 13 दीवार फांदकर भागने में सफल हो गये। सूचना पर परिवीक्षा अधिकारी समेत गांधीनगर पुलिस मौके पर पहुंचे और जांच शुरु की। पता चला कि अपचारी बालकों में शामिल मास्टर माइंड बीते 23 जून को भी बाल संप्रेक्षण गृह से 10 अपचारी बालकों के साथ फरार हुआ था, हालांकि पुलिस टीम उसे ढूंढने में सफल हो गई थी। पुलिस ने समाचार लिखे जाने तक 5 अपचारी बालकों को बरामद कर लिया है, जबकि 8 की तलाश जारी है। पुलिस रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड समेत अन्य संभावित जगहों पर दबिश दे रही है। वहीं इनके स्वजन से संपर्क करके बालकों के बारे में पता चलने पर सूचना देने कहा है। घटना को देखते हुये जिला व पुलिस प्रशासन को एहतियात बतौर यहां पुख्ता व्यवस्था करने की जरूरत है। बिलासपुर के बाल संप्रेक्षण गृह की घटना से भी सबक लेने की जरूरत है। फरार बच्चों में सरगुजा, बलरामपुर और कोरिया के बालक हैं।
पहले तोड़ा खिड़की, अब दरवाजा
अंबिकापुर बाल संप्रेक्षण गृह से 23 जून को 11 अपचारी बालक फरार हुये थे। वारदात को खिड़की तोड़कर अंजाम दिया गया था। इनमें से 9 को पुलिस ने पकड़ा, इनमें कुछ खुद लौट गये थे। घटना के बाद कलेक्टर व एसएसपी ने संप्रेक्षण गृह का निरीक्षण किया था। इस दौरान यह बात सामने आई थी कि यहां के खिड़की-दरवाजे पुराने व जर्जर हालत में हैं। इसे देखकर कलेक्टर ने व्यवस्था में बदलाव के निर्देश दिए थे। इधर लचर कार्यप्रणाली की वजह से सुरक्षा की अनदेखी हुई और 21 दिन में दोबारा अपचारी बालकों ने घटना को अंजाम दिया।
नगर सैनिकों के पदस्थापना का मिला था आश्वासन
बाल संप्रेक्षण गृह के अधीक्षक 2 सप्ताह के लिए छुट्टी पर हैं, ऐसे में परिवीक्षा अधिकारी शमा नूरी के पास यहां का प्रशासनिक प्रभार है। उन्होंने बताया कि अपने साथ 12 अन्य अपचारी बालकों को भगाने में मास्टर माइंड अपचारी का हाथ है। वह 3 पुराने तथा 10 नये अपचारी बच्चों को भगाया है। उन्होंने बताया कि बाल संप्रेक्षण गृह की सुरक्षा के लिहाज से 23 जून की घटना के बाद एसएसपी से मिलकर नगर सैनिकों को यहां पदस्थ करने की मांग की गई थी, इस पर आश्वासन मिला था। वहीं पुराने, जर्जर खिड़की-दरवाजों की मरम्मत और बदलने का काम चल रहा है, इसी बीच यह घटना हो गई।

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