अंबिकापुर। आषाढ़स्य प्रथम दिवसे के अवसर पर सरगुजा जिले के ऐतिहासिक व सुरम्य स्थल रामगढ़ में आयोजित दो दिवसीय रामगढ़ महोत्सव 2026 के दौरान राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। अतिथियों ने रामगढ़ की ऐतिहासिक विरासत को नमन करते हुए इस शोध संगोष्ठी को क्षेत्र के विकास और इसे वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक मील का पत्थर बताया। आस्था, संस्कृति, नाट्य परंपरा और पर्यटन के इस अनूठे समागम में विद्वानों, शोधकर्ताओं और गणमान्य अतिथियों ने शिरकत की।
इस अवसर पर राज्यपाल पुरस्कृत, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी स्मृति पुरस्कार से सम्मानित साहित्यकार अजय कुमार चतुर्वेदी ने  ‘पर्यटन की दृष्टि से रामगढ़ का वैश्विक महत्व और संरक्षणÓ विषय पर महत्वपूर्ण एवं ज्ञानवर्धक शोध पत्र का वाचन किया, जिसे उपस्थित प्रबुद्धजनों और अतिथियों ने सराहा। शोध पत्र का वाचन करते हुए अजय चतुर्वेदी ने रामगढ़ पर्वत के संरक्षण और संवर्धन के विषय में विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने जोर देकर कहा कि रामगढ़ केवल एक पहाड़ी नहीं, बल्कि ऐतिहासिक, पुरातात्विक, साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक महत्व के साथ-साथ अद्वितीय प्राकृतिक महत्व भी रखता है। उन्होंने कहा, यदि हमें रामगढ़ के ऐतिहासिक व सांस्कृतिक अस्तित्व को हमेशा के लिए जीवंत बनाए रखना है, तो यहां की जो अनमोल प्राकृतिक देन, वनस्पति, जीव-जंतु और प्राकृतिक वातावरण को हर हाल में सुरक्षित रखना होगा। रामगढ़ का संवर्धन करके ही हम इसे वैश्विक पटल पर एक बड़े ईको-टूरिज्म और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में स्थापित कर सकते हैं।
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संस्कृति मंत्री ने शोध कार्य को सराहा, किया सम्मानित
छत्तीसगढ़ शासन के संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल नेे जिला पुरातत्व संघ सूरजपुर के सदस्य अजय कुमार चतुर्वेदी की साहित्यिक साधना और इस महत्वपूर्ण शोध कार्य की सराहना करते हुए प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह प्रदान करके सम्मानित किया। महोत्सव के दौरान विभिन्न सत्रों में रामगढ़ के गौरवशाली इतिहास, महाकवि कालिदास की नाट्यस्थली और मेघदूतम की रचना भूमि के वैश्विक महत्व पर गंभीर मंथन किया गया। वक्ताओं ने रामगढ़ को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर मजबूती से स्थापित करने के संकल्प को दोहराया। इस मौके पर सरगुजा सांसद चिंतामणि महाराज, विधायक प्रबोध मिंज, पूर्व सांसद कमलभान सिंह, पार्षद आलोक दुबे सहित अन्य उपस्थित रहे।

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