15 अगस्त से पहले बड़ा फैसला, अच्छे आचरण पर समय-पूर्व रिहाई, अंबिकापुर से 16 रिहा

अंबिकापुर। स्वतंत्रता दिवस 2026 के पावन अवसर पर छत्तीसगढ़ सरकार ने मानवीय फैसला लेते हुए प्रदेश के 5 केंद्रीय जेलों में बंद आजीवन कारावास प्राप्त 101 बंदियों को समय-पूर्व रिहा कर दिया है। अंबिकापुर के केंद्रीय जेल से 13 अगस्त को 8 कैदियों की रिहाई हुई है। आज 14 अगस्त को 8 अन्य कैदियों की रिहाई सुनिश्चित है। 13 अगस्त को जब कैदियों के रिहाई का पल आया, तो वे भावुक हो गए और उनकी आंखें नम हो गईं।
जेल विभाग द्वारा जारी सूची के अनुसार, 13 अगस्त से 18 अगस्त के बीच चरणबद्ध तरीके से कैदियों को रिहा किया जाएगा। जेल नियमावली 358 के तहत समीक्षा बोर्ड की सिफारिश पर अच्छे आचरण वाले कैदियों को यह लाभ दिया गया है। इसके लिए बनाए गए रोस्टर के मुताबिक 13-14 अगस्त को प्रदेश भर के जेलों से 49 कैदी और 14 अगस्त को 45 कैदी रिहा होंगे। यानी स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले 94 कैदी जेल से बाहर आ जाएंगे। जेल विभाग के नोट के अनुसार 17 एवं 18 अगस्त को भी बंदियों की रिहाई होगी। इसके बाद कुल 101 बंदियों की समय-पूर्व रिहाई की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।
स्वजन में खुशी का माहौल
रिहाई की खबर सुनते ही कैदियों के स्वजन में खुशी की लहर है। 14-15 साल बाद अपनों के बाहर आने की उम्मीद में स्वजन जेल के बाहर पहुंचे। अधिकारियों का कहना है कि यह रिहाई समाज में सुधार और पुनर्वास का संदेश देती है।
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आजीवन कारा से दंडित कैदियों के जेलवार आंकड़े
केन्द्रीय जेल रायपुर-13 अगस्त को 9, 14 अगस्त को 14।
केन्द्रीय जेल बिलासपुर-13 अगस्त को 14, 14 अगस्त को 15।
केन्द्रीय जेल दुर्ग-13 अगस्त को 13, 14 अगस्त को 8।
केन्द्रीय जेल अंबिकापुर-13 अगस्त को 8, 14 अगस्त को 8।
केन्द्रीय जेल जगदलपुर-13 अगस्त को 5, 14 अगस्त को 0।  
17-18 अगस्त को होगी 7 अन्य कैदियों की रिहाई।
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जेल नियमावली के तहत हुई रिहाई
फोटो-अक्षय सिंह राजपूत
केंद्रीय जेल अंबिकापुर के अधीक्षक अक्षय सिंह राजपूत ने बताया कि, जेल नियमावली के तहत संबंधित जिले के कलेक्टर और जेल अधीक्षक की रिपोर्ट पर समीक्षा बोर्ड गठित की जाती है। बोर्ड कैदी के आचरण, व्यवहार और जेल में किए गए कार्यों की समीक्षा करता है। इसके बाद ही समय-पूर्व रिहाई की सिफारिश शासन को भेजी जाती है। अधीक्षक ने कहा कि केन्द्रीय जेल, अंबिकापुर से 16 कैदियों को रिहा किया जा रहा है। ये सभी कैदी आजीवन कारावास की सजा काट रहे थे और 14-15 वर्षों से जेल में बंद थे। ‘रिहा हुए कैदियों का जेल में आचरण काफी अच्छा रहा। हम उम्मीद करते हैं कि अन्य कैदी भी जेल नियमों का पालन करेंगे ताकि भविष्य में उन्हें भी शासन की इस योजना का लाभ मिल सके।Ó
पारिश्रमिक और पुनर्वास की व्यवस्था
केंद्रीय जेल के अधीक्षक ने बताया कि, रिहा होने वाले कैदियों को जेल में रहते हुए अर्जित किया गया पारिश्रमिक भी वापस किया जा रहा है। इनके बैंक खाते हैं उनमें राशि ट्रांसफर की गई है, अन्य को चेक दिया गया है। इसके साथ ही कैदियों के पुनर्वास के लिए हमारा इंडियन ओवर्सीज बैंक से एमओयू हुआ है, यहां से रिहा होने वाले कैदियों के जीवकोपार्जन के लिए अल्प ऋण की सुविधा भी दिलाई जाएगी, ताकि वे जेल से बाहर आकर स्वरोजगार कर सकें। उन्होंने बताया कि एक कैदी बिटुल कुरवा जेल में सिलाई का कार्य करता था, उसने आर्थिक सहायता की मांग की है।
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जाने-अनजाने में गलती हो गई, अफसोस रहेगा  
सीतापुर के ओम प्रकाश धनकी ने कहा ‘मैं आजादी के पावन पर्व पर रिहा हो रहा हूं। अब अपने घर-परिवार के साथ जाकर जीवन यापन कर सकूंगा। इसलिए मुझे बेहद खुशी हो रही है। ओम ने शासन को धन्यवाद दिया कि, अच्छे चाल-चलन की वजह से सजा को माफ करके उन्हें रिहा किया गया है और समाज की मुख्यधारा में जीने का अवसर प्रदान किया है। उन्होंने अपनी गलती पर अफसोस जताते हुए कहा कि ‘जाने-अनजाने में आक्रोश में आदमी अपना होश खो बैठता है। जाने-अनजाने में एक निर्दोष पर आरोप लगा। मुझे जीवन पर्यंत इसका अफसोस रहेगा। मैंने जेल में इसका प्रायश्चित किया है और ईश्वर से दुआ करता हूं कि उस निर्दोष की आत्मा को शांति मिले।Ó ओम प्रकाश ने बताया कि उनका मामला एनकाउंटर टाइप था। चाचा की हत्या के मामले में उन्हें और अन्य 5 लोगों को सजा हुई थी। तीन पहले रिहा हो चुके थे, अब हम तीन रिहा हुए हैं।

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