सड़क का एक हिस्सा धंसने से गड्ढे में झांकने पर गहरी खाई नजर आ रही

अंबिकापुर। अंबिकापुर शहर को प्रतापपुर से जोड़ने वाली मुख्य सड़क से लगे धोबीघाट पुल के एक हिस्से में एक गड्ढा बड़ा आकार धीरे-धीरे बड़ा आकार लेते जा रहा है, जिससे लोग इसे ‘मौत का गड्ढाÓ की संज्ञा देने लगे हैं। इससे कुछ पहले मुक्तिधाम भी है। इस मार्ग से रोजाना हजारों दोपहिया, चारपहिया वाहन, मालवाहक, यात्री बसें और स्कूल वाहनों का आना-जाना होता है। पुल के एक तरफ की सर्विस लेन में सड़क का एक हिस्सा धंसते जा रहा है, जो गहरा होने के साथ खतरनाक प्रतीत हो रहा है। गड्ढे में झांकने पर नीचे गहरी खाई नजर आती है।
पीले-काले रंग से पुताई की गई पुल की पटरी के बिल्कुल साथ यह गड्ढा है। एक छोटी सी चूक, और दोपहिया या पैदल चलने वाला सीधा खाई में जाकर गंभीर स्थिति में पहुंच सकते हैं। अंधेरे में यह गड्ढा दोपहिया ही नहीं चारपहिया चालकों को नियंत्रण से बाहर कर सकता है। दिन के उजाले में भी अगर किसी की नजर इस पर अचानक पड़ी तो खतरे की स्थिति बन सकती है। इस मार्ग में सड़क के बीचों-बीच डिवाइडर पर बिजली के खंभे लगे हैं, लेकिन रात में अधिकतर यह मार्ग अंधेरे में डूबा रहता है, जिससे अपराधिक वारदातों को भी बल मिलता है। कभी आधी लाइट जलती है, तो कभी एक भी नहीं। मार्ग व्यस्त होने और रोजाना हजारों राहगीरों के सफर को देखते हुये आसपास के लोग भी अंधेरे को लेकर सवाल उठाते रहते हैं। इधर सड़क में बड़ा आकार ले रहे गड्ढे ने लोगों को चिंतित कर दिया है। स्कूल वाहन, बसें और भारी ट्रक रोजाना डिवाइडर के आरपार से निकलते हैं। गड्ढे से अनजान चालक बचाव के चक्कर में नियंत्रण खो सकता है, और पीछे से आने वाले वाहन चालक भी खतरे में पड़ सकते हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है, ऐसा लगता है कि कोई बड़ा हादसा होने के बाद जिम्मेदारों की नजर इस पर जायेगी।
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बारिश का पानी सड़क को कर सकता है खोखला
हाल में इस मार्ग की सुंदरता बढ़ाने के लिये धूल और धूप में रंगहीन हो चुके डिवाइडर की दीवार और पुल का एहसास कराने के लिये दोनों ओर सुरक्षा की दृष्टि से बने रेलिंग में जमी काई की साफ-सफाई करके रंगरोगन किया गया है, लेकिन किसी की इस गड्ढे पर नजर नहीं पड़ी। ऐसे हालातों को देखते हुये लोगों का कहना है कि, जिम्मेदारों को गड्ढे के चारों तरफ रिफ्लेक्टर, बैरीकेड लगाकर मार्ग से आने-जाने वालों को सावधान करने की जरूरत है, ताकि लोग किसी हादसे का शिकार न हों। साथ ही क्षतिग्रस्त हिस्से की मजबूती के लिये त्वरित सुधार कार्य की जरूरत लोग महसूस कर रहे हैं, अन्यथा बारिश की स्थिति में गड्ढे में जाने वाला पानी का तेज बहाव सड़क को अंदर से पूरी तरह से खोखला कर सकता है, और सड़क धंसने से गंभीर स्थिति बन सकती है।
स्ट्रीट लाइट बंद रहने से छाया रहता है घुप्प अंधेरा
अंबिकापुर-प्रतापपुर मार्ग में लोगों के अनवरत आवाजाही को देखते हुये स्ट्रीट लाइट चालू हालत में रहे, यह सुनिश्चित किया जाना भी जरूरी है, क्योंकि इस मार्ग में सड़क के किनारे कई विशाल पेड़ हैं, जो आंधी-तूफान, बारिश के बीच हर वर्ष धराशायी होकर बिजली पोल तक को क्षतिग्रस्त कर देते हैं। कुछ दिन पहले आंधी-पानी के बीच यूकेलिप्टस के बड़े पेड़ धराशायी हुये थे, जो आज भी मौके पर पुराने बिजली खंभे के तार के साथ सड़क मार्ग से लगे फुटपाथ तक गिरा पड़ा है, इसे हटाने की जरूरत आज पर्यंत महसूस नहीं की गई है। जिम्मेदारों का ध्यान ऐसे पेड़ों पर भी नहीं है, जो तेज हवा, आंधी के झोंके में धराशायी हो सकते हैं।
डिवाइडर में लगा लोहे का रेलिंग भी गायब हो रहा
इस मार्ग में बनाये गये डिवाइडर में लोहे का वजनी रेलिंग लगाया गया था, इसके कई हिस्से का रेलिंग गायब हो गया है। रेलिंग के लगे रहने से अगर डिवाइडर के पार से कोई बड़ी-छोटी वाहन गुजरती थी, तो उसके लाइट की चकाचौंध विपरीत दिशा से जा रहे वाहन चालकों पर कम असर डालती थी। सड़क में घुप्प अंधेरा छाये रहने की स्थिति में बड़ी वाहनों के हेड लाइट की चकाचौंध कई बार दोपहिया या अन्य छोटी वाहनों के चालकों पर भारी पड़ती है। वहीं आवारा कुत्तों के द्वारा अचानक लगाई जाने वाली दौड़ से विशेषकर दोपहिया चालकों को आये दिन सामना करना पड़ता है। कई बार बाइक सवार गिरकर जख्मी भी हो चुके हैं।

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