अंबिकापुर। ऑटो चालक से डकैती के मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर लिया है। दोनों आरोपी उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं।
जानकारी के मुताबिक, सूरजपुर जिला के जयनगर थाना अंतर्गत ग्राम कल्याणपुर निवासी धर्मेन्द्र यादव पिता गणेश प्रसाद यादव 12 मई को रात्रि करीब 12 बजे, शादी समारोह में कोलडीहा से ऑटो लेकर अपने घर कल्याणपुर जाने के लिये निकला था। रात करीब 12.40 बजे ग्राम घंघरी गेरवानी नाला के पास पीछा कर रहे 6 पल्सर मोटरसायकल में सवार करीब 10-12 लड़के आये और ऑटो के सामने मोटरसायकल को अड़ा दिये। आरोपी अपने जेब से गन निकालकर जान से मारने की धमकी देते हुए एकवा कंपनी का मोबाइल लूट लिए और सकालो की तरफ भाग गए। रिपोर्ट पर 13 मई को थाना गांधीनगर में धारा 126(2), 310(2) बी.एन.एस. एवं 25 आर्म्स एक्ट पंजीबद्ध करके विवेचना में लिया। अपराध की सूचना वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों की पतासाजी हेतु साइबर सेल अंबिकापुर एवं थाना गांधीनगर की संयुक्त टीम गठित की गई। पुलिस टीम द्वारा घटना स्थल के आस-पास के लोगों से पूछताछ एवं प्रतापपुर-अंबिकापुर मार्ग में लगे कई सीसीटीव्ही कैमरों का अवलोकन किया, जिसमें कुछ लड़के घटना के बाद मोटरसाइकल से जाते हुए दिखाई दिये। पुलिस टीम ने फुटेज का बारीकी से अवलोकन करके आरोपियों की पहचान वैभव मिश्रा एवं लवकुश कुमार के रूप में की। पुलिस टीम द्वारा आरोपियों के संभावित ठिकानों पर दबिश देकर वैभव मिश्रा पिता ज्ञान प्रकाश मिश्रा 20 वर्ष, लवकुश कुमार पिता बंसीराम 24 वर्ष, निवासी ग्राम कुड़वार जिला सुल्तानपुर उत्तर प्रदेश हाल-मुकाम राजा गैस गोदाम के पास अंबिकापुर को हिरासत में लेकर पूछताछ की, तो दोनों आरोपियों ने अपना जुर्म स्वीकार किया। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार करके न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है। कार्रवाई में थाना प्रभारी निरीक्षक राजेश खलखो, थाना प्रभारी गांधीनगर निरीक्षक प्रवीण द्विवेदी, प्रभारी साइबर सेल अंबिकापुर, सहायक उप निरीक्षक अजीत कुमार मिश्रा, प्रधान आरक्षक भोजराज पासवान, विकास सिन्हा, जयदीप सिंह, आरक्षक मनीष सिंह, रमेश रजवाड़े, विकास मिश्रा, रमन मण्डल, राहुल सिंह, उमा शंकर साहू की सक्रिय भूमिका रही।

Spread the love

You missed

प्रशिक्षु उप निरीक्षकों को आरएफएसएल की जानकारी देने हुई दो दिवसीय कार्यशाला  संयुक्त संचालक, क्षेत्रीय न्यायालयिक विधि विज्ञान प्रयोगशाला कार्यालय के अधिकारियों ने दी विस्तृत जानकारीफोटो-2  छ.ग.फ्रंटलाइनअंबिकापुर। सरगुजा रेंज के विभिन्न जिलों में व्यवहारिक प्रशिक्षण करने हेतु आये सभी नव पदस्थ प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों को नई तकनिकी फोरेंसिक साइंस थ्योरी एवं प्रेटिकल प्रशिक्षण (आरएफएसएल) की जानकारी हेतु रेंज स्तर पर कार्यशाला का आयोजन पुलिस को-ऑडिनेशन सेन्टर, सरगुजा भवन में पुलिस महानिरीक्षक सरगुजा रेंज दीपक कुमार झा के निर्देशन में किया गया। इस दौरान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सरगुजा राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में फोरेंसिक साइंस थ्योरी एवं प्रेक्टिकल प्रशिक्षण के अधिकारी आर.के. पैकरा एवं कुलदीप कुजूर के द्वारा प्रशिक्षण दिया गया। इस नई तकनीकी प्रयोगशाला प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य किसी भी गंभीर प्रकरण के विवेचना के शुरूआती दौर से ही संग्रहित किये जाने वाले साक्ष्यों को पूर्णत: पारदर्शिता के साथ सुरक्षित एकत्रित किया जाता है ताकि भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय के समक्ष सुरक्षित पेश किया जा सके, जो कि अपराधिक कानूनों में फॉरेंसिक जांच की महत्ता दिया गया है।रेंज स्तर पर इस प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन दो बैच में कराया गया। प्रथम बैच 03 जुलाई को संपन्न हुआ, जिसमें जिला सूरजपुर, बलरामपुर एवं कोरिया के 38 प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों को प्रशिक्षण मिला। द्वितीय बैच में 07 जुलाई को सरगुजा, जशपुर एवं एमसीबी जिले के 40 प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों को इस प्रशिक्षण दिया गया। फोरेंसिक साइंस थ्योरी एवं प्रेटिकल प्रशिक्षण कार्यशाला में मुख्य रूप से संयुक्त संचालक, क्षेत्रीय न्यायालयिक विधि विज्ञान प्रयोगशाला अंबिकापुर के अधिकारी आर. के पैकरा एवं कुलदीप कुजूर के द्वारा अपने अनुभवों को साझा करते हुये कई ऐसे पुराने प्रकरणों के बारे में बताया जो कि बहुत ही बारीकी से उन्होंने साल्व किया है। उन्होंने कहा कि आप सब जब भी मैदानी थाना, चौकी क्षेत्रों में कार्य करेंगे तो अलग-अलग तरह के अनसुलझे प्रकरण आयेंगे, जैसे में बर्निंग केश, डिकम्पोज बॉडी, इलेक्ट्रिक शॉक, हैंगिंग, ड्रावनिंग, हत्या, शव निरीक्षण, घटनास्थल का निरीक्षण जैसे प्रकरणों का शुरूआती दौर से ही एक-एक साक्ष्यों का तकनीकी उपकरणों के माध्यम से सावधानी पूर्वक साक्ष्य संग्रहित करने के तरीके एवं बारीकियों के बारे में अधिकारियों ने विस्तृत जानकारी दी।बताया गया कि 1 जुलाई 2024 से लागू हुये नये अपराधिक कानून भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता एवं भारतीय साक्ष्य अधिनियम में फारेंसिक जांच की भूमिका को विशेष महत्व दिया गया है। इसमें विशेष रूप से 7 वर्ष या उससे अधिक सजा वाले अपराधों में फारेंसिक टीम के अधिकारियों के द्वारा जांच की अनिवार्यता है। इस हेतु रेंज के सभी जिलों में फारेंसिक वैज्ञानिक अधिकारी पदस्थ किये गये हंै, एवं आधुनिक मोबाइल फारेंसिक वैन प्रदाय किया है। प्रशिक्षण के अगली कड़ी में सभी प्रशिक्षु उप निरीक्षकों को क्षेत्रीय न्यायालयिक विधि विज्ञान प्रयोगशाला अंबिकापुर में ले जाकर बारीकी से एक-एक कर तकनीकि उपकरणों के बारे में जानकारी देकर घटना स्थल पर किस प्रकार प्रयोग/जांच किया जाना चाहिए, इन सारी तकनीकि उपकरणों के बारे में अवगत कराया गया। इसके उपरांत दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला में हर बिन्दुओं पर बारी-बारी से सभी प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों से उपस्थित अधिकारियों के द्वारा फीडबैक लिया गया, इस दौरान प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों से एक-एक करके पुन: तकनीकी उपकरणों एवं उसके उपयोग जैसे प्रश्नों के बाद त्रुटियों में सुधार किया गया।पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों एवं संयुक्त संचालक, क्षेत्रिय न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला के अधिकारियों ने कहा कि क्षेत्रिय एफएसएल से जांच में पारदर्शिता बढ़ेगी और बैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर अपराधियों तक पहुंचने में आसानी होगी जो कि न्यायिक प्रक्रिया में गति मिलेगी एवं लंबित मामलों के निपटारे में शीघ्रता आयेगी। प्रशिक्षण कार्यशाला के दौरान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सरगुजा अमोलक सिंह ढिल्लो, सीएसपी अंबिकापुर राहुल बंसल, रक्षित निरीक्षक अंबिकापुर तृप्ति सिंह राजपुत, पुमनि. कार्यालय के रीडर रेशम लाल साहू, स्थापना प्रभारी सुनील वर्मा सहित रेंज में पदस्थ सभी प्रशिक्षु उपनिरीक्षक उपस्थित रहे।