बीजापुर। एक महिला आरक्षक की शिकायत के बाद जिले में पदस्थ डिप्टी कलेक्टर दिलीप उइके को निलंबित कर दिया गया है। बालोद जिले के डौंडी थाना में दर्ज यह प्रकरण कुछ महीने पहले का है। महिला ने डिप्टी कलेक्टर उइके पर आरोप लगाया है कि उन्होंने शादी का वादा कर उससे कई बार शारीरिक संबंध बनाए, जबरन गर्भपात कराया और आर्थिक रूप से भी उसका शोषण किया।

महिला आरक्षक ने मुख्य सचिव को 12 बिंदुओं में विस्तृत शिकायत भेजते हुए यह भी आरोप लगाया कि बीजापुर जिला प्रशासन ने उइके को बचाने के लिए फर्जी प्रमाण पत्र जारी किए और नियमों के विपरीत अवकाश मंजूर किया। महिला ने अपने आरोपों के समर्थन में दस्तावेज भी प्रस्तुत किए हैं।

शिकायत के मुताबिक, वर्ष 2017 में जब वह डौंडी के आईटीआई में पढ़ाई कर रही थी, तभी उसकी उइके से जान-पहचान हुई, जो बाद में प्रेम संबंध में बदल गई। महिला का कहना है कि उइके ने शादी का भरोसा देकर उससे संबंध बनाए। मार्च 2017 में गर्भवती होने पर उइके ने पढ़ाई और नौकरी का हवाला देकर शादी टाल दी और दवा देकर गर्भपात करा दिया।

महिला के अनुसार, अगस्त 2017 में उसकी पुलिस विभाग में नौकरी लगने के बाद भी वह उइके से शादी की उम्मीद में उसकी पढ़ाई और कोचिंग के लिए हर महीने 4 से 5 हजार रुपये भेजती रही। वर्ष 2020 में उइके पीएससी परीक्षा पास कर डिप्टी कलेक्टर बने और बीजापुर में पदस्थ हुए। इसके बाद भी शादी का आश्वासन देकर संबंध बनाए जाते रहे।

गर्भवती होने पर जबरन गर्भपात कराने का आरोप
महिला ने आरोप लगाया कि जनवरी 2025 में वह बीजापुर स्थित सरकारी आवास में लगभग एक सप्ताह रही, जहां गर्भवती होने की जानकारी देने पर उइके ने उसे जबरन गर्भपात की दवा दी। फरवरी और मार्च 2025 में भी शादी का झांसा देकर संबंध बनाए गए। महिला ने बैंक से लोन लेकर कुल 3.30 लाख रुपये उइके के खाते में ट्रांसफर किए। 15 मई 2025 को तीसरी बार गर्भवती होने पर भी गर्भपात कराने का आरोप लगाया गया है।

इसके अतिरिक्त महिला का कहना है कि फरवरी 2023 में उइके ने उसके नाम पर एक मारुति कार खरीदी, जिसे फरवरी 2024 में उसके खाते में रकम डालकर अपने नाम ट्रांसफर कर लिया। महिला की शिकायत पर डौंडी थाना में एफआईआर दर्ज की गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए बीजापुर प्रशासन ने डिप्टी कलेक्टर दिलीप उइके को निलंबित कर दिया है और आगे की जांच जारी है।

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