आईजी ने साइबर सेल के निरीक्षक सहित 4 को रक्षित केंद्र भेजा
अंबिकापुर। बलरामपुर-रामानुजगंज जिला के दहेजवार चौक में स्थित धनंजय ज्वेलर्स में चोरी के मामले में हिरासत में लिए गए एक आरोपी की मौत के बाद स्वजन गंभीर आरोप लगा रहे हैं। इनका कहना है रविवार को हुई मौत के बाद आज तक वे मृतक का शव नहीं देखे हैं। क्षुब्ध स्वजन पंचायत के सरपंच सहित अन्य जनप्रतिनिधियों के साथ मंगलवार को पूर्व मंत्री अमरजीत भगत के अंबिकापुर स्थित निवास में पहुंचे, और उमेश सिंह की मौत को सवालों के घेरे में लेते हुए पुलिस पर बर्बरता पूर्वक टार्चर करने का आरोप लगाया। इनके द्वारा मृतक के शव का पोस्टमार्टम दोबारा कराने, दोषी पुलिस कर्मियों के विरूद्ध अपराध दर्ज करने व एक करोड़ रुपये आर्थिक सहायता राशि की मांग की गई है। पूर्व मंत्री अमरजीत भगत के साथ आईजी सरगुजा रेंज से भी मृतक के स्वजन मुलाकात किए, जिस पर उन्होंने मामले की न्यायिक जांच चलने की बात कही। वहीं एक आदेश जारी करके साइबर सेल के निरीक्षक हिम्मत सिंह शेखावत व आरक्षक आकाश तिवारी, थाना बलरामपुर के सहायक उपनिरीक्षक राधेश्याम विश्वकर्मा व महिला आरक्षक माधुरी कुजूर को तत्काल प्रभाव से रक्षित केंद्र बलरामपुर संबद्ध कर दिया है।
बता दें कि बलरामपुर जिला मुख्यालय में स्थित राधेश्याम ज्वेलर्स में 30-31 अक्टूबर की मध्यरात्रि अज्ञात नकाबपोशों के द्वारा नकदी के अलावा लाखों रुपये का जेवरात चोरी किया गया था। इसके बाद हरकत में आई पुलिस चोरों के तलाश में जुटी और सीतापुर थाना क्षेत्र से 4 आरोपी और 2 सह आरोपी के अलावा सन्ना और अंबिकापुर से दो सह आरोपियों को गिरफ्तार की थी। पुलिस ने इनके पास से चोरी किए गए रकम और जेवरों को बरामद करना स्वयं के प्रेस नोट में बताई थी। इसमें सीतापुर थाना क्षेत्र के ग्राम नकना निवासी उमेश सिंह 18 वर्ष का नाम शामिल नहीं था, जिसे घटना के बाद अलसुबह 5 बजे घर से उठाकर बलरामपुर पुलिस ले गई थी। पुलिस ने चोरी की बड़ी वारदात का पर्दाफास तो किया, लेकिन इस बड़ी कार्रवाई के बीच उमेश सिंह की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का पर्दाफास नहीं किया। मृतक के शव को पोस्टमार्टम के बाद आननफानन में स्वजन को सौंपने की तैयारी में पुलिस थी, लेकिन पुलिस के द्वारा सही सलामत घर से निकले युवक की बीमारी से मौत की खबर उन्हें नहीं पच रही है, जिस कारण शव अस्पताल के मोर्चरी में पड़ा है और स्वजन भटक रहे हैं। इनके द्वारा पुलिस पर एफआईआर करने को लेकर थाने के सामने प्रदर्शन करने के दौरान उन पर लाठीचार्ज करने का भी आरोप लगाया है।
सड़क पर बैठकर करने लगे नारेबाजी

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