जांच टीम पहुंची, रिपोर्ट बनी, लेकिन हालत जस की तस

जरही। नगर पंचायत जरही में आवारा मवेशियों का जमघट प्रशासनिक लापरवाही का प्रतीक बन गया है। मीडिया में खबर प्रकाशित होने के बाद जांच टीम जरही पहुंची थी, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। सड़कों और कॉलोनियों में मवेशियों का जमावड़ा जस का तस बना हुआ है।
शाम ढलते ही मवेशी मुख्य सड़कों और कॉलोनियों में डेरा जमा लेते हैं। सुबह के समय पूरा इलाका गोबर से पट जाता है, जिससे नागरिकों का चलना मुश्किल हो जाता है। मॉर्निंग वॉक और सैर करने वाले लोगों को गोबर से बचते हुए निकलना पड़ता है। मुख्य मार्गों पर मवेशियों के बैठने से वाहन चालकों को गलत साइड से गुजरना पड़ता है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। पशु हॉर्न बजाने के बाद भी नहीं हटते, जिससे जाम की स्थिति बनती है।
सूत्रों के अनुसार, जांच अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजने की बात कही थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासनिक आदेशों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जरही में गोठान केवल कागजों पर सक्रिय है। वहां चारा-पानी और पशुओं के देखरेख की कोई व्यवस्था नहीं है। इस वजह से मवेशी सड़कों पर घूम रहे हैं और दुर्घटना का खतरा बढ़ा रहे हैं।
बयान
जांच टीम आई थी, हमने जेडी साहब को बताया था कि मवेशियों को गोठान में रखने से स्थिति और गंभीर हो जाएगी। हमें पहले ही कर्मचारियों को वेतन देने में दिक्कत हो रही है, मवेशियों के चारा-पानी की व्यवस्था कहां से करेंगे। नगर पंचायत के पास सीमित संसाधन हैं, कर्मचारियों का वेतन भी महीनों से लंबित है, तो गोठान चलाना कैसे संभव होगा।
मोहर लाल गहरवरीया, सीएमओ नगर पंचायत जरही

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