बिलाईगढ़ (वीएनएस)। लुटेरी दुल्हन हम अक्सर फिल्मों या रील में ही देखते व सुनते थे, जो शादी का झाँसा देकर दूल्हे परिवार को लूट फरार हो जाती थी। लेकिन सारँगढ़-बिलाईगढ़ जिले में कुछ ऐसा ही मामला सामनें आया हैं, जहाँ विवाह के लिए पहले 2 लाख रुपये मांगे फिर सुहागरात के दिन दूल्हे के घर में रखें पैसों के साथ सोने-चाँदी के जेवरात लेकर दुल्हन फरार हो गई। इसके बाद दूल्हे के परिवार ने थाने में जाकर लुटेरी दुल्हन के खिलाफ एफआईआर कराई हैं।

हम बात कर रहें हैं सारँगढ़ क्षेत्र के गाँव अमझर की, जहां एक दूल्हे के साथ हैरान करने वाला मामला सामने आया। पूरे फिल्मी स्टाईल में दुल्हन ने दूल्हे को ठगी का शिकार बनाया और सुहागरात के दिन सोने-चाँदी के जेवरात सहित घर में रखें 10,000 हजार रुपये नकदी के साथ रात का फायदा उठाकर फरार हो गई . रात को तकरीबन 1 बजे जब दूल्हे का नींद खुला तो दूल्हा को पता चला कि दुल्हन बिस्तर में ही नहीं है. दूल्हा घर की काफी खोजबीन की लेकिन दुल्हन कहीं नहीं मिली। जिसके बाद दुल्हन के रिश्तेदारों से भी संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनका भी मोबाईल नम्बर बन्द बताया। तब जाकर दूल्हे व उनके परिवार को ठगी होने का अहसास हुआ। आगे आनन-फानन में सारँगढ़ सिटीकोतवाली पहुँचकर आप-बीती घटना की जानकारी देते हुए लुटेरी दुल्हन व उनके रिश्तेदारों के खिलाफ एफआईआर कराकर कड़ी कार्रवाई की मांग की गई।

दूल्हा केशव प्रसाद पटेल की मानें तो पूजा पटेल यानी दुल्हन के अनुसार जिन्हें पैसा दिया गया वो उसकी माँ और भाई है जिन्हें ही 2 लाख रुपये दिया गया, आगे फिर पिता का तबियत खराब बताकर मन्दिर में शादी करने की बात कही और सराईपाली के अर्जुन्दा में स्थित दुर्गा मन्दिर में 21 मई को शादी कर गाँव अमझर आया। जहां सुहागरात के दिन खाने में नींद की गोली मिलाकर सभी को खिला दिया जिससे सभी देर रात तक सोते रहे। 1 बजे जब दूल्हा यानी केशव प्रसाद पटेल की नींद खुली तो इस कारनामे का पता चला।

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प्रशिक्षु उप निरीक्षकों को आरएफएसएल की जानकारी देने हुई दो दिवसीय कार्यशाला  संयुक्त संचालक, क्षेत्रीय न्यायालयिक विधि विज्ञान प्रयोगशाला कार्यालय के अधिकारियों ने दी विस्तृत जानकारीफोटो-2  छ.ग.फ्रंटलाइनअंबिकापुर। सरगुजा रेंज के विभिन्न जिलों में व्यवहारिक प्रशिक्षण करने हेतु आये सभी नव पदस्थ प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों को नई तकनिकी फोरेंसिक साइंस थ्योरी एवं प्रेटिकल प्रशिक्षण (आरएफएसएल) की जानकारी हेतु रेंज स्तर पर कार्यशाला का आयोजन पुलिस को-ऑडिनेशन सेन्टर, सरगुजा भवन में पुलिस महानिरीक्षक सरगुजा रेंज दीपक कुमार झा के निर्देशन में किया गया। इस दौरान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सरगुजा राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में फोरेंसिक साइंस थ्योरी एवं प्रेक्टिकल प्रशिक्षण के अधिकारी आर.के. पैकरा एवं कुलदीप कुजूर के द्वारा प्रशिक्षण दिया गया। इस नई तकनीकी प्रयोगशाला प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य किसी भी गंभीर प्रकरण के विवेचना के शुरूआती दौर से ही संग्रहित किये जाने वाले साक्ष्यों को पूर्णत: पारदर्शिता के साथ सुरक्षित एकत्रित किया जाता है ताकि भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय के समक्ष सुरक्षित पेश किया जा सके, जो कि अपराधिक कानूनों में फॉरेंसिक जांच की महत्ता दिया गया है।रेंज स्तर पर इस प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन दो बैच में कराया गया। प्रथम बैच 03 जुलाई को संपन्न हुआ, जिसमें जिला सूरजपुर, बलरामपुर एवं कोरिया के 38 प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों को प्रशिक्षण मिला। द्वितीय बैच में 07 जुलाई को सरगुजा, जशपुर एवं एमसीबी जिले के 40 प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों को इस प्रशिक्षण दिया गया। फोरेंसिक साइंस थ्योरी एवं प्रेटिकल प्रशिक्षण कार्यशाला में मुख्य रूप से संयुक्त संचालक, क्षेत्रीय न्यायालयिक विधि विज्ञान प्रयोगशाला अंबिकापुर के अधिकारी आर. के पैकरा एवं कुलदीप कुजूर के द्वारा अपने अनुभवों को साझा करते हुये कई ऐसे पुराने प्रकरणों के बारे में बताया जो कि बहुत ही बारीकी से उन्होंने साल्व किया है। उन्होंने कहा कि आप सब जब भी मैदानी थाना, चौकी क्षेत्रों में कार्य करेंगे तो अलग-अलग तरह के अनसुलझे प्रकरण आयेंगे, जैसे में बर्निंग केश, डिकम्पोज बॉडी, इलेक्ट्रिक शॉक, हैंगिंग, ड्रावनिंग, हत्या, शव निरीक्षण, घटनास्थल का निरीक्षण जैसे प्रकरणों का शुरूआती दौर से ही एक-एक साक्ष्यों का तकनीकी उपकरणों के माध्यम से सावधानी पूर्वक साक्ष्य संग्रहित करने के तरीके एवं बारीकियों के बारे में अधिकारियों ने विस्तृत जानकारी दी।बताया गया कि 1 जुलाई 2024 से लागू हुये नये अपराधिक कानून भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता एवं भारतीय साक्ष्य अधिनियम में फारेंसिक जांच की भूमिका को विशेष महत्व दिया गया है। इसमें विशेष रूप से 7 वर्ष या उससे अधिक सजा वाले अपराधों में फारेंसिक टीम के अधिकारियों के द्वारा जांच की अनिवार्यता है। इस हेतु रेंज के सभी जिलों में फारेंसिक वैज्ञानिक अधिकारी पदस्थ किये गये हंै, एवं आधुनिक मोबाइल फारेंसिक वैन प्रदाय किया है। प्रशिक्षण के अगली कड़ी में सभी प्रशिक्षु उप निरीक्षकों को क्षेत्रीय न्यायालयिक विधि विज्ञान प्रयोगशाला अंबिकापुर में ले जाकर बारीकी से एक-एक कर तकनीकि उपकरणों के बारे में जानकारी देकर घटना स्थल पर किस प्रकार प्रयोग/जांच किया जाना चाहिए, इन सारी तकनीकि उपकरणों के बारे में अवगत कराया गया। इसके उपरांत दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला में हर बिन्दुओं पर बारी-बारी से सभी प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों से उपस्थित अधिकारियों के द्वारा फीडबैक लिया गया, इस दौरान प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों से एक-एक करके पुन: तकनीकी उपकरणों एवं उसके उपयोग जैसे प्रश्नों के बाद त्रुटियों में सुधार किया गया।पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों एवं संयुक्त संचालक, क्षेत्रिय न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला के अधिकारियों ने कहा कि क्षेत्रिय एफएसएल से जांच में पारदर्शिता बढ़ेगी और बैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर अपराधियों तक पहुंचने में आसानी होगी जो कि न्यायिक प्रक्रिया में गति मिलेगी एवं लंबित मामलों के निपटारे में शीघ्रता आयेगी। प्रशिक्षण कार्यशाला के दौरान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सरगुजा अमोलक सिंह ढिल्लो, सीएसपी अंबिकापुर राहुल बंसल, रक्षित निरीक्षक अंबिकापुर तृप्ति सिंह राजपुत, पुमनि. कार्यालय के रीडर रेशम लाल साहू, स्थापना प्रभारी सुनील वर्मा सहित रेंज में पदस्थ सभी प्रशिक्षु उपनिरीक्षक उपस्थित रहे।