फोटो जारी होने के बाद लुटेरों तक पहुंचने की उम्मीद बढ़ी
रामानुजगंज। बलरामपुर जिला के रामानुजगंज नगर में बीते बुधवार को हुई ज्वेलरी दुकान में हुई लूट की बड़ी वारदात के बाद चौथे दिन भी पुलिस के हाथ खाली हैं। इस अवधि में पुलिस टीम लूट की घटना को अंजाम देने वाले अपराधियों की पहचान करने में सफल हुई है। बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के पुलिस अधीक्षक राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में लगातार छत्तीसगढ़ की पुलिस टीम झारखंड के पुलिस के साथ समन्वय स्थापित कर लगातार दबिश दे रही है। पुलिस ने लुटेरों के हुलिया पहचान के बाद घटना को मोनू उर्फ बुकी उर्फ बुकिया उर्फ राजा सोनी निवासी चैनपुर झारखण्ड द्वारा गैंग के अन्य लोगों के साथ अंजाम देना बताया है।
पुलिस ने बताया है कि 11 सितम्बर 2024 को दोहपर लगभग 1.30 बजे 03 हथियार बंद अज्ञात व्यक्तियों के संगठित समूह के द्वारा गांधी मैदान के सामने राजेश ज्वेलर्स दुकान में घुसकर प्रतिष्ठान के मालिक राजेश सोनी को हथियार का भय दिखाकर चोटिल किया गया और सोना-चांदी के आभूषण कीमत 2.85 करोड़ रुपये व नगदी रकम 07 लाख रुपये कुल दो करोड़ 92 लाख रुपये लूटकर झारखण्ड की ओर भाग गए। सूचना के बाद से ही पुलिस टीम लगातार सरहदी राज्य झारखण्ड के विभिन्न थाना क्षेत्रांतर्गत जंगलों, आम नागरिकों व मुखबिरों के माध्यम से पूछताछ कर रही थी। पुलिस की अथक मेहनत एवं लगन से अज्ञात हथियार बंद लुटेरों की पहचान (घटना के समय जो टोपी लगाया था) मोनू उर्फ बुकी उर्फ बुकिया उर्फ राजा सोनी निवासी चैनपुर झारखण्ड एवं अन्य व्यक्ति जो मुंडन कराया था, उसकी पहचान राहुल कुमार मेहता पिता प्रमोद मेहता सा. महावीरगंज अम्बा औरंगाबाद, बिहार के रूप में की गई है। पतासाजी दौरान गौरगड़ा नाला छठघाट, कुडेलवा नाला से 100 मीटर के अंदर नाला के पानी में सफेद रंग के अपाचे बाइक को बरामद किया गया है एवं लूट के दौरान प्रार्थी तथा दुकान में बैठे ग्राहक का 03 नग मोबाइल फोन भी पुलिस ने बरामद कर लिया है। आरोपी झारखण्ड, बिहार राज्य में संगठित गिरोह चलाते हैं, जिनका अपराध करने का मुख्य तरीका ज्वेलर्स दुकानों में लूटपाट करना है। झारखण्ड प्रदेश में आरोपी के विरूद्ध भिन्न जिलों में लूटपाट, हत्या व हत्या का प्रयास, डकैती जैसे गंभीर घटनाओं के अपराध पंजीबद्ध हैं। झारखण्ड पुलिस के द्वारा आरोपियों के उपर ईनाम की उद्घोषणा की गई है। प्रकरण के फरार आरोपियों की गिरफ्तारी हेतु विभिन्न राज्यों से वरिष्ठ अधिकारियों के द्वारा समन्वय स्थापित कर विभिन्न स्थानों पर पुलिस टीमें रवाना की गई हैं। प्रकरण के फरार आरोपियों की गिरफ्तारी व माल मशरूका की बरामदगी जल्द की जाएगी।
मुख्य आरोपी मोनू उर्फ बुकी उर्फ बुकिया उर्फ राजा सोनी निवासी चैनपुर झारखण्ड के खिलाफ पूर्व में पंजीबद्ध अपराध
गुमला थाना कांड सं.-291/24 दिनांक-30.07.2024 धारा-310 (1)/311 बीएनएस (वांछित)। सोनारी थाना कांड सं.-68/24 दिनांक-24.05.24 धारा-395/412 भादवि एवं 25(1)-1(बी)ए/26/35 आम्र्स एक्ट (वांछित)। सुखदेवनगर थाना (रांची) कांड संख्या 328/24 दिनांक-13.06.2024 धार 392 भादवि (वांछित)। शहर थाना (पलामू) कांड सं.-248/20 दिनांक-20.09.2020 धारा-392 धारा-395/412 भादवि। चैनपुर थाना कांड सं.-256/18 धारा-392 भादवि। चैनपुर थाना कांड सं.-122/23 दिनांक-18.05.2023 धारा-392 भादवि। चैनपुर थाना कांड सं.-08/23 दिनांक-05.01.2023 धारा-392 भादवि।
लूट दौरान मोनू ने दिखाई थी बर्बरता
लूट कांड के दौरान गैंग के सरगना मोनू ने बर्बरता दिखाई थी, उसके द्वारा ही राजेश ज्वेलर्स के संचालक के साथ मारपीट की घटना की गई। मोनू सोनू का भाई सोनू सोनी लूट कांड में रांची जेल में बंद है। लूट कांड को बहुत ही शातिर तरीके से अपराधियों ने अंजाम दिया और भीड़ को नजरअंदाज करते हुए 90 से 100 किलोमीटर की रफ्तार में रामानुजगंज नगर सीमा को पार करके भाग निकले थे।

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प्रशिक्षु उप निरीक्षकों को आरएफएसएल की जानकारी देने हुई दो दिवसीय कार्यशाला  संयुक्त संचालक, क्षेत्रीय न्यायालयिक विधि विज्ञान प्रयोगशाला कार्यालय के अधिकारियों ने दी विस्तृत जानकारीफोटो-2  छ.ग.फ्रंटलाइनअंबिकापुर। सरगुजा रेंज के विभिन्न जिलों में व्यवहारिक प्रशिक्षण करने हेतु आये सभी नव पदस्थ प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों को नई तकनिकी फोरेंसिक साइंस थ्योरी एवं प्रेटिकल प्रशिक्षण (आरएफएसएल) की जानकारी हेतु रेंज स्तर पर कार्यशाला का आयोजन पुलिस को-ऑडिनेशन सेन्टर, सरगुजा भवन में पुलिस महानिरीक्षक सरगुजा रेंज दीपक कुमार झा के निर्देशन में किया गया। इस दौरान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सरगुजा राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में फोरेंसिक साइंस थ्योरी एवं प्रेक्टिकल प्रशिक्षण के अधिकारी आर.के. पैकरा एवं कुलदीप कुजूर के द्वारा प्रशिक्षण दिया गया। इस नई तकनीकी प्रयोगशाला प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य किसी भी गंभीर प्रकरण के विवेचना के शुरूआती दौर से ही संग्रहित किये जाने वाले साक्ष्यों को पूर्णत: पारदर्शिता के साथ सुरक्षित एकत्रित किया जाता है ताकि भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय के समक्ष सुरक्षित पेश किया जा सके, जो कि अपराधिक कानूनों में फॉरेंसिक जांच की महत्ता दिया गया है।रेंज स्तर पर इस प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन दो बैच में कराया गया। प्रथम बैच 03 जुलाई को संपन्न हुआ, जिसमें जिला सूरजपुर, बलरामपुर एवं कोरिया के 38 प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों को प्रशिक्षण मिला। द्वितीय बैच में 07 जुलाई को सरगुजा, जशपुर एवं एमसीबी जिले के 40 प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों को इस प्रशिक्षण दिया गया। फोरेंसिक साइंस थ्योरी एवं प्रेटिकल प्रशिक्षण कार्यशाला में मुख्य रूप से संयुक्त संचालक, क्षेत्रीय न्यायालयिक विधि विज्ञान प्रयोगशाला अंबिकापुर के अधिकारी आर. के पैकरा एवं कुलदीप कुजूर के द्वारा अपने अनुभवों को साझा करते हुये कई ऐसे पुराने प्रकरणों के बारे में बताया जो कि बहुत ही बारीकी से उन्होंने साल्व किया है। उन्होंने कहा कि आप सब जब भी मैदानी थाना, चौकी क्षेत्रों में कार्य करेंगे तो अलग-अलग तरह के अनसुलझे प्रकरण आयेंगे, जैसे में बर्निंग केश, डिकम्पोज बॉडी, इलेक्ट्रिक शॉक, हैंगिंग, ड्रावनिंग, हत्या, शव निरीक्षण, घटनास्थल का निरीक्षण जैसे प्रकरणों का शुरूआती दौर से ही एक-एक साक्ष्यों का तकनीकी उपकरणों के माध्यम से सावधानी पूर्वक साक्ष्य संग्रहित करने के तरीके एवं बारीकियों के बारे में अधिकारियों ने विस्तृत जानकारी दी।बताया गया कि 1 जुलाई 2024 से लागू हुये नये अपराधिक कानून भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता एवं भारतीय साक्ष्य अधिनियम में फारेंसिक जांच की भूमिका को विशेष महत्व दिया गया है। इसमें विशेष रूप से 7 वर्ष या उससे अधिक सजा वाले अपराधों में फारेंसिक टीम के अधिकारियों के द्वारा जांच की अनिवार्यता है। इस हेतु रेंज के सभी जिलों में फारेंसिक वैज्ञानिक अधिकारी पदस्थ किये गये हंै, एवं आधुनिक मोबाइल फारेंसिक वैन प्रदाय किया है। प्रशिक्षण के अगली कड़ी में सभी प्रशिक्षु उप निरीक्षकों को क्षेत्रीय न्यायालयिक विधि विज्ञान प्रयोगशाला अंबिकापुर में ले जाकर बारीकी से एक-एक कर तकनीकि उपकरणों के बारे में जानकारी देकर घटना स्थल पर किस प्रकार प्रयोग/जांच किया जाना चाहिए, इन सारी तकनीकि उपकरणों के बारे में अवगत कराया गया। इसके उपरांत दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला में हर बिन्दुओं पर बारी-बारी से सभी प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों से उपस्थित अधिकारियों के द्वारा फीडबैक लिया गया, इस दौरान प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों से एक-एक करके पुन: तकनीकी उपकरणों एवं उसके उपयोग जैसे प्रश्नों के बाद त्रुटियों में सुधार किया गया।पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों एवं संयुक्त संचालक, क्षेत्रिय न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला के अधिकारियों ने कहा कि क्षेत्रिय एफएसएल से जांच में पारदर्शिता बढ़ेगी और बैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर अपराधियों तक पहुंचने में आसानी होगी जो कि न्यायिक प्रक्रिया में गति मिलेगी एवं लंबित मामलों के निपटारे में शीघ्रता आयेगी। प्रशिक्षण कार्यशाला के दौरान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सरगुजा अमोलक सिंह ढिल्लो, सीएसपी अंबिकापुर राहुल बंसल, रक्षित निरीक्षक अंबिकापुर तृप्ति सिंह राजपुत, पुमनि. कार्यालय के रीडर रेशम लाल साहू, स्थापना प्रभारी सुनील वर्मा सहित रेंज में पदस्थ सभी प्रशिक्षु उपनिरीक्षक उपस्थित रहे।