मां महामाया मंदिर सहित अन्य मंदिरों व पंडालों में उमड़ेगा आस्था का सैलाब
अंबिकापुर। शक्ति की उपासना का महापर्व शारदीय नवरात्रि रविवार, 11 अक्टूबर को कलश स्थापना के साथ शुरू होगा। नवदुर्गा की आराधना शुरू होगी। 9 दिनों तक माता की भक्ति में लोग लीन रहेंगे। इसके बाद मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन किया जाएगा। नवरात्रि के प्रथम दिन जिले के समस्त देवी मंदिरों में उमड़ने वाले आस्था के जनसैलाब को देखते हुए तैयारियां की गई हैं। सरगुजा की आराध्य देवी मां महामाया मंदिर में सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें लगेंगी, इसे देखते हुए भक्तों की सुविधा के अनुरूप की जा रही तैयारियों को मूर्तरूप दे दिया गया है। इसके अलावा मां दुर्गा शक्तिपीठ गांधी चैक, मां समलाया मंदिर, मां काली मंदिर बाबूपारा, चोपड़ापारा, शंकरघाट, सांडबार मंदिर, लुचकी घाट सहित अन्य मंदिरों में श्रद्धालु श्रद्धा अर्पण करेंगे।
मंदिर प्रबंधन समिति ने बताया कि शारदीय नवरात्रि के मौके पर रविवार, 11 अक्टूबर से रोजाना सुबह 5.30 बजे और शाम को 7.30 बजे आरती होगी। अलसुबह से ही मंदिरों में घंटा-शंख की गूंज के साथ जय माता दी के जयकारे गूंजेंगेे। यहां हर वर्ष की भांति मनोकामना ज्योति कलश भी प्रज्जवलित किए जाएंगे। सिद्ध शक्तिपीठ मां महामाया मंदिर में इस बार 1600 घृत ज्योति और 3200 तेज के दीप प्रज्जवलित होंगे, जिसकी तैयारियां निर्धारित कक्षों में कर दी गई है। अमेरिका, इंग्लैंड, आस्ट्रेलिया सहित अन्य देश में निवास करने वाले 5 परिवारों के द्वारा भी मां महामाया के प्रति श्रद्धा अर्पण करते हुए मनोकामना दीप प्रज्जवलन के लिए राशि मंदिर प्रबंधन को भेजी गई है। घृत ज्योति का शुल्क 2100 रुपये और तेल ज्योति का शुल्क 900 रुपये रखा गया है। रविवार को दोपहर 12 बजे के बाद अखंड मनोकामना दीप प्रज्जवलित किए जाएंगे, जो पूरे नवरात्रि तक जलते रहेंगे। भक्तों के द्वारा घर-घर में भी मातारानी की चैकी सजाकर पूजन की तैयारियां की जा रही हैं। कई भक्त पहले दिन, अष्टमी, नवमी अथवा पूरे नौ दिन व्रत रखकर विधि-विधान से पूजा करेंगे।

मंदिर प्रबंधन की ओर से बताया गया कि मां महामाया मंदिर में संधि पूजा 19 अक्टूबर, सोमवार को महाअष्टमी के दिन होगी। इस बार संधि पूजा का समय 7.53 बजे है, 7.54 से नवमी तिथि लग जाएगी। संधि पूजा में राजपरिवार की ओर से टीएस सिंहदेव सहित परिवार के अन्य सदस्य मौजूद रहेंगे। शारदीय नवरात्रि अश्विन शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होकर महानवमी तक मनाई जाती है। मातारानी के आगमन को लेकर भक्तों में खासा उत्साह देखा जा रहा है।
मूर्तिकारों के यहां देर शाम तक लगी रही भीड़
शहर के विभिन्न चौक-चौराहों पर पंडालों में मां दुर्गा की आकर्षक प्रतिमाएं स्थापित करने का दौर शुरू हो गया है। शनिवार को मूर्तियों को ले जाने के लिए मूर्तिकारों के यहां पूजन समिति के कार्यकर्ताओं की भीड़ लगी रही। बनारस रोड में यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस की मौजूदगी बनी रही। शेरावाली मैया का जयकारा लगाते भक्त मूर्तियों को लेकर रवाना हो रहे थे। पंडालों में मूर्तियों को रखने का क्रम भी शुरू हो गया है। यहां भी मूर्ति स्थापना के बाद विधिवत पूजा-पाठ का क्रम पूरे नवरात्रि भर चलेगा।
मां शैलपुत्री की आराधना से होगी शुरुआत
नवरात्रि के प्रथम दिवस मां दुर्गा की प्रथम शक्ति मां शैलपुत्री की पूजा की जाएगी। भक्त सुख-शांति, धन-वैभव और यश की कामना करते हुए माता के चरणों में पुष्प, नारियल, चुनरी, धूप और प्रसाद अर्पित करेंगे। मंदिरों में दुर्गा सप्तशती का पाठ होगा। आने वाले दिनों में भजन संध्या और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन भी किया जाएगा।
सुरक्षा के रहेंगे पुख्ता इंतजाम
शारदीय नवरात्रि के मौके पर होने वाली भक्तों की भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन की ओर से मंदिरों और पंडालों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जाएंगे। अतिरिक्त पुलिस बल के तैनाती की तैयारियां भी की गई हैं। भीड़ नियंत्रण, असामाजिक तत्वों पर नजर रखने के लिए मां महामाया मंदिर सहित अन्य मंदिरों और पंडालों में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।
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चैतन्य देवियों की भव्य झांकी का आयोजन आज से
शारदीय नवरात्रि के अवसर पर प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, द्वारा 11 से 20 अक्टूबर तक चैतन्य देवियों की भव्य झांकी का आयोजन किया जा रहा है। इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं को आध्यात्मिकता, आत्मिक शांति और सकारात्मक जीवनशैली का संदेश देना है।
झांकी प्रतिदिन शाम 6.30 बजे से रात 10.30 बजे तक श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खुली रहेगी। इस दौरान प्रतिदिन रात्रि 8 बजे से 8.30 बजे तक विभिन्न सांस्कृतिक एवं भक्तिमय कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाएंगे। कार्यक्रमों की श्रृंखला में पहले दिन सामूहिक भजन, दूसरे दिन सामूहिक एकल गायन, तीसरे दिन डांस कार्यक्रम, चौथे दिन भस्मासुर नाटक, पांचवें दिन गीत एवं नृत्य, छठे दिन डांस, सातवें दिन काली डांस एवं ड्रामा, आठवें दिन महिषासुर नाटक, नौवें दिन गरबा डांस तथा दसवें दिन रामायण भजन की प्रस्तुति होगी। ब्रह्माकुमारीज अंबिकापुर की मुख्य संचालिका राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी विद्या दीदी ने कहा कि मन की एकाग्रता, इंद्रियों पर संयम और आध्यात्मिक जीवनशैली अपनाकर ही जीवन में सच्ची शांति प्राप्त की जा सकती है। चैतन्य देवियों की झांकी के माध्यम से लोगों को आध्यात्मिक मूल्यों को अपनाने, विकारों से मुक्त होने तथा अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने की प्रेरणा दी जा रही है। उन्होंने नगरवासियों से आग्रह किया कि वे अपने परिवार सहित इस भव्य झांकी का दर्शन करें और आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का लाभ उठाएं। झांकी में प्रवेश पूर्णत: नि:शुल्क रहेगा।

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