तहसीलदार न्यायालय ने की सुनवाई, कब्जाधारी के आरोप खारिज  

अंबिकापुर। सूरजपुर में शहर के बीचों-बीच शासकीय सड़क की जमीन पर अवैध कब्जा कर तीन मंजिला भवन, कार्यालय और फैक्ट्री खड़ी करने के मामले में राजस्व न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है। तहसीलदार न्यायालय ने भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 248 के तहत कार्रवाई करते हुए कब्जाधारी को बेदखल करने और 3 दिन के भीतर अतिक्रमण हटाने का आदेश जारी किया है।
राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार सूरजपुर नगर में खसरा क्रमांक 2630, रकबा 1.975 हेक्टेयर भूमि  शासकीय सड़क मद में दर्ज है। पटवारी हल्का नंबर 08 की रिपोर्ट में बताया गया कि इसी सड़क की जमीन में से लगभग 0.033 हेक्टेयर क्षेत्र पर पक्का निर्माण कर लिया गया है। इस जमीन पर तीन मंजिला पक्का भवन, कार्यालय कक्ष, फैक्ट्री शेड और चारों ओर बाउंड्रीवाल बना है। पटवारी की रिपोर्ट के आधार पर राजस्व न्यायालय में प्रकरण दर्ज कर सुनवाई शुरू की गई।
कुंजबिहारी गुप्ता ने न्यायालय में लगाई आपत्ति
आपत्तिकर्ता कुंजबिहारी गुप्ता ने न्यायालय में आपत्ति लगाई। उन्होंने कहा कि सरकारी सड़क की जमीन पर फैक्ट्री चल रही है, जिससे आम लोगों को आवागमन में दिक्कत हो रही है। सरकारी संपत्ति का निजी उपयोग किया जा रहा है, इसलिए अतिक्रमण तुरंत हटाया जाए। सुनवाई के दौरान उन्होंने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट बिलासपुर के रिट क्रमांक 866/2026 (डी.के. सोनी एवं अन्य बनाम शासन) में पारित आदेश की प्रति भी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की।
कब्जाधारी रितेश ने आरोप को निराधार बताया
अनावेदक, कब्जाधारी रितेश अग्रवाल पिता सुरेश अग्रवाल ने मामले में अपना जवाब पेश किया। उन्होंने पटवारी और आरआई की रिपोर्ट को गलत और पक्षपातपूर्ण बताया। इनका कहना था कि पंचनामा उनकी गैर मौजूदगी में बनाया गया। पुराने राजस्व नक्शों की सही जांच नहीं हुई। उन्होंने दावा किया कि उन पर लगा आरोप निराधार है। साथ ही दोनों पक्षों की मौजूदगी में दोबारा सीमांकन और संयुक्त निरीक्षण कराने की मांग की।
कोर्ट ने-राजस्व रिकार्ड में शासकीय सड़क माना
दोनों पक्षों की सुनवाई और दस्तावेजों के परीक्षण बाद न्यायालय इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि विवादित भूमि राजस्व रिकॉर्ड में शासकीय सड़क के रूप में दर्ज है। पटवारी रिपोर्ट और मौके की स्थिति से यह भी स्पष्ट है कि उस पर निर्माण कर कब्जा किया गया है। इसी आधार पर न्यायालय ने आदेश दिया कि-अनावेदक रितेश अग्रवाल 3 दिन के भीतर स्वयं अपने स्तर पर अतिक्रमण हटाएं। कब्जा हटाने के बाद पालन प्रतिवेदन न्यायालय में पेश करें। यदि 3 दिन में आदेश का पालन नहीं हुआ तो राजस्व विभाग, पुलिस बल के साथ जाकर बेदखली की कार्रवाई करेगा।
शासकीय भूमि पर कब्जा करने पर होगी कार्रवाई
जिला प्रशासन की ओर से राजस्व अधिकारियों ने कहा है कि शासकीय भूमि पर किसी भी प्रकार का कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। धारा 248 के तहत इस तरह की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। आम जनता से सरकारी जमीन पर निर्माण से पहले वैधानिक प्रक्रिया पूरी करने का आग्रह किया गया है। इस आदेश के बाद शहर में चर्चा इस बता पर हो रही है कि क्या तय समय सीमा में अतिक्रमण हटेगा या प्रशासन को बल प्रयोग करना पड़ेगा। अब सबकी नजर 3 दिन बाद होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई है।

Spread the love