अंबिकापुर। गैंग्स ऑफ वासेपुर मामले के एक सजायाफ्ता, फरार मुजरिम द्वारा अंबिकापुर में ठिकाना बनाने और झारखंड पुलिस के हाथ से निकल जाने की घटना के बाद सरगुजा पुलिस अलर्ट मोड पर है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर पूरे जिले में संदिग्धों और किराएदारों का घर-घर सत्यापन अभियान बड़े पैमाने पर शुरू करने की तैयारी चल रही है। पुलिस अधिकारियों ने थाना प्रभारियों के नेतृत्व में पुलिस टीम को मोहल्लों में जाकर किराए पर रहने वाले लोगों की पहचान करने निर्देशित किया है। इसके अलावा कहीं भी झुग्गी में डेरा डालने वालों ने मुसाफिरी संबंधित थाने में दर्ज कराई है या नहीं, इस पर नजर रखने के निर्देश दिए हैं।
हालांकि, पुलिस की यह कार्रवाई रूटिन में निरंतर चलती रहती है, लेकिन शहर में कई मकानों में रहने वाले किराएदारों की जानकारी मकान मालिकों के द्वारा पुलिस को उपलब्ध नहीं कराई जाती है, जिससे किसी प्रकार की वारदात होने के बाद पुलिस की परेशानी बढ़ जाती है। मकान मालिकों से किराएदारों का आधार कार्ड, मोबाइल नंबर और मूल पता की जानकारी लेने के बाद ही मकान देने का आग्रह पुलिस ने किया है। बाहर से आकर ठिकाना बनाए किराएदारों की जानकारी पुलिस को भी देना अनिवार्य है। शहर के होटल, लॉज, धर्मशाला और गेस्ट हाउस में ठहरने वाले लोगों की रजिस्टर में इंद्राज की जाने वाली जानकारी पर भी पुलिस की नजर रहेगी। बिना आईडी के रहने की सुविधा उपलब्ध कराने पर पर सख्त कार्रवाई करने की तैयारी में पुलिस है। जिले में प्रवेश करने वाले संदिग्ध वाहनों और बाहरी राज्यों से आए लोगों पर भी पुलिस की नजर रहेगी। बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और चेक पोस्ट में चेकिंग कार्रवाई पूर्व से ही जारी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अपराधियों और असामाजिक तत्वों पर लगाम लगाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा।
संदिग्धों की दें पुलिस को सूचना
मकान मालिकों से आग्रह किया गया है कि, वे बिना सत्यापन के किसी भी बाहरी व्यक्ति को किराये पर मकान न दें। सत्यापन नहीं कराने वाले मकान मालिकों पर भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। गैंग्स ऑफ वासेपुर मामले के सजायाफ्ता मुजरिम के शहर में 13 वर्ष से ठिकाना बनाने और झारखंड पुलिस की कार्रवाई के बीच फरार होने की घटना के बाद पूरे सरगुजा जोन में आम नागरिकों को किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या किराएदार की जानकारी मिलने पर तुरंत पुलिस अधिकारियों, नजदीकी थाना या डॉयल 112 में देने कहा गया है।
बयान बाक्स में
फोटो-मेल में अमोलक सिंह ढिल्लो
सरगुजा पुलिस रूटिन की कार्रवाई के बीच शहर में बाहर से आने वालों का मुसाफिरी दर्ज करती है। शहर में इनके आने का क्या मकसद है इसकी तहकीकात की जाती है। किराएदारों का सत्यापन भी समय-समय पर किया जाता है, और मकान मालिकों को हिदायत दी जाती है कि वे किराएदारों के संबंध में आवश्यक जानकारी पुलिस को उपलब्ध कराएं।
अमोलक सिंह ढिल्लो, एएसपी सरगुजा

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प्रशिक्षु उप निरीक्षकों को आरएफएसएल की जानकारी देने हुई दो दिवसीय कार्यशाला  संयुक्त संचालक, क्षेत्रीय न्यायालयिक विधि विज्ञान प्रयोगशाला कार्यालय के अधिकारियों ने दी विस्तृत जानकारीफोटो-2  छ.ग.फ्रंटलाइनअंबिकापुर। सरगुजा रेंज के विभिन्न जिलों में व्यवहारिक प्रशिक्षण करने हेतु आये सभी नव पदस्थ प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों को नई तकनिकी फोरेंसिक साइंस थ्योरी एवं प्रेटिकल प्रशिक्षण (आरएफएसएल) की जानकारी हेतु रेंज स्तर पर कार्यशाला का आयोजन पुलिस को-ऑडिनेशन सेन्टर, सरगुजा भवन में पुलिस महानिरीक्षक सरगुजा रेंज दीपक कुमार झा के निर्देशन में किया गया। इस दौरान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सरगुजा राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में फोरेंसिक साइंस थ्योरी एवं प्रेक्टिकल प्रशिक्षण के अधिकारी आर.के. पैकरा एवं कुलदीप कुजूर के द्वारा प्रशिक्षण दिया गया। इस नई तकनीकी प्रयोगशाला प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य किसी भी गंभीर प्रकरण के विवेचना के शुरूआती दौर से ही संग्रहित किये जाने वाले साक्ष्यों को पूर्णत: पारदर्शिता के साथ सुरक्षित एकत्रित किया जाता है ताकि भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय के समक्ष सुरक्षित पेश किया जा सके, जो कि अपराधिक कानूनों में फॉरेंसिक जांच की महत्ता दिया गया है।रेंज स्तर पर इस प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन दो बैच में कराया गया। प्रथम बैच 03 जुलाई को संपन्न हुआ, जिसमें जिला सूरजपुर, बलरामपुर एवं कोरिया के 38 प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों को प्रशिक्षण मिला। द्वितीय बैच में 07 जुलाई को सरगुजा, जशपुर एवं एमसीबी जिले के 40 प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों को इस प्रशिक्षण दिया गया। फोरेंसिक साइंस थ्योरी एवं प्रेटिकल प्रशिक्षण कार्यशाला में मुख्य रूप से संयुक्त संचालक, क्षेत्रीय न्यायालयिक विधि विज्ञान प्रयोगशाला अंबिकापुर के अधिकारी आर. के पैकरा एवं कुलदीप कुजूर के द्वारा अपने अनुभवों को साझा करते हुये कई ऐसे पुराने प्रकरणों के बारे में बताया जो कि बहुत ही बारीकी से उन्होंने साल्व किया है। उन्होंने कहा कि आप सब जब भी मैदानी थाना, चौकी क्षेत्रों में कार्य करेंगे तो अलग-अलग तरह के अनसुलझे प्रकरण आयेंगे, जैसे में बर्निंग केश, डिकम्पोज बॉडी, इलेक्ट्रिक शॉक, हैंगिंग, ड्रावनिंग, हत्या, शव निरीक्षण, घटनास्थल का निरीक्षण जैसे प्रकरणों का शुरूआती दौर से ही एक-एक साक्ष्यों का तकनीकी उपकरणों के माध्यम से सावधानी पूर्वक साक्ष्य संग्रहित करने के तरीके एवं बारीकियों के बारे में अधिकारियों ने विस्तृत जानकारी दी।बताया गया कि 1 जुलाई 2024 से लागू हुये नये अपराधिक कानून भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता एवं भारतीय साक्ष्य अधिनियम में फारेंसिक जांच की भूमिका को विशेष महत्व दिया गया है। इसमें विशेष रूप से 7 वर्ष या उससे अधिक सजा वाले अपराधों में फारेंसिक टीम के अधिकारियों के द्वारा जांच की अनिवार्यता है। इस हेतु रेंज के सभी जिलों में फारेंसिक वैज्ञानिक अधिकारी पदस्थ किये गये हंै, एवं आधुनिक मोबाइल फारेंसिक वैन प्रदाय किया है। प्रशिक्षण के अगली कड़ी में सभी प्रशिक्षु उप निरीक्षकों को क्षेत्रीय न्यायालयिक विधि विज्ञान प्रयोगशाला अंबिकापुर में ले जाकर बारीकी से एक-एक कर तकनीकि उपकरणों के बारे में जानकारी देकर घटना स्थल पर किस प्रकार प्रयोग/जांच किया जाना चाहिए, इन सारी तकनीकि उपकरणों के बारे में अवगत कराया गया। इसके उपरांत दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला में हर बिन्दुओं पर बारी-बारी से सभी प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों से उपस्थित अधिकारियों के द्वारा फीडबैक लिया गया, इस दौरान प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों से एक-एक करके पुन: तकनीकी उपकरणों एवं उसके उपयोग जैसे प्रश्नों के बाद त्रुटियों में सुधार किया गया।पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों एवं संयुक्त संचालक, क्षेत्रिय न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला के अधिकारियों ने कहा कि क्षेत्रिय एफएसएल से जांच में पारदर्शिता बढ़ेगी और बैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर अपराधियों तक पहुंचने में आसानी होगी जो कि न्यायिक प्रक्रिया में गति मिलेगी एवं लंबित मामलों के निपटारे में शीघ्रता आयेगी। प्रशिक्षण कार्यशाला के दौरान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सरगुजा अमोलक सिंह ढिल्लो, सीएसपी अंबिकापुर राहुल बंसल, रक्षित निरीक्षक अंबिकापुर तृप्ति सिंह राजपुत, पुमनि. कार्यालय के रीडर रेशम लाल साहू, स्थापना प्रभारी सुनील वर्मा सहित रेंज में पदस्थ सभी प्रशिक्षु उपनिरीक्षक उपस्थित रहे।