अंबिकापुर। दरिमा थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत बरगई में रविवार को एक खंडहरनुमा मकान के अंदर फांसी पर लटका शव मिलने से सनसनी फैल गई। शव की पहचान बरगई निवासी राजकुमार सिंह 53 वर्ष, पिता सबल सिंह के रूप में हुई है, जो पिछले 15-20 दिनों से घर से लापता था।
जानकारी के मुताबिक, गांव के मुख्य मार्ग से लगभग 100 मीटर अंदर पुरंदन सिंह का पुराना और जर्जर मकान है। मकान से बदबू आने पर ग्रामीण वहां पहुंचे, और अंदर जाकर देखे तो एक व्यक्ति का शव मयार लकड़ी से फांसी के फंदे पर लटका हुआ था। शव सड़-गल गया था, और उसका कुछ हिस्सा नीचे गिर चुका था। ग्रामीणों ने मृतक के कपड़ों के आधार पर उसकी पहचान राजकुमार सिंह के रूप में की। घटना की सूचना ग्राम पंचायत बरगई के सरपंच एवं ग्रामीणों ने दरिमा थाना पुलिस को दी। इसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची, और घटनाक्रम से वरिष्ठ अफसर को दी। मामला हत्या से जुड़ा तो नहीं, इसकी जांच के लिये वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में मौके पर एफएसएल और राजपत्रित पुलिस अधिकारी पहुंचे। इन्होंने ग्रामीणों और मृतक के स्वजन से चर्चा की तो सामने आया कि राजकुमार शराब पीने का आदी था, और कई दिनों से घर से गायब था। इसकी तलाश में स्वजन लगे थे, लेकिन कुछ पता नहीं चल रहा था। पुलिस ने मृतक के शव को पंचनामा, पोस्टमार्टम के लिए स्वजन के सुपुर्द कर दिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद ही मौत के कारणों की पुष्टि हो सकेगी, हालांकि पुलिस अधिकारी मामले को प्रथम दृष्टया खुदकुशी से जुड़ा मान रहे हैं।
बयान
”दरिमा थाना क्षेत्र में जर्जर मकान में एक व्यक्ति का शव मिलने का मामला संज्ञान में आया था। मौके पर एफएसएल की टीम गई थी। पुलिस विभाग के राजपत्रित अधिकारी ने भी मौके का जायजा लिया था। मृतक बरगई का रहने वाला है, जो 25 जून से गायब था। मामला प्रथम दृष्टया खुदकुशी का प्रतीत हो रहा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद मौत के वास्तविक तथ्यों का पता चल पायेगा। पुलिस मामले में अग्रिम जांच, कार्रवाई कर रही है।ÓÓ
अमोलक सिंह ढिल्लो, एएसपी सरगुजा

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प्रशिक्षु उप निरीक्षकों को आरएफएसएल की जानकारी देने हुई दो दिवसीय कार्यशाला  संयुक्त संचालक, क्षेत्रीय न्यायालयिक विधि विज्ञान प्रयोगशाला कार्यालय के अधिकारियों ने दी विस्तृत जानकारीफोटो-2  छ.ग.फ्रंटलाइनअंबिकापुर। सरगुजा रेंज के विभिन्न जिलों में व्यवहारिक प्रशिक्षण करने हेतु आये सभी नव पदस्थ प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों को नई तकनिकी फोरेंसिक साइंस थ्योरी एवं प्रेटिकल प्रशिक्षण (आरएफएसएल) की जानकारी हेतु रेंज स्तर पर कार्यशाला का आयोजन पुलिस को-ऑडिनेशन सेन्टर, सरगुजा भवन में पुलिस महानिरीक्षक सरगुजा रेंज दीपक कुमार झा के निर्देशन में किया गया। इस दौरान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सरगुजा राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में फोरेंसिक साइंस थ्योरी एवं प्रेक्टिकल प्रशिक्षण के अधिकारी आर.के. पैकरा एवं कुलदीप कुजूर के द्वारा प्रशिक्षण दिया गया। इस नई तकनीकी प्रयोगशाला प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य किसी भी गंभीर प्रकरण के विवेचना के शुरूआती दौर से ही संग्रहित किये जाने वाले साक्ष्यों को पूर्णत: पारदर्शिता के साथ सुरक्षित एकत्रित किया जाता है ताकि भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय के समक्ष सुरक्षित पेश किया जा सके, जो कि अपराधिक कानूनों में फॉरेंसिक जांच की महत्ता दिया गया है।रेंज स्तर पर इस प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन दो बैच में कराया गया। प्रथम बैच 03 जुलाई को संपन्न हुआ, जिसमें जिला सूरजपुर, बलरामपुर एवं कोरिया के 38 प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों को प्रशिक्षण मिला। द्वितीय बैच में 07 जुलाई को सरगुजा, जशपुर एवं एमसीबी जिले के 40 प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों को इस प्रशिक्षण दिया गया। फोरेंसिक साइंस थ्योरी एवं प्रेटिकल प्रशिक्षण कार्यशाला में मुख्य रूप से संयुक्त संचालक, क्षेत्रीय न्यायालयिक विधि विज्ञान प्रयोगशाला अंबिकापुर के अधिकारी आर. के पैकरा एवं कुलदीप कुजूर के द्वारा अपने अनुभवों को साझा करते हुये कई ऐसे पुराने प्रकरणों के बारे में बताया जो कि बहुत ही बारीकी से उन्होंने साल्व किया है। उन्होंने कहा कि आप सब जब भी मैदानी थाना, चौकी क्षेत्रों में कार्य करेंगे तो अलग-अलग तरह के अनसुलझे प्रकरण आयेंगे, जैसे में बर्निंग केश, डिकम्पोज बॉडी, इलेक्ट्रिक शॉक, हैंगिंग, ड्रावनिंग, हत्या, शव निरीक्षण, घटनास्थल का निरीक्षण जैसे प्रकरणों का शुरूआती दौर से ही एक-एक साक्ष्यों का तकनीकी उपकरणों के माध्यम से सावधानी पूर्वक साक्ष्य संग्रहित करने के तरीके एवं बारीकियों के बारे में अधिकारियों ने विस्तृत जानकारी दी।बताया गया कि 1 जुलाई 2024 से लागू हुये नये अपराधिक कानून भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता एवं भारतीय साक्ष्य अधिनियम में फारेंसिक जांच की भूमिका को विशेष महत्व दिया गया है। इसमें विशेष रूप से 7 वर्ष या उससे अधिक सजा वाले अपराधों में फारेंसिक टीम के अधिकारियों के द्वारा जांच की अनिवार्यता है। इस हेतु रेंज के सभी जिलों में फारेंसिक वैज्ञानिक अधिकारी पदस्थ किये गये हंै, एवं आधुनिक मोबाइल फारेंसिक वैन प्रदाय किया है। प्रशिक्षण के अगली कड़ी में सभी प्रशिक्षु उप निरीक्षकों को क्षेत्रीय न्यायालयिक विधि विज्ञान प्रयोगशाला अंबिकापुर में ले जाकर बारीकी से एक-एक कर तकनीकि उपकरणों के बारे में जानकारी देकर घटना स्थल पर किस प्रकार प्रयोग/जांच किया जाना चाहिए, इन सारी तकनीकि उपकरणों के बारे में अवगत कराया गया। इसके उपरांत दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला में हर बिन्दुओं पर बारी-बारी से सभी प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों से उपस्थित अधिकारियों के द्वारा फीडबैक लिया गया, इस दौरान प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों से एक-एक करके पुन: तकनीकी उपकरणों एवं उसके उपयोग जैसे प्रश्नों के बाद त्रुटियों में सुधार किया गया।पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों एवं संयुक्त संचालक, क्षेत्रिय न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला के अधिकारियों ने कहा कि क्षेत्रिय एफएसएल से जांच में पारदर्शिता बढ़ेगी और बैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर अपराधियों तक पहुंचने में आसानी होगी जो कि न्यायिक प्रक्रिया में गति मिलेगी एवं लंबित मामलों के निपटारे में शीघ्रता आयेगी। प्रशिक्षण कार्यशाला के दौरान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सरगुजा अमोलक सिंह ढिल्लो, सीएसपी अंबिकापुर राहुल बंसल, रक्षित निरीक्षक अंबिकापुर तृप्ति सिंह राजपुत, पुमनि. कार्यालय के रीडर रेशम लाल साहू, स्थापना प्रभारी सुनील वर्मा सहित रेंज में पदस्थ सभी प्रशिक्षु उपनिरीक्षक उपस्थित रहे।