अंबिकापुर। सरस्वती शिक्षा महाविद्यालय सुभाषनगर में ‘गूगल फार्म के साथ स्मार्ट डेटा संग्रहÓ विषय को लेकर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि दीपक पाल, शिक्षक क्रिएटिव इंग्लिश स्पोकन सेंटर, लक्ष्मी नारायण पटेल व्याख्याता स्वामी आत्मानंद स्कूल शंकरगढ़ उपस्थित रहे।
दीपक पाल ने द्वारा गूगल फॉर्म के बारे में बताया और कहा कि, डिजिटल युग का समय है। आज लगभग हर कार्य ऑनलाइन माध्यम से किया जा रहा है। इसी क्रम में गूगल फॉर्म एक अत्यंत उपयोगी एवं सरल ऑनलाइन उपकरण है, जिसका उपयोग जानकारी एकत्र करने, सर्वेक्षण करने, परीक्षा लेने तथा प्रतिक्रिया प्राप्त करने के लिए किया जाता है। गूगल फॉर्म एक नि:शुल्क सेवा है, जिसे गूगल द्वारा विकसित किया गया है। इसकी सहायता से कोई भी व्यक्ति आसानी से ऑनलाइन फॉर्म तैयार कर सकता है। इसमें बहुविकल्पीय प्रश्न, लघु उत्तरीय प्रश्न, चेक बॉक्स, फाइल अपलोड आदि अनेक प्रकार के विकल्प उपलब्ध होते हैं। गूगल फॉर्म का सबसे बड़ा लाभ यह है कि, इससे समय और कागज दोनों की बचत होती है। विद्यालयों, महाविद्यालयों, कार्यालयों तथा विभिन्न संस्थाओं में इसका व्यापक उपयोग हो रहा है। शिक्षक ऑनलाइन परीक्षा एवं क्विज आयोजित करने के लिए इसका उपयोग करते हैं, जबकि संस्थाएं लोगों से सुझाव और प्रतिक्रियाएं प्राप्त करने हेतु इसका प्रयोग करती हैं। इसके अतिरिक्त, गूगल फॉर्म में प्राप्त सभी उत्तर स्वत: सुरक्षित हो जाते हैं और उनका विश्लेषण भी आसानी से किया जा सकता है। इससे कार्य अधिक व्यवस्थित एवं पारदर्शी बनता है। तत्पश्चात उन्होंने गूगल फॉर्म किस प्रकार बनाया जाता है, उसके बारे में प्रेक्टिकल रूप से बताया, प्रशिक्षणार्थियों ने गूगल फॉर्म, गूगल शीट बनाना सीखा और इसका अभ्यास किया। कार्यक्रम के अंत में महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. श्रद्धा मिश्रा ने कार्यक्रम के बारे मे संक्षिप्त जानकारी दी और अतिथियों का आभार प्रदर्शन करके कार्यक्रम का समापन किया। कार्यक्रम में महाविद्यालय की सहायक प्राध्यापक उर्मिला यादव, प्रियलता जायसवाल, सुप्रिया सिंह, मिथलेश कुमार गुर्जर, सविता यादव, सीमा बंजारे, पूजा रानी, ज्योत्स्ना राजभर, अर्चना सोनवानी, गोल्डन सिंह, अजीत सिंह परिहार, नितेश कुमार यादव एवं बी.एड के प्रशिक्षणार्थियों की उपस्थिति रही।

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प्रशिक्षु उप निरीक्षकों को आरएफएसएल की जानकारी देने हुई दो दिवसीय कार्यशाला  संयुक्त संचालक, क्षेत्रीय न्यायालयिक विधि विज्ञान प्रयोगशाला कार्यालय के अधिकारियों ने दी विस्तृत जानकारीफोटो-2  छ.ग.फ्रंटलाइनअंबिकापुर। सरगुजा रेंज के विभिन्न जिलों में व्यवहारिक प्रशिक्षण करने हेतु आये सभी नव पदस्थ प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों को नई तकनिकी फोरेंसिक साइंस थ्योरी एवं प्रेटिकल प्रशिक्षण (आरएफएसएल) की जानकारी हेतु रेंज स्तर पर कार्यशाला का आयोजन पुलिस को-ऑडिनेशन सेन्टर, सरगुजा भवन में पुलिस महानिरीक्षक सरगुजा रेंज दीपक कुमार झा के निर्देशन में किया गया। इस दौरान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सरगुजा राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में फोरेंसिक साइंस थ्योरी एवं प्रेक्टिकल प्रशिक्षण के अधिकारी आर.के. पैकरा एवं कुलदीप कुजूर के द्वारा प्रशिक्षण दिया गया। इस नई तकनीकी प्रयोगशाला प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य किसी भी गंभीर प्रकरण के विवेचना के शुरूआती दौर से ही संग्रहित किये जाने वाले साक्ष्यों को पूर्णत: पारदर्शिता के साथ सुरक्षित एकत्रित किया जाता है ताकि भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय के समक्ष सुरक्षित पेश किया जा सके, जो कि अपराधिक कानूनों में फॉरेंसिक जांच की महत्ता दिया गया है।रेंज स्तर पर इस प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन दो बैच में कराया गया। प्रथम बैच 03 जुलाई को संपन्न हुआ, जिसमें जिला सूरजपुर, बलरामपुर एवं कोरिया के 38 प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों को प्रशिक्षण मिला। द्वितीय बैच में 07 जुलाई को सरगुजा, जशपुर एवं एमसीबी जिले के 40 प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों को इस प्रशिक्षण दिया गया। फोरेंसिक साइंस थ्योरी एवं प्रेटिकल प्रशिक्षण कार्यशाला में मुख्य रूप से संयुक्त संचालक, क्षेत्रीय न्यायालयिक विधि विज्ञान प्रयोगशाला अंबिकापुर के अधिकारी आर. के पैकरा एवं कुलदीप कुजूर के द्वारा अपने अनुभवों को साझा करते हुये कई ऐसे पुराने प्रकरणों के बारे में बताया जो कि बहुत ही बारीकी से उन्होंने साल्व किया है। उन्होंने कहा कि आप सब जब भी मैदानी थाना, चौकी क्षेत्रों में कार्य करेंगे तो अलग-अलग तरह के अनसुलझे प्रकरण आयेंगे, जैसे में बर्निंग केश, डिकम्पोज बॉडी, इलेक्ट्रिक शॉक, हैंगिंग, ड्रावनिंग, हत्या, शव निरीक्षण, घटनास्थल का निरीक्षण जैसे प्रकरणों का शुरूआती दौर से ही एक-एक साक्ष्यों का तकनीकी उपकरणों के माध्यम से सावधानी पूर्वक साक्ष्य संग्रहित करने के तरीके एवं बारीकियों के बारे में अधिकारियों ने विस्तृत जानकारी दी।बताया गया कि 1 जुलाई 2024 से लागू हुये नये अपराधिक कानून भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता एवं भारतीय साक्ष्य अधिनियम में फारेंसिक जांच की भूमिका को विशेष महत्व दिया गया है। इसमें विशेष रूप से 7 वर्ष या उससे अधिक सजा वाले अपराधों में फारेंसिक टीम के अधिकारियों के द्वारा जांच की अनिवार्यता है। इस हेतु रेंज के सभी जिलों में फारेंसिक वैज्ञानिक अधिकारी पदस्थ किये गये हंै, एवं आधुनिक मोबाइल फारेंसिक वैन प्रदाय किया है। प्रशिक्षण के अगली कड़ी में सभी प्रशिक्षु उप निरीक्षकों को क्षेत्रीय न्यायालयिक विधि विज्ञान प्रयोगशाला अंबिकापुर में ले जाकर बारीकी से एक-एक कर तकनीकि उपकरणों के बारे में जानकारी देकर घटना स्थल पर किस प्रकार प्रयोग/जांच किया जाना चाहिए, इन सारी तकनीकि उपकरणों के बारे में अवगत कराया गया। इसके उपरांत दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला में हर बिन्दुओं पर बारी-बारी से सभी प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों से उपस्थित अधिकारियों के द्वारा फीडबैक लिया गया, इस दौरान प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों से एक-एक करके पुन: तकनीकी उपकरणों एवं उसके उपयोग जैसे प्रश्नों के बाद त्रुटियों में सुधार किया गया।पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों एवं संयुक्त संचालक, क्षेत्रिय न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला के अधिकारियों ने कहा कि क्षेत्रिय एफएसएल से जांच में पारदर्शिता बढ़ेगी और बैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर अपराधियों तक पहुंचने में आसानी होगी जो कि न्यायिक प्रक्रिया में गति मिलेगी एवं लंबित मामलों के निपटारे में शीघ्रता आयेगी। प्रशिक्षण कार्यशाला के दौरान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सरगुजा अमोलक सिंह ढिल्लो, सीएसपी अंबिकापुर राहुल बंसल, रक्षित निरीक्षक अंबिकापुर तृप्ति सिंह राजपुत, पुमनि. कार्यालय के रीडर रेशम लाल साहू, स्थापना प्रभारी सुनील वर्मा सहित रेंज में पदस्थ सभी प्रशिक्षु उपनिरीक्षक उपस्थित रहे।