बड़े अधिकारी नहीं रहते हैं मुख्यालय मे 

मोहम्मद जिसान खान 

प्रतापपुर/ वन परिक्षेत्र प्रतापपुर में हाथियों के आतंक से लोग परेशान हैं. पिछले 11 दिनों से वन परिक्षेत्र प्रतापपुर के दर्जनों गांव में  जंगली हाथी द्वारा फसलों को लगातार नुकसान पहुंचाया जा रहा है.

सुबह के समय  हाथी वन परिक्षेत्र प्रतापपुर के टुकुडांड सर्कील मसगा  जंगल में  मुख्य मार्ग में विचरण कर रहा है  सावधानी के तौर पर मुख्य मार्ग में नाकेबंदी कर दोनों तरफ आम जनों को रोक दिया गया है  खबर लिखे जाने तक वन विभाग की टीम  लगी हुई है  जानकारी के अनुसार वन परिक्षेत्र प्रतापपुर के टुकुडांड  सर्किल वी  धरमपुर सर्कील के दो दर्जन से अधिक गांव में लगातार हाथियों की समस्या आ रही है दर्जनों गांव में कई जगहों पर स्कूली क्षेत्र में भी हाथी दिन दहाड़े निकल जा रही है जिससे स्कूली बच्चों में दशक का माहौल है बात करें तो धरमपुर  सर्कील के गौरा गांव में दिनदहाड़े स्कूल के पास हाथी पहुंचने से बच्चे भयभीत है और स्कूल जाने छोड़ दिए हैं  कोई हाथी की समस्याओं को लेकर विभाग गंभीर नहीं दिख रही है वन विभाग के कई आला अधिकारी अपने मुख्यालय पर नहीं रहते हैं और हाथी की समस्याओं के समाधान के लिए कोई ठोस उपाय नहीं कर रहे हैं 

दर्जनों स्कूल के छात्र, शिक्षक, अभिभावक हांथी के डर के साय में स्कूल संचालित करने को मजबूर 

        सूरजपुर में स्कूल खुलने के साथ ही शाला प्रवेश उत्सव मनाया जा रहा है,, लेकिन प्रतापपुर वन परिक्षेत्र के बगड़ा कोटिया समेत कई गांव के दर्जनों स्कूल के छात्र शिक्षक अभिभावक हाथी के डर के साए में स्कूल संचालित करने को मजबूर है,, दरअसल प्रतापपुर वन परिक्षेत्र लगभग दो दशक से हाथियो का विचरण क्षेत्र बना हुआ है,, ऐसे में आए दिन हाथियो के द्वारा जानमाल के नुकसान की भी बाते सामने आते रहती है,, जहा इन क्षेत्रों के बगड़ा कोटिया के दर्जनों स्कूल  कैंपस में न ही बाउंड्री वॉल है और न ही फेसिंग के द्वारा कोई भी सुरक्षा के कदम उठाए गए हैं,, लिहाजा छात्र शिक्षक और अभिभावकों को रोजाना अलर्ट रहना पड़ता है,, ऐसे में विभागीय उदासीनता के कारण इन स्कूलों को लेकर कोई भी अपनी जिम्मेदारी दिखाते नजर नही आ रहे,, बहरहाल हाथी प्रभावित क्षेत्र में संचालित इन स्कूलों में शाला प्रवेश उत्सव डर के साए में फीका नजर आ रहा ऐसे में विभागीय जिम्मेदार इन स्कूलों में सुरक्षात्मक पहल करने की जिम्मेदारी कब तक उठाता है यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा,,

24 वर्षों में छत्तीसगढ़ में कई सरकारी लेकिन हाथी की समस्या जस की तस 

           बात करें तो सरगुजा संभाग में हाथी की समस्या जांच की तस बनी  हुई है  जब से छत्तीसगढ़ बना है तब से अब तक लेकर 24 वर्षों में कई सरकारी यहां बदल चुकी है लेकिन सरगुजा संभाग के कई विकासखंड में हाथी की समस्याएं जस की 10 बनी हुई है  वन विभाग के कई आला अधिकारी अपने ऊलजुल प्रयोग से  सरगुजा वासीयों अपने प्रयोग का फैक्ट्री बन चुके हैं लेकिन नतीजा सिफर ही रहा वही बात करें तो इन 24 वर्षों में सरगुजा संभाग में  हजारों मौते हो चुकी है  और सरगुजा संभाग में सर्वाधिक प्रभावित रहने वाला वन परिक्षेत्र प्रतापपुर में ही है लेकिन फिर भी कोई ठोस उपाय अभी तक नजर नहीं आ रहा है 

वन परिक्षेत्र अधिकारी के कार्य शैली पर उठ रहे हैं प्रश्न 

सरगुजा संभाग में सर्वाधिक प्रभावित  वन परिक्षेत्र प्रतापपुर रहा है  यहां पर जिस वन परिक्षेत्र अधिकारी की पद स्थापना की गई है उनको हाथी प्रभावित क्षेत्र की कोई जानकारी नहीं है वन परिक्षेत्र अधिकारी के रूप में उनकी यह दूसरी पद स्थापना है इससे पहले वह वन परिक्षेत्र वाड्राफनगर में अपनी नौकरी की शुरुआत किए हैं और उन्हें तत्काल हाथी प्रभावित क्षेत्र में पद स्थापना कर दिया गया है  क्योंकि वो नई नवेली परिक्षेत्र अधिकारी है और उनकी जानकारी बहुत कम है जिसको लेकर उनके कार्य शैली पर कई प्रश्न खड़े हो रहे हैं वन वन मंडल सूरजपुर में  कई जानकार अधिकारी है फिर भी उनकी पद स्थापना छोड़कर नई नवेली अधिकारी    क्यों पोस्टिंग की गई है इस मामले में वनमंडल अधिकारी भी सवालों के घेरे में है

समस्याओं से हुं वाकीफ कर रही हूं ठोस  उपाय  शकुंतला सिंह पोर्ते

क्षेत्रीय विधायक  शकुंतला सिंह पोर्ते ने चर्चा के दौरान बताया कि हाथी की समस्या को लेकर मैं बखूबी वाकीफ हु  कोई जनहानि होता है तो मुझे बहुत तकलीफ होता है  मैं क्षेत्र में रहूं या बाहर रहूं मैं हमेशा चिंतित रहती हूं कहीं कोई जनहानि ना हो मैंने पिछले विधानसभा सत्र में हाथियों के संबंध में विधानसभा में प्रश्न उठाया था  मैं आगे भी हाथी की समस्याओं के लिए ठोस पहल कैसे हो इसके लिए विशेषज्ञों से चर्चा कर वन मंत्री से मुलाकात कर ठोस पहल की ओर आगे कदम बढ़ाने का प्रयास करूंगी

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