राष्ट्रपति से मिलने के लिए लगाई गुहार, बाद में उल्टे पांव वापस लौटे घर
फोटो-ग्रुप में  
अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में गुरुवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के जनजातीय गौरव दिवस कार्यक्रम में शामिल होने पहुंची पण्डो जनजाति के लोगों को जिला प्रशासन ने बीच रास्ते में ही रोक दिया। जिस जनजाति से आने वाली देश की पहली आदिवासी राष्ट्रपति सरगुजा पहुंची थीं, उसी जनजाति के लोग उनसे मिलने के लिए तरस गए।
दरअसल लखनपुर विकासखंड के ग्राम परसोड़ीकला के पण्डो जनजाति के लोग राष्ट्रपति का स्वागत करने और उनसे मिलने अंबिकापुर के पीजी कॉलेज मैदान पहुंचने के लिए निकले थे। जैसे ही उनकी गाड़ियां सिंगीटाना क्षेत्र के चेकपोस्ट के पास पहुंची, जिला प्रशासन के अधिकारियों ने उन्हें आगे जाने से रोक दिया और वापस लौट जाने को कहा। इसके बाद पण्डो समाज के लोग चेकपोस्ट से करीब 100 मीटर पीछे सड़क किनारे धरने पर बैठ गए और राष्ट्रपति से मुलाकात की गुहार लगाने लगे। इनका कहना था कि ‘राष्ट्रपति मां हमारी ही बेटी हैं, उन्होंने हमें गोद लिया है, हम अपनी पीड़ा उनसे कहना चाहते थे, लेकिन प्रशासन ने हमें अपमानित किया।Ó ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि एसईसीएल की अमेरा ओपनकास्ट कोल माइनिंग प्रोजेक्ट का लगातार विरोध करने के कारण प्रशासन ने जान-बूझकर उन्हें कार्यक्रम स्थल तक नहीं पहुंचने दिया। इनका कहना था राष्ट्रपति खास तौर पर पण्डो जनजाति से मिलने सरगुजा आई थीं, लेकिन हमें ही उनसे मिलने नहीं दिया गया। घंटों इंतजार के बाद भी जब कोई सुनवाई नहीं हुई तो आक्रोशित ग्रामीण वापस अपने गांव लौट गए। इस घटना से पण्डो समाज में भारी रोष है और लोग इसे अपनी बेटी का अपमान बता रहे हैं। बता दें कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने परसोड़ीकला गांव को गोद लिया है और पहले भी वहां की समस्याओं को सुनने का आश्वासन दिया था। ग्रामीणों का कहना है कि खदान के कारण उनका गांव विस्थापन के कगार पर है और वे इस पीड़ा को राष्ट्रपति तक पहुंचाना चाहते थे।

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