राष्ट्रवादी वक्ता ने  पी.जी. कॉलेज ऑडिटोरियम में विशाल जनसभा को संबोधित किया

अंबिकापुर। राष्ट्रवादी प्रखर वक्ता पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ ने बुधवार को देर शाम पी.जी. कॉलेज ऑडिटोरियम, में आयोजित विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि ‘भारत की संस्कृति विश्व की सबसे प्राचीन और वैज्ञानिक संस्कृति है, जो  ‘वसुधैव कुटुम्बकम्Ó और ‘सर्वे भवन्तु सुखिन:Ó जैसे सार्वभौमिक आदर्शों पर आधारित है। यह संस्कृति केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला और समाज को जोड़ने का विज्ञान है।
उन्होंने अपने तीखे और प्रभावशाली अंदाज में कहा कि  आज सनातन परंपरा पर योजनाबद्ध प्रहार किए जा रहे हैं। हमें यह समझना होगा कि जो सनातन को तोड़ना चाहते हैं, वे भारत की आत्मा को तोड़ना चाहते हैं। जो राम को नकारते हैं, वे भारत के अस्तित्व को नकारते हैं। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि ‘भारत का युवा आज तकनीक से संपन्न है, लेकिन उसे अपनी जड़ों से जुड़े रहना होगा। हमें यह जानना होगा कि हमारी सभ्यता, परंपरा और संस्कृति क्या है और हमें अपने ज्ञान का उपयोग ‘देश के निर्माणÓ में करना है, न कि ‘संस्कृति के विनाशÓ में। उन्होंने कहा कि भारत का राष्ट्रवाद सत्ता या भूगोल से नहीं, बल्कि सांस्कृतिक चेतना से उत्पन्न होता है। जब तक यह चेतना जीवित है, तब तक भारत अमर रहेगा। भारत में धर्म का अर्थ संकीर्णता नहीं, बल्कि कर्तव्य और मर्यादा है। हमारे ग्रंथों ने कभी किसी पर वर्चस्व की भावना नहीं रखी। उन्होंने पूरे विश्व के कल्याण की कामना की और कहा कि  आज कुछ शक्तियां भारतीय संस्कृति को पिछड़ा बताने का षड्यंत्र कर रही हैं, जबकि सत्य यह है कि भारत की संस्कृति ही विश्व को दिशा देने वाली है। जो भारत को समझना चाहता है, उसे भारत के ऋषियों, वेदों और परंपराओं को समझना होगा। आत्मनिर्भर भारत का अर्थ केवल आर्थिक स्वतंत्रता नहीं है, बल्कि आत्मसम्मान और सांस्कृतिक स्वतंत्रता है। जब भारत अपनी जड़ों से जुड़ा रहेगा, तभी वह विश्वगुरु बनेगा। कार्यक्रम का आयोजन लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक गणपति स्थापना ट्रस्ट, अंबिकापुर द्वारा किया गया। कार्यक्रम का संचालन नरेंद्र सिंह टुटेजा नीटू ने और धन्यवाद ज्ञापन ट्रस्ट के अध्यक्ष शैलेश सिंह शैलू ने किया। इस अवसर पर सांसद, विधायक, महापौर सहित अन्य जनप्रतिनिधि, आयोजन समिति के संरक्षक भारत सिंह सिसोदिया के साथ नीलेश सिंह, जितेंद्र सोनी, अनीश सिंह सहित नगर के प्रबुद्धजन और सभी वर्ग के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। 

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