शराब पीने-पिलाने और पीकर आने पर 15 सौ से 5 हजार तक के जुर्माना का प्रावधान
अंबिकापुर। लखनपुर विकासखंड में एक ऐसी ग्राम पंचायत है जहां अब शराब पीना, पिलाना और पीकर गांव में आना महंगा पड़ने वाला है। जी हां, सही सुन रहे हैं आप! ग्राम पंचायत केवरी में पंचायत के जनप्रतिनिधियों, ग्रामवासियों और महिलाओं ने नशे के खिलाफ एक बड़ी मुहिम छेड़ दी है। इस मुहिम के तहत आज एक सितंबर से गांव में पूर्ण शराबबंदी लागू कर दी गई है। शर्त को नहीं मानने पर संबंधित का अपने-अपने समाज से बहिष्कार करने का भी निर्णय लिया गया है।
बताया जा रहा है कि केवरी पंचायत में इन दिनों ग्राम सुधार समिति के नेतृत्व में नशा मुक्ति अभियान जोर-शोर से चल रहा है। इस अभियान में बड़ी संख्या में गांव के युवा, महिलाएं और बुजुर्ग अपनी सहभागिता निभा रहे हैं। टोली बनाकर घर-घर जाकर लोगों को समझाइश दी जा रही है कि नशे से दूर रहें और अपने परिवार को बर्बाद होने से बचाएं। साथ ही गांव में रैली निकालकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। पंचायत ने इसे लेकर ग्राम सभा में सर्वसम्मति से प्रस्ताव भी पारित किया है। प्रस्ताव के अनुसार अब गांव में कोई भी व्यक्ति शराब नहीं पिएगा, न किसी को पिलाएगा और न ही शराब बनाकर बेचेगा। यदि कोई नियम तोड़ता है तो उस पर कड़ा जुर्माना लगाया जाएगा। सूचना पत्र के माध्यम से पूरे गांव में इस फैसले का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। फिलहाल केवरी पंचायत की यह पहल पूरे लखनपुर ब्लॉक में चर्चा का विषय बनी हुई है। केवरी पंचायत सच में पूर्ण रूप से नशा मुक्त होकर अन्य पंचायतों के लिए प्रेरणास्रोत बन पाएगा, इसे लेकर आसपास के पंचायतों में भी चर्चा शुरू हो गई है।
जुर्माना और सामाजिक बहिष्कार
पंचायत द्वारा तय किए गए नियम के अनुसार गांव में शराब बनाने-बेचने पर 5-5 हजार रुपये जुर्माना, शराब पीने पर 1500 रुपये जुर्माना, दूसरे गांव से शराब पीकर आने पर 3000 रुपये, शराब पीकर लड़ने पर 3000 रुपये, जुर्माना देना होगा। यह जुर्माना ग्राम सुधार समिति और पंचायत द्वारा वसूला जाएगा और इस राशि का उपयोग गांव के विकास और नशा मुक्ति अभियान में किया जाएगा। इस अनूठी पहल का ग्रामीण खुले दिल से स्वागत कर रहे हैं। बुजुर्गों का कहना है कि यदि यह नियम सख्ती से लागू रहा तो आने वाली पीढ़ी सुधर जाएगी।
क्यों लेना पड़ा फैसला?
सरपंच मनिजर राम और ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कई सालों से यह देखा जा रहा था कि गांव में शराब के कारण कई घर बर्बादी के कगार पर पहुंच गए थे। लोग दिन भर की कमाई शराब में उड़ा देते थे। शाम होते ही नशे में धुत होकर घर में मारपीट, गाली-गलौज और झगड़ा आम बात हो गई थी। महिलाएं और बच्चे सबसे ज्यादा परेशान थे। कई परिवारों में तलाक तक की नौबत आ गई थी। इसी दर्द को देखते हुए गांव की महिलाओं ने सबसे पहले आवाज उठाई। फिर पंचायत ने बैठक बुलाकर सर्वसम्मति से गांव को नशा मुक्त बनाने का संकल्प लिया। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत को पूरी तरह नशा मुक्त बनाने के लिए जो भी प्रयास करना पड़े, वे करेंगे।

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