ऑडियो प्रकरण पर नहीं मिला जवाब, विपक्ष ने किया सामान्य सभा का बहिष्कार

अंबिकापुर। महापौर मंजूषा भगत के कथित आडियो प्रकरण को लेकर मंगलवार, 11 अगस्त को नगर निगम की सामान्य सभा में जमकर हंगामा हुआ। विपक्ष द्वारा जवाब मांगे जाने पर महापौर का आक्रामक रुख सामने आया। सत्ता पक्ष के लोग मेज पीटते रहे, इन सबके बीच हंगामा की स्थिति बनती रही और विपक्षी पार्षदों ने बैठक का बहिष्कार कर दिया। सामान्य सभा की कार्रवाई बिना विपक्ष के ही चलती रही।
राजमोहिनी देवी भवन में दोपहर 12 बजे शुरू हुई बैठक में पहले 8 नये मनोनीत पार्षदों का स्वागत किया गया। इसके बाद नेता प्रतिपक्ष शफी अहमद ने महापौर एवं भाजपा जिलाध्यक्ष के कथित ऑडियो वायरल होने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा आश्चर्य की बात है कि, जिस मामले में स्वयं महापौर ने थाने में शिकायत की है, उसमें पुलिस द्वारा अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने सदन से सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर एसपी को भेजने और महापौर से सदन में जवाब देने की मांग की। इस पर एमआईसी प्रभारी मनीष सिंह ने पहले प्रश्नोत्तर काल चलाने की बात कही। विपक्ष ने इसे आवाज दबाने का प्रयास बताते हुए पहले जवाब देने की मांग शुरू कर दी। बैठक में महिला बाल विकास विभाग से कुसुम जायसवाल, खाद्य विभाग से जिला खाद्य अधिकारी शिवेन्द्र कामटे और पुलिस विभाग से एएसपी रितेश चौधरी को बुलाया गया था। सदन में हंगामे को देखकर अधिकारी भी चुप्पी साधे रहे।
महापौर हुईं आक्रामक, स्थगित हुई कार्रवाई
विपक्ष के दबाव पर महापौर मंजूषा भगत जवाब देने खड़ी हुईं। बार-बार एक ही मुद्दा उठाए जाने पर उन्होंने विपक्ष पर दबाव बनाने का आरोप लगाया। इस दौरान महापौर का स्वर काफी तेज हो गया और वे आक्रामक होकर बोलने लगीं। उन्होंने निगम में कांग्रेस शासन के समय भेदभाव के आरोप भी लगाए। महापौर के बोलने के तरीके पर विपक्ष ने आपत्ति जताई। पक्ष-विपक्ष में जमकर हंगामा हुआ। डेढ़ बजे सभापति हरमिंदर सिंह टिन्नी ने कार्रवाई 20 मिनट के लिए स्थगित कर दी।
बहिष्कार कर निकले विपक्षी पार्षद
पुन: कार्रवाई शुरू होने पर विपक्ष ने फिर जवाब मांगा। सत्ता पक्ष के हस्तक्षेप के बाद विपक्षी पार्षदों ने सामान्य सभा का बहिष्कार कर सदन से बाहर निकल गए। एमआईसी सदस्य मनीष सिंह और पार्षद आलोक दुबे ने मान-मनौव्वल की, लेकिन विपक्षी पार्षद नहीं माने। नेता प्रतिपक्ष शफी अहमद ने महापौर के आचरण को संसदीय परंपरा के विरुद्ध बताया। विपक्ष के जाने के बाद निगम में उपस्थित अधिकारियों से केवल सत्ता पक्ष के पार्षदों ने ही सवाल किए और कार्रवाई पूरी हुई।

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