समृद्धि की राह पर ग्रामीण और किसान, महिलाएं आत्मनिर्भरता की ओर अग्
अंबिकापुर। सूरजपुर जिले के पहाड़गांव, पण्डोनगर में एमएसएसव्हीपी नाबार्ड जल ग्रहण परियोजना के शुरू होने से इन गांवों की तस्वीर बदल गई है। यहां शुरू की गई कृषि उत्पादन परियोजना से पहले खरीफ के मौसम में केवल धान की फसल उगाई जाती थी, इसके बाद खेत सूखे रहते थे। परियोजना के शुरू होने के बाद कुल उत्पाद में लगभग 60 से 65 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। पानी की उपलब्धता के लिए खेत तालाब और चेक डेम का निर्माण किया गया है, जिससे कृषि सिंचाई के क्षेत्र में औसत 50 से 55 प्रतिशत की वृद्धि हुई। पण्डोनगर में भू-जल का स्तर बढ़ा जिससे ग्रामीणों को साल भर पानी सुलभ हो रहा है। परियोजना के तहत गांव में ही काम मिलने से 80 प्रतिशत पलायन रूक गया। महिलाओं ने समूह बनाकर मसाला एवं सब्जी की खेती की, और मण्डी में सामूहिक रूप से अपना उपज बेचना शुरू किया। परियोजना द्वारा दिये गये सिलाई मशीन एवं ब्यूटी पार्लर भी जरूरतमंदों के लिए आय उपार्जन का अच्छा स्त्रोत बना है, जिससे महिलाएं आत्मनिर्भरता की राह पर अग्रसर हैं।
बता दें कि, एमएसएसव्हीपी नाबार्ड जल ग्रहण परियोजना से पहले ग्राम पण्डोनगर में वर्षा ऋतु में सिर्फ धान कि खेती की जाती थी, जल की कमी के कारण शेष ऋतुओं में खेत सूखे पड़े रहते थे। पण्डो जनजाति परिवारों को रोजगार के लिए बाहर पलायन करना पड़ता था। लगभग हर परिवार से एक सदस्य रोजगार के लिए पास के शहरों में जाता था। कई तरह की मूलभूत आवश्यकताओं को ये पूरा नहीं कर पाते थे। कई पण्डो परिवारों के लिए बच्चों की पढ़ाई तक का खर्च उठाना मुनासिब नहीं था। इन्हीं समस्याओं को देखते हुए वर्ष 2022 में पण्डोनगर में नाबार्ड जल ग्रहण परियोजना की एफआईपी फेस की शुरूआत की गई। नाबार्ड जल ग्रहण परियोजना के अंतर्गत व्हीडब्ल्यूसी समिति का गठन किया गया, और सबसे पहले गांव की जरूरतों का आंकलन करके ग्रामीणों की भागीदारी से कार्ययोजना बनाई गई। व्हीडब्ल्यूसी कमेटी ने रख-रखाव कोष बनाया, जिसके तहत सभी ग्रामवासियों को कुछ राशि, महिला मुखिया परिवारों को छोड़कर सभी किसानों को प्रति परिवार जिनकी जमीन 1 हेक्टेयर है, उन्हें 150 रुपये की दर से, जिनकी जमीन 1 से 3 हेक्टेयर है, उनको 250 रुपये एवं जिनकी जमीन 3 हेक्टेयर से अधिक है, उनके लिए यह राशि 400 रुपये निर्धारित की गई। व्हीडब्ल्यूसी कमेटी, ग्राम सभा, ग्राम समुदाय अधिक राशि तय करने के लिये स्वतंत्र है। भूमिहीनों द्वारा कोई योगदान परिकल्पित नहीं है। परियोजना पास के एक और गांव, पहाड़गांव में भी चल रहा है। ग्रामीणों की सहभागिता एवं पानी के सही उपयोग से परिवर्तन संभव है, यह परिदृश्य पण्डोनगर, पहाड़गांव में अब देखने को मिल रहा है। पहले जहां पलायन गरीबी, सूखे खेत थे, वहां अब हरे-भरे खेत, समृद्ध किसान और आत्मनिर्भर महिलाएं हैं।
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नाबार्ड जल ग्रहण परियोजना का इन कार्यों पर जोर
पण्डोनगर में नाबार्ड जल ग्रहण परियोजना के तहत विभिन्न कार्य संचालित किए जा रहे हैं। फार्म पॉण्ड, चेक डेम, मेड़ बंधी जैसे कार्यों से पण्डोनगर की जनजाति परिवारों को रोजगार मिल रहा है, जिस कारण इन्हें काम के तलाश में पलायन नहीं करना पड़ रहा है। आजिविका विकास हेतु नाबार्ड जल ग्रहण परियोजना द्वारा मछली पालन, मुर्गी पालन, धान कुटाई मशीन, आटा चक्की वितरण किया गया है। कृषि कार्य को बढ़ावा देने और सिंचाई की सुविधा के लिए सोलर सिस्टम पम्प, ड्रिप एरीगेशन पम्प, मल्चिन, इस्त्रीकल पाइप, उत्पादकता हेतु अजोला कल्बर ट्रैक, वर्मी कम्पोस्ट टैंक, नाडेप ट्रैंक तथा आधुनिक खेती की जानकारी के लिए किसानों को कृषि विज्ञान केन्द्र अंबिकापुर में कृषि विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण भी दिलाया गया है, जिससे वे आधुनिक खेती को अपना सकें एवं कृषि में सुधार कर सकें। सब्जी उत्पादन हेतु उच्च किस्म की सब्जी बीज, धान बीज, दलहन बीज एवं मशरूम उत्पादन हेतु प्रशिक्षण और मशरूम स्पान भी वितरण किया गया है। खेतों की गहरी जोताई से खेत में जल संरक्षण क्षमता बढ़ी है, जिससे उत्पादन बढ़ने के साथ-साथ पण्डोनगर के जनजाति परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है। चेक डेम निर्माण होने से खेतों के लिए जल की उपलब्धता बढ़ी, जिससे पण्डोनगर के किसान अब हर मौसम में खेती कर आय उपार्जन कर रहे हैं।
किसान और पार्लर संचालिका ने कहा
पण्डोनगर के किसान समरत पण्डो/रामचन्द्र कहते हैं कि पहले वे सिर्फ खरीफ के मौसम में धान की खेती करते थे, बाकी समय खेत खाली रहता था, वे किसी फसल की पैदावार नहीं ले पाते थे। चेक डेम निर्माण होने से अब पानी की सुविधा और नई तकनीक से वे तीन फसल ले रहे हैं। बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्चा आराम से चल रहा है। यूनिक ब्यूटी पार्लर की संचालिका अनिता बताती हैं कि, संसाधन की कमी होने के कारण उनका पार्लर खोलने का सपना पूरा नहीं हो पा रहा था। ब्यूटी पार्लर का सामान मिलने से घर पर ही रहकर वे 3 से 5 हजार रुपये माह में आसानी से कमा लेती हैं, और घर चलाने में अपने पति की मदद कर रही हैं।
ग्रामीणों की महत्वपूर्ण भागीदारी
एमएसएसव्हीपी नाबार्ड जल ग्रहण परियोजना द्वारा जो भी कार्य संचालित किये जाते हैं, उसमें गांव वालों की भागीदारी महत्वपूर्ण है। इनके द्वारा 16 से 25 प्रतिशत श्रमदान किया जाता है। सरकार की योजनाओं के तहत क्रेड़ा के माध्यम से इन्हें उर्जा स्त्रोतों और उर्जा संरक्षण से जुड़ी विभिन्न योजनाओं का लाभ मिल रहा है। यहां छत्तीसगढ़ सरकार के उर्जा विभाग के तहत स्थापित एजेंसी हैं। क्रेडा के द्वारा सोलर सिस्टम पम्प बायोगैस टैंक लिया गया है। गांव के लोगों को कृषि विभाग द्वारा मिलेट्स क्रॉप के बीज एवं मक्का बीज का वितरण एवं मनरेगा जैसी अन्य योजनाओं से भी जोड़ा गया है।

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