पूर्वजों की धरोहर को सहेजकर रखा था चौबे परिवार, मिली दुर्लभ पांडुलिपियां

अंबिकापुर। कलेक्टर एवं ज्ञानभारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान के जिला समिति के अध्यक्ष अजीत वसंत के मार्गदर्शन तथा जिला पंचायत सीईओ एवं समिति के सदस्य सचिव विनय अग्रवाल के निर्देशन में जिले की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने के लिए ‘ज्ञान भारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण’अभियान जारी है। इसके अंतर्गत जिले में प्राचीन एवं दुर्लभ पाण्डुलिपियों के संरक्षण एवं दस्तावेजीकरण का कार्य किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखना है। अभियान के तहत जिले में विभिन्न ऐतिहासिक पाण्डुलिपियों का संग्रहण कर उन्हें ज्ञानभारतम् पोर्टल में दर्ज किया जा रहा है। इसी कड़ी में दरिमा तहसील के बरगंवा ग्राम में दो दुर्लभ पांडुलिपियां प्राप्त हुईं। पांडुलिपि पुरानी होने के बाद भी बहुत ही अच्छी स्थिति में चौबे परिवार के पास सुरक्षित रखी हुई मिली। पांडुलिपि की जानकारी अपलोड करने का कार्य गौरव पाठक एवं जगदीश बड़ा द्वारा किया गया। इस दौरान संयुक्त कलेक्टर शारदा अग्रवाल, जनपद पंचायत अंबिकापुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी राजेश सेंगर, ग्राम सरपंच संजीता सिंह, सचिव शम्भू शंकर सिंह, तकनीकी सहायक कृष्ण कुमार श्रीवास उपस्थित रहे।
पीढ़ियों से सहेजकर रखी थी पूर्वजों की धरोहर
पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान के दौरान दरिमा तहसील के बरगंवा ग्राम में 72 वर्षीय बाल कृष्ण चौबे के घर में पांडुलिपियां मिली। उन्होंने पांडुलिपियों को अपने पूजाघर में बस्ते में बांधकर रखा था। पांडुलिपियों के दो बंडल में एक बंडल बन दुर्गा महामंत्र और दूसरा दुर्गा सप्तशती का था। उन्होंने बताया कि बन दुर्गा महामंत्र पांडुलिपी उनके छोटे दादा स्वर्गीय देवदत्त शर्मा ने स्याही का प्रयोग कर 27 अगस्त 1932 में हाथ से लिखा था, यह छोटे पुस्तकनुमा आकार में है। वहीं दूसरा 183 पन्नों का दुर्गा सप्तशती पांडुलिपि लगभग वर्ष 1895-1896 में लिखा गया है, जिसको लिखने वाले पूर्वज की उन्हें जानकारी नहीं हैं।
कलेक्टर की मौजूदगी में हुआ डिजिटल संरक्षण
पांडुलिपि के संरक्षण कार्य के दौरान कलेक्टर अजीत वसंत स्वयं उपस्थित रहे। उन्होंने इस अवसर पर कहा ये पांडुलिपियां केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता, संस्कृति और ज्ञान परंपरा का जीवंत इतिहास हैं। इनका संरक्षण हमारी आने वाली पीढ़ियों को अपनी समृद्ध विरासत से जोड़ने का एक सेतु है।

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