ऑडिट में खुली पोल, तत्कालीन प्रभारी उप संचालक ने जारी नोटिस का नहीं दिया जवाब

अंबिकापुर। पशु चिकित्सा विभाग में संभाग स्तरीय पशु प्रदर्शनी के लिए मिली शासकीय राशि में से एक लाख 70 हजार रुपये का निज खाते में तत्कालीन अधिकारी द्वारा किए गए अंतरण का मामला सुर्खियों में है। ऑडिट में की गई आपत्ति के बाद कार्यालय उप संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं अंबिकापुर की ओर से संबंधित अधिकारी को नोटिस भी जारी किया गया है, लेकिन इसका जवाब विभाग को नहीं मिल पाया है।
जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2023-24 में पशु प्रदर्शनी के लिए मिली शासकीय राशि का निजी बैंक खाते में अंतरण करने का कारनामा तत्कालीन उपसंचालक, पशु चिकित्सा सेवाएं ने अतिरिक्त प्रभार में रहते हुए कर दिखाया। वरिष्ठ अधिकारी से स्वीकृति मिलने के बाद इस राशि का उपयोग पशु प्रदर्शनी के लिए किया जाना था। बताया जा रहा है कि, इस राशि को वर्ष 2024 में उप संचालक के अतिरिक्त दायित्वों का निर्वहन कर रहे डॉ. तनवीर अहमद के द्वारा अपने निज खाते में स्थानांतरित करा लिया गया। इस दौरान डॉ. तनवीर की मूल पदस्थापना बलरामपुर जिले में थी। ऑडिट में सामने आई आपत्ति के बाद इन्हें वर्तमान में उप संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं के दायित्व का निर्वहन कर रहे डॉ. आर.पी. शुक्ला ने नोटिस जारी करके स्पष्टीकरण मांगा है, लेकिन तत्कालीन प्रभारी अधिकारी ने अवकाश में रहने का हवाला देते हुए निज बैंक खाते में अंतरित की गई राशि के संबंध में किसी प्रकार का स्पष्टीकरण नहीं दिया है।
बता दें कि, पशु चिकित्सा विभाग एक करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि गबन करने के मामले को लेकर पूर्व से सुर्खियों में रहा है। उप संचालक का दायित्व संभालने के बाद डॉ. आर.पी, शुक्ला के संज्ञान में यह मामला फरवरी-मार्च 2026 के बीच आया था, उन्होंने इसे गंभीरता से लिया। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में मामले की कमेटी ने जांच की और पुलिस थाने में प्राथमिकी भी दर्ज कराया था। जांच में आरोपित प्रदीप कुमार अम्बष्ट, सहायक ग्रेड-02, उप संचालक कार्यालय, पशु चिकित्सा सेवाएं के द्वारा हितग्राहियों के अंशदान की राशि 44,54,700 रुपये एवं 63,29,640 रुपये पशु रोगी कल्याण समिति के खाते में जमा नहीं करना पाया गया। इस प्रकार 01 करोड़ 07 लाख चैरासी हजार 340 रुपये की हेराफेरी उजागर हुई थी।
जांच में पाया गया कि लिपिक ने फर्जी रसीदें जारी करके सरकारी खाते की जगह निजी या अन्य खातों में राशि अंतरित करके हेराफेरी की। पांच सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद सहायक ग्रेड-02 को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया था। वहीं पुलिस ने दर्ज मामले में अग्रिम कार्रवाई की थी। इधर पशु प्रदर्शनी के नाम पर निज खाते में किए गए राशि अंतरण के मामले में फिलहाल किसी प्रकार की बड़ी कार्रवाई नहीं हुई है। देखना यह है कि, पशु प्रदर्शनी के नाम पर सरकारी या संस्थागत फंड का सही इस्तेमाल नहीं करते हुए दस्तावेजी हेराफेरी के मामले में अग्रिम जांच, कार्रवाई कब तक पूरी हो पाती है।
बयान
संभाग स्तरीय पशु प्रदर्शनी के लिए वर्ष 2023-24 में मिली राशि में गड़बड़ी का मामला ऑडिट में आई आपत्ति के बाद सामने आया है। तत्कालीन प्रभारी उपसंचालक डॉ. तनवीर अहमद को नोटिस जारी किया गया है। इनके द्वारा व्हाट्सअप में अवकाश पर रहने की जानकारी दी गई है। नोटिस का जवाब मिलने पर जिम्मेदारी तय करते हुए अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. आर.पी. शुक्ला
उपसंचालक, पशु चिकित्सा सेवाएं

Spread the love

You missed

प्रशिक्षु उप निरीक्षकों को आरएफएसएल की जानकारी देने हुई दो दिवसीय कार्यशाला  संयुक्त संचालक, क्षेत्रीय न्यायालयिक विधि विज्ञान प्रयोगशाला कार्यालय के अधिकारियों ने दी विस्तृत जानकारीफोटो-2  छ.ग.फ्रंटलाइनअंबिकापुर। सरगुजा रेंज के विभिन्न जिलों में व्यवहारिक प्रशिक्षण करने हेतु आये सभी नव पदस्थ प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों को नई तकनिकी फोरेंसिक साइंस थ्योरी एवं प्रेटिकल प्रशिक्षण (आरएफएसएल) की जानकारी हेतु रेंज स्तर पर कार्यशाला का आयोजन पुलिस को-ऑडिनेशन सेन्टर, सरगुजा भवन में पुलिस महानिरीक्षक सरगुजा रेंज दीपक कुमार झा के निर्देशन में किया गया। इस दौरान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सरगुजा राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में फोरेंसिक साइंस थ्योरी एवं प्रेक्टिकल प्रशिक्षण के अधिकारी आर.के. पैकरा एवं कुलदीप कुजूर के द्वारा प्रशिक्षण दिया गया। इस नई तकनीकी प्रयोगशाला प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य किसी भी गंभीर प्रकरण के विवेचना के शुरूआती दौर से ही संग्रहित किये जाने वाले साक्ष्यों को पूर्णत: पारदर्शिता के साथ सुरक्षित एकत्रित किया जाता है ताकि भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय के समक्ष सुरक्षित पेश किया जा सके, जो कि अपराधिक कानूनों में फॉरेंसिक जांच की महत्ता दिया गया है।रेंज स्तर पर इस प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन दो बैच में कराया गया। प्रथम बैच 03 जुलाई को संपन्न हुआ, जिसमें जिला सूरजपुर, बलरामपुर एवं कोरिया के 38 प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों को प्रशिक्षण मिला। द्वितीय बैच में 07 जुलाई को सरगुजा, जशपुर एवं एमसीबी जिले के 40 प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों को इस प्रशिक्षण दिया गया। फोरेंसिक साइंस थ्योरी एवं प्रेटिकल प्रशिक्षण कार्यशाला में मुख्य रूप से संयुक्त संचालक, क्षेत्रीय न्यायालयिक विधि विज्ञान प्रयोगशाला अंबिकापुर के अधिकारी आर. के पैकरा एवं कुलदीप कुजूर के द्वारा अपने अनुभवों को साझा करते हुये कई ऐसे पुराने प्रकरणों के बारे में बताया जो कि बहुत ही बारीकी से उन्होंने साल्व किया है। उन्होंने कहा कि आप सब जब भी मैदानी थाना, चौकी क्षेत्रों में कार्य करेंगे तो अलग-अलग तरह के अनसुलझे प्रकरण आयेंगे, जैसे में बर्निंग केश, डिकम्पोज बॉडी, इलेक्ट्रिक शॉक, हैंगिंग, ड्रावनिंग, हत्या, शव निरीक्षण, घटनास्थल का निरीक्षण जैसे प्रकरणों का शुरूआती दौर से ही एक-एक साक्ष्यों का तकनीकी उपकरणों के माध्यम से सावधानी पूर्वक साक्ष्य संग्रहित करने के तरीके एवं बारीकियों के बारे में अधिकारियों ने विस्तृत जानकारी दी।बताया गया कि 1 जुलाई 2024 से लागू हुये नये अपराधिक कानून भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता एवं भारतीय साक्ष्य अधिनियम में फारेंसिक जांच की भूमिका को विशेष महत्व दिया गया है। इसमें विशेष रूप से 7 वर्ष या उससे अधिक सजा वाले अपराधों में फारेंसिक टीम के अधिकारियों के द्वारा जांच की अनिवार्यता है। इस हेतु रेंज के सभी जिलों में फारेंसिक वैज्ञानिक अधिकारी पदस्थ किये गये हंै, एवं आधुनिक मोबाइल फारेंसिक वैन प्रदाय किया है। प्रशिक्षण के अगली कड़ी में सभी प्रशिक्षु उप निरीक्षकों को क्षेत्रीय न्यायालयिक विधि विज्ञान प्रयोगशाला अंबिकापुर में ले जाकर बारीकी से एक-एक कर तकनीकि उपकरणों के बारे में जानकारी देकर घटना स्थल पर किस प्रकार प्रयोग/जांच किया जाना चाहिए, इन सारी तकनीकि उपकरणों के बारे में अवगत कराया गया। इसके उपरांत दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला में हर बिन्दुओं पर बारी-बारी से सभी प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों से उपस्थित अधिकारियों के द्वारा फीडबैक लिया गया, इस दौरान प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों से एक-एक करके पुन: तकनीकी उपकरणों एवं उसके उपयोग जैसे प्रश्नों के बाद त्रुटियों में सुधार किया गया।पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों एवं संयुक्त संचालक, क्षेत्रिय न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला के अधिकारियों ने कहा कि क्षेत्रिय एफएसएल से जांच में पारदर्शिता बढ़ेगी और बैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर अपराधियों तक पहुंचने में आसानी होगी जो कि न्यायिक प्रक्रिया में गति मिलेगी एवं लंबित मामलों के निपटारे में शीघ्रता आयेगी। प्रशिक्षण कार्यशाला के दौरान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सरगुजा अमोलक सिंह ढिल्लो, सीएसपी अंबिकापुर राहुल बंसल, रक्षित निरीक्षक अंबिकापुर तृप्ति सिंह राजपुत, पुमनि. कार्यालय के रीडर रेशम लाल साहू, स्थापना प्रभारी सुनील वर्मा सहित रेंज में पदस्थ सभी प्रशिक्षु उपनिरीक्षक उपस्थित रहे।