उच्च स्तरीय पुल, आधुनिक हाट बाजार, फल-सब्जी मंडी और महतारी सदनों से ग्रामीण विकास को मिलेगी नई गति

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज अपने जशपुर प्रवास के दौरान विकासखंड कुनकुरी अंतर्गत ग्राम पंचायत कलिबा में आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न जनहितैषी विकास कार्यों का भूमिपूजन एवं लोकार्पण कर क्षेत्रवासियों को विकास की बड़ी सौगात दी। मुख्यमंत्री श्री साय ने कुल 16 करोड़ 5 लाख 91 हजार रुपए की लागत से 12 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया। इन कार्यों में उच्च स्तरीय पुल, आधुनिक हाट बाजार, फल-सब्जी मंडी, स्कूल भवन और महतारी सदनों जैसे महत्वपूर्ण निर्माण कार्य शामिल हैं, जिनसे क्षेत्र में आवागमन, शिक्षा, कृषि विपणन, महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण अधोसंरचना को नई मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार गांव, गरीब, किसान और अंतिम व्यक्ति तक विकास की सुविधाएं पहुंचाने के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि सड़क, पुल, स्कूल, बाजार और महिला केंद्र जैसी आधारभूत सुविधाएं केवल निर्माण कार्य नहीं हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सामाजिक जीवन को मजबूत बनाने का माध्यम हैं। इन कार्यों से लोगों के जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव आएगा तथा ग्रामीण क्षेत्रों में नए अवसरों का सृजन होगा।

  मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम में कुल 12 करोड़ 86 लाख 3 हजार रुपए की लागत से 8 विकास कार्यों का भूमिपूजन किया। छत्तीसगढ़ राज्य कृषि विपणन बोर्ड के माध्यम से ग्राम पंचायत कलिबा में 57 लाख 66 हजार रुपए की लागत से आधुनिक हाट बाजार का निर्माण कराया जाएगा, जिसमें कव्हर्ड शेड, बोरवेल एवं सीसी रोड जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इसी प्रकार ग्राम पंचायत बेहराखार में 80 लाख 59 हजार रुपए की लागत से आधुनिक हाट बाजार का निर्माण किया जाएगा। इन बाजारों के बनने से किसानों और ग्रामीण व्यापारियों को अपनी उपज बेचने के लिए बेहतर एवं सुविधाजनक स्थान उपलब्ध होगा तथा स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। लोक निर्माण विभाग (सेतु) द्वारा कलिबा-टांगरबहार (बैगाटोली) मार्ग पर 5 करोड़ 11 लाख 6 हजार रुपए की लागत से उच्च स्तरीय पुल एवं पहुंच मार्ग का निर्माण किया जाएगा। वहीं बांसपतरा-दुलदुला मार्ग पर चांपाझरिया नाला में 5 करोड़ 90 लाख 80 हजार रुपए की लागत से उच्च स्तरीय पुल एवं पहुंच मार्ग बनाया जाएगा। इन पुलों के निर्माण से विशेषकर बरसात के दिनों में आवागमन सुगम होगा और ग्रामीणों को लंबे समय से चली आ रही कठिनाइयों से राहत मिलेगी। इसके साथ ही पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत प्राथमिक शाला कोरवाडेरा, प्राथमिक शाला डडगांव, माध्यमिक शाला बालक नारायणपुर तथा प्राथमिक शाला लालगोड़ा के नवीन भवन निर्माण कार्यों का भी भूमिपूजन किया गया। इन भवनों के निर्माण से विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण और आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कार्यक्रम में कुल 3 करोड़ 19 लाख 88 हजार रुपए की लागत से पूर्ण हुए 4 विकास कार्यों का लोकार्पण भी किया। कृषि उपज मंडी समिति जशपुर द्वारा ग्राम पंचायत कंडोरा (महुआटोली) स्थित उपमंडी कुनकुरी में 2 करोड़ 45 लाख 78 हजार रुपए की लागत से निर्मित फल-सब्जी मंडी, गोदाम, प्लेटफार्म, टायलेट, पार्किंग एवं सीसी रोड का लोकार्पण किया गया। इस आधुनिक मंडी के शुरू होने से किसानों एवं व्यापारियों को कृषि उपज के भंडारण, परिवहन और विपणन की बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। इसके अतिरिक्त पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा ढोढ़ीबहार, नारायणपुर एवं केराड़ीह में निर्मित महतारी सदनों का भी लोकार्पण किया गया। प्रत्येक महतारी सदन 24 लाख 70 हजार रुपए की लागत से निर्मित हुआ है। इन केंद्रों में महिलाओं को बैठक, प्रशिक्षण, स्व-सहायता समूह गतिविधियों एवं सामाजिक आयोजनों के लिए सुविधाजनक स्थान उपलब्ध होगा, जिससे महिला सशक्तिकरण को नई दिशा मिलेगी।

  मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में अधोसंरचना विकास को प्राथमिकता देते हुए योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रही है। पुल और सड़कों के निर्माण से ग्रामीण संपर्क मजबूत होगा, स्कूल भवनों से शिक्षा व्यवस्था को मजबूती मिलेगी, आधुनिक बाजार एवं मंडियों से किसानों को बेहतर सुविधाएं प्राप्त होंगी तथा महतारी सदन महिलाओं के सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तिकरण का मजबूत केंद्र बनेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल निर्माण कार्य करना नहीं, बल्कि गांवों में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति के जीवन को अधिक सुगम, सुरक्षित और समृद्ध बनाना है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री साय की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय, जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष उपेंद्र यादव सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।
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प्रशिक्षु उप निरीक्षकों को आरएफएसएल की जानकारी देने हुई दो दिवसीय कार्यशाला  संयुक्त संचालक, क्षेत्रीय न्यायालयिक विधि विज्ञान प्रयोगशाला कार्यालय के अधिकारियों ने दी विस्तृत जानकारीफोटो-2  छ.ग.फ्रंटलाइनअंबिकापुर। सरगुजा रेंज के विभिन्न जिलों में व्यवहारिक प्रशिक्षण करने हेतु आये सभी नव पदस्थ प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों को नई तकनिकी फोरेंसिक साइंस थ्योरी एवं प्रेटिकल प्रशिक्षण (आरएफएसएल) की जानकारी हेतु रेंज स्तर पर कार्यशाला का आयोजन पुलिस को-ऑडिनेशन सेन्टर, सरगुजा भवन में पुलिस महानिरीक्षक सरगुजा रेंज दीपक कुमार झा के निर्देशन में किया गया। इस दौरान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सरगुजा राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में फोरेंसिक साइंस थ्योरी एवं प्रेक्टिकल प्रशिक्षण के अधिकारी आर.के. पैकरा एवं कुलदीप कुजूर के द्वारा प्रशिक्षण दिया गया। इस नई तकनीकी प्रयोगशाला प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य किसी भी गंभीर प्रकरण के विवेचना के शुरूआती दौर से ही संग्रहित किये जाने वाले साक्ष्यों को पूर्णत: पारदर्शिता के साथ सुरक्षित एकत्रित किया जाता है ताकि भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय के समक्ष सुरक्षित पेश किया जा सके, जो कि अपराधिक कानूनों में फॉरेंसिक जांच की महत्ता दिया गया है।रेंज स्तर पर इस प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन दो बैच में कराया गया। प्रथम बैच 03 जुलाई को संपन्न हुआ, जिसमें जिला सूरजपुर, बलरामपुर एवं कोरिया के 38 प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों को प्रशिक्षण मिला। द्वितीय बैच में 07 जुलाई को सरगुजा, जशपुर एवं एमसीबी जिले के 40 प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों को इस प्रशिक्षण दिया गया। फोरेंसिक साइंस थ्योरी एवं प्रेटिकल प्रशिक्षण कार्यशाला में मुख्य रूप से संयुक्त संचालक, क्षेत्रीय न्यायालयिक विधि विज्ञान प्रयोगशाला अंबिकापुर के अधिकारी आर. के पैकरा एवं कुलदीप कुजूर के द्वारा अपने अनुभवों को साझा करते हुये कई ऐसे पुराने प्रकरणों के बारे में बताया जो कि बहुत ही बारीकी से उन्होंने साल्व किया है। उन्होंने कहा कि आप सब जब भी मैदानी थाना, चौकी क्षेत्रों में कार्य करेंगे तो अलग-अलग तरह के अनसुलझे प्रकरण आयेंगे, जैसे में बर्निंग केश, डिकम्पोज बॉडी, इलेक्ट्रिक शॉक, हैंगिंग, ड्रावनिंग, हत्या, शव निरीक्षण, घटनास्थल का निरीक्षण जैसे प्रकरणों का शुरूआती दौर से ही एक-एक साक्ष्यों का तकनीकी उपकरणों के माध्यम से सावधानी पूर्वक साक्ष्य संग्रहित करने के तरीके एवं बारीकियों के बारे में अधिकारियों ने विस्तृत जानकारी दी।बताया गया कि 1 जुलाई 2024 से लागू हुये नये अपराधिक कानून भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता एवं भारतीय साक्ष्य अधिनियम में फारेंसिक जांच की भूमिका को विशेष महत्व दिया गया है। इसमें विशेष रूप से 7 वर्ष या उससे अधिक सजा वाले अपराधों में फारेंसिक टीम के अधिकारियों के द्वारा जांच की अनिवार्यता है। इस हेतु रेंज के सभी जिलों में फारेंसिक वैज्ञानिक अधिकारी पदस्थ किये गये हंै, एवं आधुनिक मोबाइल फारेंसिक वैन प्रदाय किया है। प्रशिक्षण के अगली कड़ी में सभी प्रशिक्षु उप निरीक्षकों को क्षेत्रीय न्यायालयिक विधि विज्ञान प्रयोगशाला अंबिकापुर में ले जाकर बारीकी से एक-एक कर तकनीकि उपकरणों के बारे में जानकारी देकर घटना स्थल पर किस प्रकार प्रयोग/जांच किया जाना चाहिए, इन सारी तकनीकि उपकरणों के बारे में अवगत कराया गया। इसके उपरांत दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला में हर बिन्दुओं पर बारी-बारी से सभी प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों से उपस्थित अधिकारियों के द्वारा फीडबैक लिया गया, इस दौरान प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों से एक-एक करके पुन: तकनीकी उपकरणों एवं उसके उपयोग जैसे प्रश्नों के बाद त्रुटियों में सुधार किया गया।पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों एवं संयुक्त संचालक, क्षेत्रिय न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला के अधिकारियों ने कहा कि क्षेत्रिय एफएसएल से जांच में पारदर्शिता बढ़ेगी और बैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर अपराधियों तक पहुंचने में आसानी होगी जो कि न्यायिक प्रक्रिया में गति मिलेगी एवं लंबित मामलों के निपटारे में शीघ्रता आयेगी। प्रशिक्षण कार्यशाला के दौरान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सरगुजा अमोलक सिंह ढिल्लो, सीएसपी अंबिकापुर राहुल बंसल, रक्षित निरीक्षक अंबिकापुर तृप्ति सिंह राजपुत, पुमनि. कार्यालय के रीडर रेशम लाल साहू, स्थापना प्रभारी सुनील वर्मा सहित रेंज में पदस्थ सभी प्रशिक्षु उपनिरीक्षक उपस्थित रहे।