कोतवाली टीआई ने कोटवारों की बैठक लेकर कहा-अपराधिक गतिविधियों को पुलिस से करें साझा

अंबिकापुर। डीआईजी एवं एसएसपी सरगुजा के दिशा निर्देशन में जिले के पुलिस थाना और चौकी में कोटवार सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। इसी कड़ी में कोतवाली थाना में आयोजित सम्मेलन में कोटवारों को ग्रामीण क्षेत्रों की सूचनाओं का आदान-प्रदान करने के लिए निर्देशित किया गया। कोटवारों को ग्राम सुरक्षा के संबंध में पहल के लिए आवश्यक टिप्स दिए गए।
पुलिस एवं कोटवार के मध्य आपसी समन्वय बनाए रखने और अवैध गतिविधियों की सूचना थाना, चौकी में पहुंचाने के उद्देश्य से सरगुजा पुलिस द्वारा प्रति माह कोटवार सम्मलेन का आयोजन किया जा रहा है, साथ ही पुलिस की ग्राम स्तर पर पकड़ मजबूत करने एवं सूचना तंत्र को विकसित करने के उद्देश्य से सभी थाना, चौकी प्रभारियों को अपने-अपने थाना क्षेत्र में कोटवार सम्मेलन का आयोजन करने के निर्देश दिए गए हंै। इसी क्रम में थाना कोतवाली पुलिस टीम द्वारा थाना क्षेत्र के ग्राम कोटवारों का थाना परिसर में सम्मलेन आयोजित किया गया। सम्मलेन के दौरान ग्राम कोटवारों कों ग्राम की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की समझाइस दी गई। कोटवारों के सहायता से ग्राम स्तर पर आपराधिक गतिविधियों मे संलिप्त व्यक्तियों की सूचना थाना में प्रदान करने संबंधी विशेष दिशा निर्देश दिए गए।
बैठक के दौरान थाना प्रभारी कोतवाली निरीक्षक शशिकान्त सिन्हा ने कोटवारों से प्रत्येक ग्राम की बारीकी से जानकारी प्राप्त की, साथ ही ग्राम स्तर पर आपराधिक एवं अन्य गतिविधियों में शामिल लोगों, गुंडा बदमाशों एवं निगरानी बदमाशों के गांव में गुजर-बसर की जानकारी ली गई। बैठक के दौरान कोटवारों को निरंतर संपर्क में बने रहने के साथ ही ग्राम स्तर पर किसी भी बड़े विवाद, झगड़े, दुर्घटना एवं जमीन विवाद की सूचना प्राप्त होने पर तत्काल पुलिस टीम से साझा करने कहा गया। बैठक में ग्राम कोटवारों से साइबर अपराधों के बढ़ते खतरों पर भी चर्चा की गई। इन्हें ऑनलाइन ठगी, फर्जी फोन कॉल्स और बैंकिंग धोखाधड़ी जैसी साइबर चुनौतियों के बारे में बताया गया, साथ ही उन्हें गांव के लोगों को इन खतरों से सतर्क करने और साइबर जागरूकता फैलाने के लिए प्रेरित किया गया।

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प्रशिक्षु उप निरीक्षकों को आरएफएसएल की जानकारी देने हुई दो दिवसीय कार्यशाला  संयुक्त संचालक, क्षेत्रीय न्यायालयिक विधि विज्ञान प्रयोगशाला कार्यालय के अधिकारियों ने दी विस्तृत जानकारीफोटो-2  छ.ग.फ्रंटलाइनअंबिकापुर। सरगुजा रेंज के विभिन्न जिलों में व्यवहारिक प्रशिक्षण करने हेतु आये सभी नव पदस्थ प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों को नई तकनिकी फोरेंसिक साइंस थ्योरी एवं प्रेटिकल प्रशिक्षण (आरएफएसएल) की जानकारी हेतु रेंज स्तर पर कार्यशाला का आयोजन पुलिस को-ऑडिनेशन सेन्टर, सरगुजा भवन में पुलिस महानिरीक्षक सरगुजा रेंज दीपक कुमार झा के निर्देशन में किया गया। इस दौरान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सरगुजा राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में फोरेंसिक साइंस थ्योरी एवं प्रेक्टिकल प्रशिक्षण के अधिकारी आर.के. पैकरा एवं कुलदीप कुजूर के द्वारा प्रशिक्षण दिया गया। इस नई तकनीकी प्रयोगशाला प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य किसी भी गंभीर प्रकरण के विवेचना के शुरूआती दौर से ही संग्रहित किये जाने वाले साक्ष्यों को पूर्णत: पारदर्शिता के साथ सुरक्षित एकत्रित किया जाता है ताकि भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय के समक्ष सुरक्षित पेश किया जा सके, जो कि अपराधिक कानूनों में फॉरेंसिक जांच की महत्ता दिया गया है।रेंज स्तर पर इस प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन दो बैच में कराया गया। प्रथम बैच 03 जुलाई को संपन्न हुआ, जिसमें जिला सूरजपुर, बलरामपुर एवं कोरिया के 38 प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों को प्रशिक्षण मिला। द्वितीय बैच में 07 जुलाई को सरगुजा, जशपुर एवं एमसीबी जिले के 40 प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों को इस प्रशिक्षण दिया गया। फोरेंसिक साइंस थ्योरी एवं प्रेटिकल प्रशिक्षण कार्यशाला में मुख्य रूप से संयुक्त संचालक, क्षेत्रीय न्यायालयिक विधि विज्ञान प्रयोगशाला अंबिकापुर के अधिकारी आर. के पैकरा एवं कुलदीप कुजूर के द्वारा अपने अनुभवों को साझा करते हुये कई ऐसे पुराने प्रकरणों के बारे में बताया जो कि बहुत ही बारीकी से उन्होंने साल्व किया है। उन्होंने कहा कि आप सब जब भी मैदानी थाना, चौकी क्षेत्रों में कार्य करेंगे तो अलग-अलग तरह के अनसुलझे प्रकरण आयेंगे, जैसे में बर्निंग केश, डिकम्पोज बॉडी, इलेक्ट्रिक शॉक, हैंगिंग, ड्रावनिंग, हत्या, शव निरीक्षण, घटनास्थल का निरीक्षण जैसे प्रकरणों का शुरूआती दौर से ही एक-एक साक्ष्यों का तकनीकी उपकरणों के माध्यम से सावधानी पूर्वक साक्ष्य संग्रहित करने के तरीके एवं बारीकियों के बारे में अधिकारियों ने विस्तृत जानकारी दी।बताया गया कि 1 जुलाई 2024 से लागू हुये नये अपराधिक कानून भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता एवं भारतीय साक्ष्य अधिनियम में फारेंसिक जांच की भूमिका को विशेष महत्व दिया गया है। इसमें विशेष रूप से 7 वर्ष या उससे अधिक सजा वाले अपराधों में फारेंसिक टीम के अधिकारियों के द्वारा जांच की अनिवार्यता है। इस हेतु रेंज के सभी जिलों में फारेंसिक वैज्ञानिक अधिकारी पदस्थ किये गये हंै, एवं आधुनिक मोबाइल फारेंसिक वैन प्रदाय किया है। प्रशिक्षण के अगली कड़ी में सभी प्रशिक्षु उप निरीक्षकों को क्षेत्रीय न्यायालयिक विधि विज्ञान प्रयोगशाला अंबिकापुर में ले जाकर बारीकी से एक-एक कर तकनीकि उपकरणों के बारे में जानकारी देकर घटना स्थल पर किस प्रकार प्रयोग/जांच किया जाना चाहिए, इन सारी तकनीकि उपकरणों के बारे में अवगत कराया गया। इसके उपरांत दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला में हर बिन्दुओं पर बारी-बारी से सभी प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों से उपस्थित अधिकारियों के द्वारा फीडबैक लिया गया, इस दौरान प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों से एक-एक करके पुन: तकनीकी उपकरणों एवं उसके उपयोग जैसे प्रश्नों के बाद त्रुटियों में सुधार किया गया।पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों एवं संयुक्त संचालक, क्षेत्रिय न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला के अधिकारियों ने कहा कि क्षेत्रिय एफएसएल से जांच में पारदर्शिता बढ़ेगी और बैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर अपराधियों तक पहुंचने में आसानी होगी जो कि न्यायिक प्रक्रिया में गति मिलेगी एवं लंबित मामलों के निपटारे में शीघ्रता आयेगी। प्रशिक्षण कार्यशाला के दौरान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सरगुजा अमोलक सिंह ढिल्लो, सीएसपी अंबिकापुर राहुल बंसल, रक्षित निरीक्षक अंबिकापुर तृप्ति सिंह राजपुत, पुमनि. कार्यालय के रीडर रेशम लाल साहू, स्थापना प्रभारी सुनील वर्मा सहित रेंज में पदस्थ सभी प्रशिक्षु उपनिरीक्षक उपस्थित रहे।