रायपुर,

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के ग्राम कासौली (विकासखंड दंतेवाड़ा) के प्रगतिशील किसान श्री सुरेश कुमार नाग को आईबीसी 24 द्वारा प्रदान किए जाने वाले प्रतिष्ठित ‘भुइयां के भगवान’ सम्मान से नवाजा गया है। 06 फरवरी 2026 को आयोजित कार्यक्रम में राज्य के उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने उन्हें प्रशस्ति पत्र एवं सम्मान राशि प्रदान कर सम्मानित किया। यह उपलब्धि दंतेवाड़ा जिले के किसानों के लिए गर्व का विषय है।

खेतों में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग पूरी तरह बंद
         श्री सुरेश कुमार नाग लंबे समय से जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने रासायनिक खेती के दुष्परिणामों को समझते हुए अपने खेतों में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग पूरी तरह बंद कर दिया और जीवामृत, घन-जीवामृत तथा नीमास्त्र और ब्रह्मास्त्र जैसे जैविक उपायों को अपनाया। इसके अच्छे परिणाम मिलने के बाद उन्होंने अपने अनुभव अन्य किसानों के साथ साझा किए, जिससे आसपास के कई किसान भी प्राकृतिक खेती की ओर प्रेरित हुए।
जैविक खेती को बढ़ावा देने चलाए जा रहे प्रयास
          श्री नाग 100 से अधिक परंपरागत धान की किस्मों के संरक्षण का कार्य भी कर रहे हैं। इसके साथ ही श्री विधि से रागी और कोसरा की खेती जैसे नवाचारों को अपनाकर जिले में प्राकृतिक खेती को नई दिशा दी है। जिला प्रशासन और कृषि विभाग द्वारा जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए चलाए जा रहे प्रयासों को श्री नाग जैसे किसानों ने जमीन पर सफल बनाया है। उनकी इस उपलब्धि पर किसानों, कृषि विशेषज्ञों और अधिकारियों ने प्रसन्नता व्यक्त की है।
पर्यावरण संरक्षण और मिट्टी की उर्वरता बचाने का महत्वपूर्ण कार्य
          उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने कहा कि सुरेश कुमार नाग जैसे किसान समाज के लिए प्रेरणा स्रोत हैं, जो खेती के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और मिट्टी की उर्वरता बचाने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। सम्मान प्राप्त करने के बाद श्री नाग ने कहा कि यह पुरस्कार उन सभी किसानों को समर्पित है, जो प्राकृतिक खेती अपनाकर धरती और आने वाली पीढ़ी को सुरक्षित बनाने का प्रयास कर रहे हैं।
युवाओं में खेती के प्रति सकारात्मक सोच
 सुरेश कुमार नाग को मिला यह सम्मान दंतेवाड़ा जिले में जैविक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है और इससे युवाओं में खेती के प्रति सकारात्मक सोच विकसित होने की उम्मीद है।

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प्रशिक्षु उप निरीक्षकों को आरएफएसएल की जानकारी देने हुई दो दिवसीय कार्यशाला  संयुक्त संचालक, क्षेत्रीय न्यायालयिक विधि विज्ञान प्रयोगशाला कार्यालय के अधिकारियों ने दी विस्तृत जानकारीफोटो-2  छ.ग.फ्रंटलाइनअंबिकापुर। सरगुजा रेंज के विभिन्न जिलों में व्यवहारिक प्रशिक्षण करने हेतु आये सभी नव पदस्थ प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों को नई तकनिकी फोरेंसिक साइंस थ्योरी एवं प्रेटिकल प्रशिक्षण (आरएफएसएल) की जानकारी हेतु रेंज स्तर पर कार्यशाला का आयोजन पुलिस को-ऑडिनेशन सेन्टर, सरगुजा भवन में पुलिस महानिरीक्षक सरगुजा रेंज दीपक कुमार झा के निर्देशन में किया गया। इस दौरान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सरगुजा राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में फोरेंसिक साइंस थ्योरी एवं प्रेक्टिकल प्रशिक्षण के अधिकारी आर.के. पैकरा एवं कुलदीप कुजूर के द्वारा प्रशिक्षण दिया गया। इस नई तकनीकी प्रयोगशाला प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य किसी भी गंभीर प्रकरण के विवेचना के शुरूआती दौर से ही संग्रहित किये जाने वाले साक्ष्यों को पूर्णत: पारदर्शिता के साथ सुरक्षित एकत्रित किया जाता है ताकि भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय के समक्ष सुरक्षित पेश किया जा सके, जो कि अपराधिक कानूनों में फॉरेंसिक जांच की महत्ता दिया गया है।रेंज स्तर पर इस प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन दो बैच में कराया गया। प्रथम बैच 03 जुलाई को संपन्न हुआ, जिसमें जिला सूरजपुर, बलरामपुर एवं कोरिया के 38 प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों को प्रशिक्षण मिला। द्वितीय बैच में 07 जुलाई को सरगुजा, जशपुर एवं एमसीबी जिले के 40 प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों को इस प्रशिक्षण दिया गया। फोरेंसिक साइंस थ्योरी एवं प्रेटिकल प्रशिक्षण कार्यशाला में मुख्य रूप से संयुक्त संचालक, क्षेत्रीय न्यायालयिक विधि विज्ञान प्रयोगशाला अंबिकापुर के अधिकारी आर. के पैकरा एवं कुलदीप कुजूर के द्वारा अपने अनुभवों को साझा करते हुये कई ऐसे पुराने प्रकरणों के बारे में बताया जो कि बहुत ही बारीकी से उन्होंने साल्व किया है। उन्होंने कहा कि आप सब जब भी मैदानी थाना, चौकी क्षेत्रों में कार्य करेंगे तो अलग-अलग तरह के अनसुलझे प्रकरण आयेंगे, जैसे में बर्निंग केश, डिकम्पोज बॉडी, इलेक्ट्रिक शॉक, हैंगिंग, ड्रावनिंग, हत्या, शव निरीक्षण, घटनास्थल का निरीक्षण जैसे प्रकरणों का शुरूआती दौर से ही एक-एक साक्ष्यों का तकनीकी उपकरणों के माध्यम से सावधानी पूर्वक साक्ष्य संग्रहित करने के तरीके एवं बारीकियों के बारे में अधिकारियों ने विस्तृत जानकारी दी।बताया गया कि 1 जुलाई 2024 से लागू हुये नये अपराधिक कानून भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता एवं भारतीय साक्ष्य अधिनियम में फारेंसिक जांच की भूमिका को विशेष महत्व दिया गया है। इसमें विशेष रूप से 7 वर्ष या उससे अधिक सजा वाले अपराधों में फारेंसिक टीम के अधिकारियों के द्वारा जांच की अनिवार्यता है। इस हेतु रेंज के सभी जिलों में फारेंसिक वैज्ञानिक अधिकारी पदस्थ किये गये हंै, एवं आधुनिक मोबाइल फारेंसिक वैन प्रदाय किया है। प्रशिक्षण के अगली कड़ी में सभी प्रशिक्षु उप निरीक्षकों को क्षेत्रीय न्यायालयिक विधि विज्ञान प्रयोगशाला अंबिकापुर में ले जाकर बारीकी से एक-एक कर तकनीकि उपकरणों के बारे में जानकारी देकर घटना स्थल पर किस प्रकार प्रयोग/जांच किया जाना चाहिए, इन सारी तकनीकि उपकरणों के बारे में अवगत कराया गया। इसके उपरांत दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला में हर बिन्दुओं पर बारी-बारी से सभी प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों से उपस्थित अधिकारियों के द्वारा फीडबैक लिया गया, इस दौरान प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों से एक-एक करके पुन: तकनीकी उपकरणों एवं उसके उपयोग जैसे प्रश्नों के बाद त्रुटियों में सुधार किया गया।पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों एवं संयुक्त संचालक, क्षेत्रिय न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला के अधिकारियों ने कहा कि क्षेत्रिय एफएसएल से जांच में पारदर्शिता बढ़ेगी और बैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर अपराधियों तक पहुंचने में आसानी होगी जो कि न्यायिक प्रक्रिया में गति मिलेगी एवं लंबित मामलों के निपटारे में शीघ्रता आयेगी। प्रशिक्षण कार्यशाला के दौरान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सरगुजा अमोलक सिंह ढिल्लो, सीएसपी अंबिकापुर राहुल बंसल, रक्षित निरीक्षक अंबिकापुर तृप्ति सिंह राजपुत, पुमनि. कार्यालय के रीडर रेशम लाल साहू, स्थापना प्रभारी सुनील वर्मा सहित रेंज में पदस्थ सभी प्रशिक्षु उपनिरीक्षक उपस्थित रहे।