कलेक्टर ने छात्रों से की प्रतिस्पर्धा परीक्षाओं पर चर्चा, बेहतर परीक्षा परिणाम का दिया मंत्र

भैयाथान। बोर्ड की वार्षिक परीक्षाओं को दृष्टिगत रखते हुए जिले के कलेक्टर एस. जयवर्धन द्वारा शिक्षा की गुणवत्ता और परीक्षा परिणाम में सुधार हेतु निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में जिले में एसडीएम की अध्यक्षता में प्रति माह प्राचार्यों की बैठक आयोजित कर मासिक मूल्यांकन, तिमाही, छमाही एवं प्री-बोर्ड परीक्षाओं के परिणामों की समीक्षा की जा रही है। शिक्षा विभाग द्वारा कलेक्टर के मार्गदर्शन में बोर्ड परीक्षा में छात्रों के बेहतर प्रदर्शन, विद्यार्थियों के प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण होने के लक्ष्य तथा अनुकूल शैक्षणिक वातावरण निर्माण के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है।
इसी कड़ी में शुक्रवार को हायर सेकेंडरी स्कूल भैयाथान में पालक-शिक्षक बैठक का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता कलेक्टर एस. जयवर्धन ने की। बैठक के दौरान कलेक्टर ने छात्रों से सीधा संवाद कर उनकी समस्याओं को जाना और परीक्षा की तैयारी से संबंधित उपयोगी सुझाव दिए। उन्होंने पालकों से आग्रह किया कि वे बच्चों की पढ़ाई में आवश्यक सहयोग और सकारात्मक माहौल प्रदान करें। कलेक्टर ने छात्रों को नीट, जेईई (मेंस), सीजी पीएससी जैसी प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की तैयारी हेतु प्रेरित करते हुए कहा कि परीक्षा को दबाव के रूप में नहीं, बल्कि उत्साह और आत्मविश्वास के साथ लें। उन्होंने कहा कि नियमित अध्ययन, सही मार्गदर्शन और अनुशासन से सफलता सुनिश्चित की जा सकती है।
इस दौरान कक्षा 12वीं गणित के छात्र पीयूष कुशवाहा से संवाद करते हुए कलेक्टर ने आधुनिक तकनीकी, चैट, जीपीटी जैसे डिजिटल टूल्स के उपयोग से करियर निर्माण में सहयोग लेने की सलाह दी। छात्र ने जीमेंस की ऑनलाइन कक्षाओं के माध्यम से अपनी तैयारी के अनुभव भी साझा किए। कलेक्टर की इस पहल से छात्र एवं पालक काफी उत्साहित नजर आए। इस अवसर पर एसडीएम चांदनी कंवर, जिला शिक्षा अधिकारी अजय मिश्रा, जिला मिशन समन्वयक मनोज कुमार साहू, विकासखंड शिक्षा अधिकारी फूलसाय मरावी, सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी घनश्याम सिंह, खंड स्रोत समन्वयक सुरेंद्र दुबे, प्राचार्य डी.के. राय सहित शिक्षक, पालक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

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प्रशिक्षु उप निरीक्षकों को आरएफएसएल की जानकारी देने हुई दो दिवसीय कार्यशाला  संयुक्त संचालक, क्षेत्रीय न्यायालयिक विधि विज्ञान प्रयोगशाला कार्यालय के अधिकारियों ने दी विस्तृत जानकारीफोटो-2  छ.ग.फ्रंटलाइनअंबिकापुर। सरगुजा रेंज के विभिन्न जिलों में व्यवहारिक प्रशिक्षण करने हेतु आये सभी नव पदस्थ प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों को नई तकनिकी फोरेंसिक साइंस थ्योरी एवं प्रेटिकल प्रशिक्षण (आरएफएसएल) की जानकारी हेतु रेंज स्तर पर कार्यशाला का आयोजन पुलिस को-ऑडिनेशन सेन्टर, सरगुजा भवन में पुलिस महानिरीक्षक सरगुजा रेंज दीपक कुमार झा के निर्देशन में किया गया। इस दौरान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सरगुजा राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में फोरेंसिक साइंस थ्योरी एवं प्रेक्टिकल प्रशिक्षण के अधिकारी आर.के. पैकरा एवं कुलदीप कुजूर के द्वारा प्रशिक्षण दिया गया। इस नई तकनीकी प्रयोगशाला प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य किसी भी गंभीर प्रकरण के विवेचना के शुरूआती दौर से ही संग्रहित किये जाने वाले साक्ष्यों को पूर्णत: पारदर्शिता के साथ सुरक्षित एकत्रित किया जाता है ताकि भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय के समक्ष सुरक्षित पेश किया जा सके, जो कि अपराधिक कानूनों में फॉरेंसिक जांच की महत्ता दिया गया है।रेंज स्तर पर इस प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन दो बैच में कराया गया। प्रथम बैच 03 जुलाई को संपन्न हुआ, जिसमें जिला सूरजपुर, बलरामपुर एवं कोरिया के 38 प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों को प्रशिक्षण मिला। द्वितीय बैच में 07 जुलाई को सरगुजा, जशपुर एवं एमसीबी जिले के 40 प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों को इस प्रशिक्षण दिया गया। फोरेंसिक साइंस थ्योरी एवं प्रेटिकल प्रशिक्षण कार्यशाला में मुख्य रूप से संयुक्त संचालक, क्षेत्रीय न्यायालयिक विधि विज्ञान प्रयोगशाला अंबिकापुर के अधिकारी आर. के पैकरा एवं कुलदीप कुजूर के द्वारा अपने अनुभवों को साझा करते हुये कई ऐसे पुराने प्रकरणों के बारे में बताया जो कि बहुत ही बारीकी से उन्होंने साल्व किया है। उन्होंने कहा कि आप सब जब भी मैदानी थाना, चौकी क्षेत्रों में कार्य करेंगे तो अलग-अलग तरह के अनसुलझे प्रकरण आयेंगे, जैसे में बर्निंग केश, डिकम्पोज बॉडी, इलेक्ट्रिक शॉक, हैंगिंग, ड्रावनिंग, हत्या, शव निरीक्षण, घटनास्थल का निरीक्षण जैसे प्रकरणों का शुरूआती दौर से ही एक-एक साक्ष्यों का तकनीकी उपकरणों के माध्यम से सावधानी पूर्वक साक्ष्य संग्रहित करने के तरीके एवं बारीकियों के बारे में अधिकारियों ने विस्तृत जानकारी दी।बताया गया कि 1 जुलाई 2024 से लागू हुये नये अपराधिक कानून भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता एवं भारतीय साक्ष्य अधिनियम में फारेंसिक जांच की भूमिका को विशेष महत्व दिया गया है। इसमें विशेष रूप से 7 वर्ष या उससे अधिक सजा वाले अपराधों में फारेंसिक टीम के अधिकारियों के द्वारा जांच की अनिवार्यता है। इस हेतु रेंज के सभी जिलों में फारेंसिक वैज्ञानिक अधिकारी पदस्थ किये गये हंै, एवं आधुनिक मोबाइल फारेंसिक वैन प्रदाय किया है। प्रशिक्षण के अगली कड़ी में सभी प्रशिक्षु उप निरीक्षकों को क्षेत्रीय न्यायालयिक विधि विज्ञान प्रयोगशाला अंबिकापुर में ले जाकर बारीकी से एक-एक कर तकनीकि उपकरणों के बारे में जानकारी देकर घटना स्थल पर किस प्रकार प्रयोग/जांच किया जाना चाहिए, इन सारी तकनीकि उपकरणों के बारे में अवगत कराया गया। इसके उपरांत दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला में हर बिन्दुओं पर बारी-बारी से सभी प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों से उपस्थित अधिकारियों के द्वारा फीडबैक लिया गया, इस दौरान प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों से एक-एक करके पुन: तकनीकी उपकरणों एवं उसके उपयोग जैसे प्रश्नों के बाद त्रुटियों में सुधार किया गया।पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों एवं संयुक्त संचालक, क्षेत्रिय न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला के अधिकारियों ने कहा कि क्षेत्रिय एफएसएल से जांच में पारदर्शिता बढ़ेगी और बैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर अपराधियों तक पहुंचने में आसानी होगी जो कि न्यायिक प्रक्रिया में गति मिलेगी एवं लंबित मामलों के निपटारे में शीघ्रता आयेगी। प्रशिक्षण कार्यशाला के दौरान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सरगुजा अमोलक सिंह ढिल्लो, सीएसपी अंबिकापुर राहुल बंसल, रक्षित निरीक्षक अंबिकापुर तृप्ति सिंह राजपुत, पुमनि. कार्यालय के रीडर रेशम लाल साहू, स्थापना प्रभारी सुनील वर्मा सहित रेंज में पदस्थ सभी प्रशिक्षु उपनिरीक्षक उपस्थित रहे।