स्वास्थ्य सेवाएं, पर्यावरण संरक्षण, रोजगार सृजन, सुरक्षा उपाय और जल प्रबंधन पर विशेष जोर: ज
बैकुंठपुर-चिरमिरी। अंजन माइन्स प्राइवेट लिमिटेड ने दक्षिण-पूर्वी चिरमिरी कोलफिल्ड क्षेत्र में स्थित अपनी प्रस्तावित अंजन हिल कोयला खदान परियोजना के लिए जनसुनवाई सफलतापूर्वक पूरी कर ली है। यह खदान कोल इंडिया लिमिटेड की सहायक कंपनी मेसर्स साउथ ईस्टर्न कोलफिल्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) के चिरमिरी क्षेत्र के अंतर्गत आती है और लगभग 388.261 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली हुई है।
प्रस्तावित कोयला उत्खनन के लिए जनसुनवाई 5 फरवरी को ग्राम भुकभुकी, जनपद पंचायत खड़गवां में आयोजित की गई, इस दौरान क्षेत्रीय एवं जिला प्रशासन के अधिकारियों में अपर कलेक्टर अनिल सिदार, पर्यावरण जलवायु सरक्षण अधिकारी शैलेश पिसदा, अनुविभागीय अधिकारी बृजेन्द्र सारथी, सीएसपी दीपिका मिंज, एसईसीएल के महाप्रबंधक अशोक कुमार एवं सब एरिया मैनेजर मनीष सिंह मौजूद थे। जनसुनवाई में स्थानीय प्रतिनिधियों ने अपना समर्थन दिया। जनपद पंचायत अध्यक्ष प्रिया मेश्राम ने कहा कि क्षेत्र के विकास के लिए हम खदान के खुलने का स्वागत करते हैं। अन्य प्रतिनिधियों में महापौर चिरमिरी राम नरेश राय, संतोष सिंह सभापति नगर निगम चिरमिरी, शिवांश जैन ब्लॉक अध्यक्ष चिरमिरी, गायत्री बिरहा नेता प्रतिपक्ष नगर निगम चिरमिरी एवं वरिष्ठ पत्रकार श्रीकांत शुक्ला भी शामिल थे। यह प्रक्रिया नामित अधिकारियों एवं वैधानिक प्राधिकरणों की उपस्थिति में पूरी पारदर्शिता के साथ सभी नियामक आवश्यकताओं के अनुपालन में आयोजित की गई। परियोजना को स्थानीय निवासियों से सकारात्मक समर्थन प्राप्त हुआ, जो कंपनी की कार्यप्रणाली और प्रतिबद्धताओं के प्रति समुदाय के विश्वास को दर्शाता है।
जनसुनवाई के दौरान कुछ स्थानीय निवासियों ने परियोजना के लिए निजी भूमि के संभावित अधिग्रहण को लेकर चिंता व्यक्त की। इसका समाधान करते हुए एसईसीएल के महाप्रबंधक अशोक कुमार ने स्पष्ट रूप से कहा कि किसी भी निजी भूमि का अधिग्रहण नहीं किया जाएगा और परियोजना का विकास पूरी तरह से आवंटित लीज क्षेत्र के भीतर, सभी वैधानिक प्रावधानों के अनुरूप किया जाएगा। उन्होंने बताया कि अंजन माइन्स प्राइवेट लिमिटेड भी नियमानुसार स्थानीय समुदायों के समग्र विकास एवं कल्याण के प्रति प्रतिबद्ध रहेगी, जिसमें स्वास्थ्य सेवाएं, पर्यावरण संरक्षण, रोजगार सृजन, सुरक्षा उपाय और जल प्रबंधन पर विशेष जोर दिया गया। कंपनी के द्वारा हालिया सामुदायिक विकास कार्यों एवं जनहित की पहलों का भी उल्लेख किया, जिनमें हाल ही में हुडी जैकेट, स्कूल बैग और डेस्क-बेंच का वितरण शामिल है, जो क्षेत्र में शिक्षा, कल्याण और बुनियादी सामुदायिक ढांचे के समर्थन के लिए निरंतर प्रयासों को दर्शित करता है। परियोजना के संचालन में आने के बाद क्षेत्र में आजीविका के अवसरों के सृजन और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने व जिम्मेदार और सतत खनन प्रथाओं का पालन सुनिश्चित करने की अपेक्षा रखी गई है। परियोजना से संबंधित किसी प्रकार का विस्थापन, पुनर्वास या अतिक्रमण का मुद्दा नहीं है। इससे वनों, जल स्रोतों या वन्यजीवों पर किसी प्रतिकूल प्रभाव की अपेक्षा नहीं है। यह भी उल्लेख किया गया कि परियोजना क्षेत्र में कोई भी ग्राम पंचायत शामिल नहीं है, इसलिए आसपास के गांवों पर किसी नकारात्मक प्रभाव की पहचान नहीं की गई है।
विकास पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए स्थानीय व्यापार जगत के प्रतिनिधि ओम प्रकाश अग्रवाल ने कहा यह परियोजना हमारे क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण विकास अवसर है। पर्यावरणीय सुरक्षा और सामुदायिक कल्याण के अनुरूप जिम्मेदार खनन न केवल स्थानीय आजीविका को बढ़ावा देगा, बल्कि चिरमिरी के व्यापारिक समुदाय की आर्थिक नींव को भी सुदृढ़ करेगा। अंजन माइन्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ निरंतर सहयोग की अपेक्षा व्यक्त की, ताकि श्रमिकों और आसपास के समुदायों तक सतत लाभ सुनिश्चित हो सके। जनसुनवाई के उपरांत, अंजन माइन्स प्राइवेट लिमिटेड वैधानिक एवं नियामक स्वीकृतियों के अनुरूप परियोजना के अगले चरणों की ओर अग्रसर होगी और क्षेत्र में जिम्मेदार, समावेशी एवं सतत विकास सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय हितधारकों के साथ निकटता से कार्य करती रहेगी।

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प्रशिक्षु उप निरीक्षकों को आरएफएसएल की जानकारी देने हुई दो दिवसीय कार्यशाला  संयुक्त संचालक, क्षेत्रीय न्यायालयिक विधि विज्ञान प्रयोगशाला कार्यालय के अधिकारियों ने दी विस्तृत जानकारीफोटो-2  छ.ग.फ्रंटलाइनअंबिकापुर। सरगुजा रेंज के विभिन्न जिलों में व्यवहारिक प्रशिक्षण करने हेतु आये सभी नव पदस्थ प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों को नई तकनिकी फोरेंसिक साइंस थ्योरी एवं प्रेटिकल प्रशिक्षण (आरएफएसएल) की जानकारी हेतु रेंज स्तर पर कार्यशाला का आयोजन पुलिस को-ऑडिनेशन सेन्टर, सरगुजा भवन में पुलिस महानिरीक्षक सरगुजा रेंज दीपक कुमार झा के निर्देशन में किया गया। इस दौरान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सरगुजा राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में फोरेंसिक साइंस थ्योरी एवं प्रेक्टिकल प्रशिक्षण के अधिकारी आर.के. पैकरा एवं कुलदीप कुजूर के द्वारा प्रशिक्षण दिया गया। इस नई तकनीकी प्रयोगशाला प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य किसी भी गंभीर प्रकरण के विवेचना के शुरूआती दौर से ही संग्रहित किये जाने वाले साक्ष्यों को पूर्णत: पारदर्शिता के साथ सुरक्षित एकत्रित किया जाता है ताकि भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय के समक्ष सुरक्षित पेश किया जा सके, जो कि अपराधिक कानूनों में फॉरेंसिक जांच की महत्ता दिया गया है।रेंज स्तर पर इस प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन दो बैच में कराया गया। प्रथम बैच 03 जुलाई को संपन्न हुआ, जिसमें जिला सूरजपुर, बलरामपुर एवं कोरिया के 38 प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों को प्रशिक्षण मिला। द्वितीय बैच में 07 जुलाई को सरगुजा, जशपुर एवं एमसीबी जिले के 40 प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों को इस प्रशिक्षण दिया गया। फोरेंसिक साइंस थ्योरी एवं प्रेटिकल प्रशिक्षण कार्यशाला में मुख्य रूप से संयुक्त संचालक, क्षेत्रीय न्यायालयिक विधि विज्ञान प्रयोगशाला अंबिकापुर के अधिकारी आर. के पैकरा एवं कुलदीप कुजूर के द्वारा अपने अनुभवों को साझा करते हुये कई ऐसे पुराने प्रकरणों के बारे में बताया जो कि बहुत ही बारीकी से उन्होंने साल्व किया है। उन्होंने कहा कि आप सब जब भी मैदानी थाना, चौकी क्षेत्रों में कार्य करेंगे तो अलग-अलग तरह के अनसुलझे प्रकरण आयेंगे, जैसे में बर्निंग केश, डिकम्पोज बॉडी, इलेक्ट्रिक शॉक, हैंगिंग, ड्रावनिंग, हत्या, शव निरीक्षण, घटनास्थल का निरीक्षण जैसे प्रकरणों का शुरूआती दौर से ही एक-एक साक्ष्यों का तकनीकी उपकरणों के माध्यम से सावधानी पूर्वक साक्ष्य संग्रहित करने के तरीके एवं बारीकियों के बारे में अधिकारियों ने विस्तृत जानकारी दी।बताया गया कि 1 जुलाई 2024 से लागू हुये नये अपराधिक कानून भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता एवं भारतीय साक्ष्य अधिनियम में फारेंसिक जांच की भूमिका को विशेष महत्व दिया गया है। इसमें विशेष रूप से 7 वर्ष या उससे अधिक सजा वाले अपराधों में फारेंसिक टीम के अधिकारियों के द्वारा जांच की अनिवार्यता है। इस हेतु रेंज के सभी जिलों में फारेंसिक वैज्ञानिक अधिकारी पदस्थ किये गये हंै, एवं आधुनिक मोबाइल फारेंसिक वैन प्रदाय किया है। प्रशिक्षण के अगली कड़ी में सभी प्रशिक्षु उप निरीक्षकों को क्षेत्रीय न्यायालयिक विधि विज्ञान प्रयोगशाला अंबिकापुर में ले जाकर बारीकी से एक-एक कर तकनीकि उपकरणों के बारे में जानकारी देकर घटना स्थल पर किस प्रकार प्रयोग/जांच किया जाना चाहिए, इन सारी तकनीकि उपकरणों के बारे में अवगत कराया गया। इसके उपरांत दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला में हर बिन्दुओं पर बारी-बारी से सभी प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों से उपस्थित अधिकारियों के द्वारा फीडबैक लिया गया, इस दौरान प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों से एक-एक करके पुन: तकनीकी उपकरणों एवं उसके उपयोग जैसे प्रश्नों के बाद त्रुटियों में सुधार किया गया।पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों एवं संयुक्त संचालक, क्षेत्रिय न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला के अधिकारियों ने कहा कि क्षेत्रिय एफएसएल से जांच में पारदर्शिता बढ़ेगी और बैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर अपराधियों तक पहुंचने में आसानी होगी जो कि न्यायिक प्रक्रिया में गति मिलेगी एवं लंबित मामलों के निपटारे में शीघ्रता आयेगी। प्रशिक्षण कार्यशाला के दौरान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सरगुजा अमोलक सिंह ढिल्लो, सीएसपी अंबिकापुर राहुल बंसल, रक्षित निरीक्षक अंबिकापुर तृप्ति सिंह राजपुत, पुमनि. कार्यालय के रीडर रेशम लाल साहू, स्थापना प्रभारी सुनील वर्मा सहित रेंज में पदस्थ सभी प्रशिक्षु उपनिरीक्षक उपस्थित रहे।