कुछ आवेदक दो-तीन वर्षों से कार्यालय का चक्कर काट रहे, उच्च स्तर से मिल रहा गोल-मोल जवाब
अंबिकापुर। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण की ओर से जारी किए जाने वाले आधार कार्ड में बॉयोमैट्रिक मिसमैच होने से कई कार्डधारक लम्बे समय से परेशान हैं। कहने को स्थानीय स्तर पर ई-जिला प्रबंधक, ई-गवर्नेस का कार्यालय है, लेकिन ऐसे आधार कार्डधारकों की समस्या का निराकरण इस कार्यालय से भी नहीं हो पा रहा है। कुछ मामले तो ऐसे हैं, जिसमें दो-तीन वर्ष से मिसमैच की समस्या के निवारण के लिए आवेदक भटक रहे हैं। आवेदन देते थक-हार चुके आवेदक हैदराबाद स्थित यूआईडीएआई के दफ्तर तक का चक्कर लगाकर वापस आ चुके हैं, लेकिन समस्या यथावत है। इधर स्कूल में शिक्षा लेने वाले बच्चों के अपार आईडी की अनिवार्यता ने न सिर्फ अभिभावकों की बल्कि शिक्षक-शिक्षिकाओं की मुसीबत बढ़ा दी है। बच्चों के द्वारा जमा किए गए आधार कार्ड में लगभग हर स्कूलों से विसंगतियां, त्रुटियां निकलकर सामने आ रही हैं। ऐसे में अपार आईडी के काम पूर्ण होने में भी दिक्कत की स्थिति बन रही हैं। कहीं बच्चों के नाम के स्पेलिंग में तो कहीं माता-पिता के नाम के स्पेलिंग में मिस्टेक जैसी स्थिति बन रही है। ऐसे कई मामले स्थानीय ई-गवर्नेस कार्यालय तक पहुंच रहे हैं। स्थानीय स्तर पर ई-गवर्नेस का काम देखने वाले ई-जिला प्रबंधक आधार कार्डधारकों की संतुष्टि और त्रुटि दूर करने के लिए उच्च स्तर पर रायपुर और हैदराबाद के अधिकारियों से बात करके और ई-मेल, व्हाट्सएप के माध्यम से सारी वस्तुस्थिति से अवगत कराते जरूर हैं, लेकिन समस्या निराकरण की स्थिति का रेसियो एक से दो प्रतिशत है। ऐसे में मिसमैच जैसी स्थिति का सामना कर रहे आधार कार्डधारकों की समस्या जस की तस बनी हुई है।
एक साथ दो लोग हो रहे प्रभावित
आधार कार्ड बनवाते समय बॉयोमैट्रिक मिसमैच की स्थिति में एक साथ दो आधार कार्डधारकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इनका बैंक खाता, पेनकार्ड, आधार कार्ड से लिंक नहीं हो पा रहा है, वहीं आधार कार्ड हाथ में रहने के बाद भी वह किसी काम का नहीं है। नमनाकला निवासी दो युवतियां प्रियंका विश्वकर्मा व अलिशा एक्का भी ऐसी स्थिति का सामना कर रही हैं। दोनों का ही आधार कार्ड बना है, लेकिन बायोमैट्रिक मिसमैच की स्थिति से दोनों जूझ रहे हैं। प्रियंका विवाह के बाद झारखंड चली गई, लेकिन आधार कार्ड नहीं होने की स्थिति में उसे कई शासकीय योजनाओं से वंचित होना पड़ रहा है। अलिशा भी ऐसे हालातों से जूझते हैदराबाद में स्थित यूआईडीएआई के कार्यालय तक से वापस लौट चुकी है, लेकिन उसकी समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। आज की स्थिति में 40 से अधिक ऐसे आधार धारक ई-जिला प्रबंधक के संपर्क में आ चुके हैं।
बच्चों का अपार आईडी नहीं हो रहा जनरेट
शासन के निर्देशानुसार सभी शासकीय और निजी स्कूलों में पढ़ाई करने वाले बच्चों के अपार आईडी बनाई जानी है। यह काम सरगुजा संभाग में भी बीते कई दिनों से चल रहा है, लेकिन अपार आईडी बच्चों, शिक्षकों के साथ अभिभावकों के लिए मुसीबत बन गई है। बच्चों के प्रवेश की शुरूआत अब नर्सरी से ही होने लगी है। अपार आईडी जनरेट करने की अनिवार्यता के बाद बच्चों का नाम दाखिला रजिस्टर, आधार कार्ड व स्कूल के यू-डायस में एक समान होना चाहिए, कई बच्चों का नाम इन तीन जगह में अलग-अलग होने से अपार आईडी जनरेट नहीं हो रहा है, इस कारण शिक्षक व अभिभावक परेशान हैं। शिक्षकों का मानना है कि अपार आर्डडी भविष्य में बच्चों के लिए अच्छा है, लेकिन वर्तमान में स्कूल के दाखिला रजिस्टर व आधार कार्ड में मिसमैच होने के कारण सुधार कराना बेहद पेचीदा है। नियमानुसार किसी छात्र का नाम विद्यालय के दाखिला-पंजी और आधार कार्ड में एक समान होना अनिवार्य है।
बच्चों की शिक्षा का है स्थायी डिजिटल पहचान
अपार की पहल सरकार द्वारा शुरू किए गए वन नेशन, वन स्टूडेंट आईडी कार्यक्रम का हिस्सा है, जो 2020 की नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के साथ है। अपार आईडी में 12 अंकीय कोड प्राप्त होगा, इसमें बच्चों का स्कोर कार्ड, मार्कशीट, ग्रेडशीट, डिग्री, डिप्लोमा, प्रमाणपत्र व सह-पाठ्यचर्या उपलब्धि समेत अपने सभी शैक्षणिक क्रेडिट को डिजिटल रूप से संग्रहित मिलेेगा। यह आईडी बच्चों की शिक्षा के लिए एक स्थायी डिजिटल पहचान है, जो अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स (एबीसी) व डिजिलॉकर से जुड़ा हुआ है। अपार आईडी का काम तमाम ताकत झोंकने के बाद भी शत-प्रतिशत पूरा नहीं हो पा रहा है, इसके पीछे कारण शैक्षणिक दस्तावेजों में मिसमैच होना है। इधर शिक्षकों को आपार कार्ड बनाने में लापरवाही बरतने पर कार्रवाई जैसी स्थिति न बने, इसका भय सता रहा है और वे ई-जिला प्रबंधक के कार्यालय तक बच्चों का शैक्षणिक दस्तावेज लेकर आ रहे हैं। ई-गवर्नेस कार्यालय बधियाचुआं से पहुंची शिक्षिकाओं ने बताया कि उनके स्कूल के 14 बच्चों का दस्तावेज, बॉयोमैट्रिक मिसमैच है, जिस कारण अपार आईडी जनरेट होने में दिक्कत हो रही है।
जुड़वा बच्चों के अभिभावक भी पशोपेश में
आधार कार्ड की अनिवार्यता के बीच जुड़वा बच्चों के अभिभावक भी पशोपेश में हैं। इसके पीछे कारण बच्चों का नाम भले अलग हो, लेकिन पिता, माता का नाम, जन्मतिथि एक होने से इनका आधार कार्ड आसानी से नहीं बन पता है, आवेदन रिजेक्ट होने की स्थिति बन जाती है। ऐसे में ई-गवर्नेस के ई-जिला प्रबंधक की ओर से एक बच्चे का आधार कार्ड बनने के बाद दूसरे बच्चे का आवेदन करने की सलाह दी जा रही है। इस समस्या से शहर और ग्रामीण क्षेत्र के अभिभावक भी भटक रहे हैं।
बयान
आधार कार्डधारकों के बॉयोमैट्रिक मिसमैच से संबंधित 41 मामला अभी तक उनके संज्ञान में आया है। स्कूली बच्चों का मिसमैच का मामला सर्वाधिक सामने आ रहा है। सभी मामले को वे उच्च स्तर पर स्थित यूआईडीएआई के कार्यालय तक पहुंचाने में लगे हैं। वर्ष 2024 में हैदरबाद से आए अधिकारियों की टीम के द्वारा भी शिविर के माध्यम से भी कई आधार कार्डधारकों की समस्या का समाधान किया गया था। वर्तमान में मिसमैच के कुछ मामले लम्बे समय से लम्बित हैं, इसके निराकरण के लिए उच्च स्तर पर अधिकारियों का उन्होंने ध्यानाकर्षण कराया है।
वैभव सिंह, ई-जिला प्रबंधक, ई-गवर्नेस

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