सरस्वती शिक्षा महाविद्यालय में राष्ट्रवादी प्रखर वक्ता पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ ने दिया प्रेरक व्याख्यान
अंबिकापुर। सरस्वती शिक्षा महाविद्यालय सुभाषनगर में राष्ट्रभक्ति एवं भारतीय संस्कृति विषय पर राष्ट्रवादी प्रखर वक्ता पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ ने कहा हम आदिकाल से सनातन धर्म में पूजा-पाठ करते आ रहे हैं। आज की आधुनिकता में हमने यह जाना कि सभी का एक वैज्ञानिक कारण भी है। उन्होंने कहा हमारे यहां पत्थरों की पूजा की जाती है। हमारे मंत्र उच्चारण में इतनी शक्ति होती है कि वह पत्थर में भी प्राण भर सकती हैं। हमें सनातन धर्म की संस्कृति एवं संस्कार को हमेशा अपने अंदर धारण किए रहना है और एक हिंदू के रूप में अपने कर्तव्यों का नि:स्वार्थ पालन करना है। हम अपनी संस्कृति व संस्कार युद्ध में भी पीछे नहीं छोड़ते, जिसके अंदर राष्ट्रप्रेम की भावना निहित होती है वह कहीं भी किसी भी स्थिति में हो, अपने अंदर राष्ट्र प्रेम की भावना को हमेशा निहित रखता है। सनातन धर्म सर्वश्रेष्ठ है, इसमें किसी मनुष्य को छोटा बड़ा नहीं माना जाता है, उनके संस्कार एवं कार्य  का सम्मान किया जाता है। एक सनातन धर्म ही है जो पंचतत्व में विश्वास करता है और मानता है कि हमारा शरीर उन पांच तत्व से मिलकर बना है जो मृत्यु के पश्चात पंचतत्वों में विलीन हो जाता है।
पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ ने कहा जब हम सुबह सूर्य देव को जल चढ़ाते हैं उसका वैज्ञानिक कारण है, सूर्य की किरण एवं हमारी आंखों के बीच जल की धारा गिरती है तो सूर्य की किरण प्रतिबिंबित होकर हमारे मस्तिष्क को स्पर्श करती है, जो हमारी  ऊर्जा को जाग्रत करती है, इससे हम पूरे दिन ऊर्जावान महसूस करते हैं। उन्होंने कहा कि हमारे देश में जितनी भी नदियां हंै उनको मां के रूप पूजा जाता है, उनके नाम के साथ भी मां लगाया जाता है, क्योंकि हमारे लिए हमारी मां से पवित्र कोई नहीं होता है। आज हम जिस प्रकार की संस्कृति को अपने अंदर समाहित कर रहे हैं उससे हमारी संस्कृति पीछे होते जा रही हैं। हम जात-पांत में बंट रहे हंै और हमारी एकता का खंडन हो रहा है। आजकल व्यक्ति स्वार्थ के वशीभूत होकर जिधर फायदा देख रहा है उधर ही अग्रसर हो रहा है। भारत की गौरवशाली परंपरा और संस्कृति संस्कृति ‘वसुधैव कुटुम्बकमÓ और ‘सर्वे भवन्तु सुखिन:Ó जैसे आदर्शों पर आधारित है। हमारे ऋषि-मुनियों ने विज्ञान, गणित, दर्शन और अध्यात्म में विश्व को मार्ग दिखाया। तत्पश्चात उन्होंने कहा हमें अपने देश, सेना और तिरंगे पर गर्व होना चाहिए। राष्ट्र के हित को व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर रखना ही सच्ची देशभक्ति है। आज युवाओं को भारत के इतिहास और शहीदों के बलिदान से प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने हमारे लिए क्या किया, किस तरह अपना बलिदान दिया। उन्होंने युवाओं को स्वदेशी और आत्मनिर्भरता का संदेश दिया। तत्पश्चात कहा भारत तभी सशक्त बनेगा जब हम स्वदेशी वस्तुओं और भारतीय उत्पादों का सम्मान करेंगे। ‘मेड इन इंडियाÓ नहीं, बल्कि ‘मेड बाय इंडियंसÓ का भाव जगाना चाहिए। शिक्षा और संस्कृति का संबंध में कहा शिक्षा केवल नौकरी पाने का माध्यम नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण का साधन है। गुरुकुल परंपरा में शिक्षा का उद्देश्य ‘मानव निर्माणÓ था, हमें वही दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। कार्यक्रम मे सरस्वती शिशु मंदिर समिति अंबिकापुर के अध्यक्ष सुभाषचंद्र अग्रवाल, उपाध्यक्ष अनिल सिंह मेजर, व्यवस्थापक राजरूप छाजेड़, सह व्यवस्थापिका प्रतिमा त्रिपाठी, पूर्व व्यवस्थापक बसंत गुप्ता, प्राचार्य डॉ. श्रद्धा मिश्रा, विभागाध्यक्ष रानी रजक, सहायक प्राध्यापक उर्मिला यादव, प्रियलता जायसवाल, मिथलेश कुमार गुर्जर, सुप्रिया सिंह, सविता यादव, सीमा बंजारे, पूजा रानी, ज्योत्सना राजभर, अर्चना सोनवानी, गोल्डन सिंह, नितेश कुमार यादव एवं प्रशिक्षणार्थियों की उपस्थिति रही।  
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