विभाग ने 1000 टारगेट के विरूद्ध 888 केसीसी प्रकरण बैकों को सौंपा, 379 स्वीकृत
अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ राज्य में बड़ी मात्रा में मछली उत्पादन किया जाता है। यहां की मछली पड़ोसी राज्यों में भी सप्लाई की जाती है। मछली पालन के लिए मछुआरों को अब किसानों के समान ही लोन दिया जाता है। इस बीच मछली पालन को रोजगार का जरिया बनाने के लिए शासन की पहल पर बट्टा लगने का परिदृश्य सामने आ रहा है। मछली पालन के लिए उत्सुक हितग्राहियों को समय पर बैंक से लोन की राशि नहीं मिल पा रही है, ऐसे में धरातल में केसीसी लोन देने की योजना फिसड्डी साबित हो रही है। हालांकि मत्स्य पालन विभाग अपने स्तर पर मछली पालन से हितग्राहियों का व्यवसायिक मार्ग प्रशस्त हो, इसके लिए हरसंभव प्रयास में लगा है, जिससे लोगों का रूझान मछली पालन के प्रति बढ़ा है।
बता दें कि सरकार के निर्देशानुसार 15 जून से 15 अगस्त तक मछली पकड़ने पर प्रतिबंध लगाया गया है। यह अवधि मछलियों का प्रजनन काल होता है। सरगुजा जिले में विभागीय योजना के तहत ऐसे गरीब परिवार, जिनका गरीबी रेखा के सर्वे सूची में नाम है, उन्हें लीज पर मछली पालन के लिए तालाब देने का प्रावधान है। इसके लिए प्रतिवर्ष जिलावार टारगेट के तहत हितग्राहियों को मछली पालन का प्रशिक्षण भी दिया जाता है। यही नहीं पूर्व से मछली पालन से जुड़े लोगों को भी मछली पालन के लिए विभाग प्रोत्साहित करता है। इससे गरीब ग्रामीणों के आय का मार्ग भी प्रशस्त होता है। विभाग की ओर से इन्हें मछली बीज भी उपलब्ध कराया जाता है। इसका अच्छा प्रतिसाद भी समय के साथ देखने को मिलता है। मछली पालन में लगे हितग्राहियों को लोन की सुविधा मिले, इसके लिए भी विभागीय पहल होती है। मछली पालन विभाग के द्वारा बैंकों को हितग्राहियों को लोन राशि उपलब्ध कराने के लिए प्रस्ताव भेजा जाता है, लेकिन बैंकों के असहयोगात्मक रूख से हितग्राहियों को समय पर लोन की रकम नहीं मिल पाती है, जिससे उन्हें निराश होना पड़ता है। सैकड़ों हितग्राहियों के केस फाइलों में बंद रहने से वे लोन प्राप्ति की बाट जोहते रह जाते हैं।
केसीसी के 50 प्रतिशत से भी कम प्रकरणों में मिली स्वीकृति
हालिया मछली पालकों को दिए जाने वाले लोन की स्थिति पर नजर डालें तो कार्यालय उप संचालक मछली पालन विभाग अंबिकापुर को चालू वर्ष में 1000 हितग्राहियों को केसीसी लोन दिलाने का टारगेट मिला था। इस टारगेट के विरूद्ध विभाग ने 888 प्रकरण बैंक में केसीसी से संबंधित सबमिट किए हैं। इसमें से कुल 379 प्रकरण स्वीकृत हुए हैं। केसीसी प्रकरणों में विशेष पिछड़ी जनजाति के 18 पहाड़ी कोरवा भी शामिल हैं, इनमें से 05 हितग्राहियों का प्रकरण स्वीकृत तो हुआ है, लेकिन इनको अभी तक लोन की राशि नहीं मिली है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि एक हेक्टेयर में मछली पालन के लिए केसीसी से 1.50-60 लाख रुपये तक के लोन का प्रावधान है।
पहाड़ी कोरवाओं के 18 केसीसी प्रकरणों में 05 स्वीकृत
मत्स्य पालन विभाग के उपसंचालक सतीश कुमार अहिरवार का कहना है कि इस बार अमूमन 50 से अधिक तालाबों को मछली पालन के लिए लीज पर हितग्राहियों ने प्राप्त किया है। मछली पालन के प्रति लोगों की रूचि बढ़ी है। विभाग की ओर से विशेष संरक्षित जनजातियों को भी मछली पालन से जोड़ने की पहल की गई है। 18 पहाड़ी कोरवाओं का केसीसी लोन के लिए प्रकरण बनाकर बैंकों को दिया गया, इसमें से 5 प्रकरण स्वीकृत किए गए हैं। उन्होंने बताया कि बैंक को कुल 888 प्रकरण प्रेषित किए गए हैं, इनमें से 379 प्रकरणों के स्वीकृति की जानकारी मिली है। शेष प्रकरणों में क्या दिक्कत आड़े आई, इससे वे अनभिज्ञ हैं।
दरिमा मत्स्य बीज प्रक्षेत्र बेस्ट बीज उत्पादन केन्द्र
उपसंचालक सतीश कुमार ने बताया कि प्रदेश की तुलना में सरगुजा के दरिमा में स्थित शासकीय मत्स्य बीज प्रक्षेत्र बेस्ट बीज उत्पादन केन्द्र है। मछली पालन ग्रामीण क्षेत्र तक लोगों के लिए रोजगार का बेहतर माध्यम बने, इसके लिए वे प्रयासरत हैं। विभाग के द्वारा मछली की वेरायटी, साइज के हिसाब से हितग्राहियों को अच्छी आमदनी हो, इसकी जानकारी भी दी जाती है।

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