यदि बच्चों के मन में माता-पिता का त्याग और संस्कार जीवित होगा, तो वह कभी मानसिक रोगी नहीं हो सकता-शिल्पा पाण्डेय
अंबिकापुर। शासकीय राजमोहिनी देवी कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय में विजन समाजसेवी संस्था के संयुक्त तत्वाधान में ‘जीवन अनमोल हैÓ अभियान के तहत 500 छात्राओं के बीच मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यशाला का आयोजन हुआ।
कार्यशाला में अभियान की संयोजक शिल्पा पाण्डेय ने कहा कि, माता के प्रसव पीड़ा और पिता के त्याग को समझने वाला बच्चा कभी अवसाद में नहीं जाता। मोबाइल हमें नहीं, हम मोबाइल को चलाएं। उन्होंने बताया कि विजन संस्था ने शासन से अनुमति लेकर 6 माह में 18,000 बच्चों तक यह अभियान पहुंचाया है और अब तक 1158 अवसादग्रस्त बच्चों को आत्महत्या से बचाकर काउंसलिंग की है। विजन की संयोजिका को वर्ष 2025 में राज्य सरकार द्वारा माता बहादुर कलारिन सम्मान से अलंकृत किया गया है, जो 20 वर्षों से महिला-बाल क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिए दिया जाता है। अध्यक्षता कर रहीं ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की सरगुजा संभाग संचालिका बीके राजयोगिनी विद्या दीदी ने कहा कि संस्कार जीवन की दिशा और चरित्र ऊंचाई तय करता है।
स्वच्छता समिति की अध्यक्ष शशिकला सिंह ने विपरीत परिस्थिति में मुस्कुराने का संदेश दिया। मेडिकल कॉलेज से रेडक्रॉस व ब्लड-ऑर्गन डोनेशन यूनिट की नोडल अधिकारी डॉ. शारदा भगत ने स्वस्थ शरीर के लिए हीमोग्लोबिन जांच व एनीमिया से बचाव पर जोर दिया। मुख्य वक्ता एचआईवी-एड्स जागरूकता व ब्लड डोनेशन यूनिट की कोऑर्डिनेटर, काउंसलर अंजुला मिश्रा ने मन की बात साझा करने की अपील की। समाजसेवी व नवीन वस्त्रालय संचालक सतीश केडिया ने अभिभावकों से कुछ न छिपाने की सलाह दी। प्राचार्य डॉ. ए. जेन टोप्पो ने स्वागत व मेंटल हेल्थ डे की शुभकामनाएं दीं। संचालन शिक्षिका आशा गोयल ने किया। विजन वालंटियर संगीता सिंह ने हेल्पलाइन नंबर साझा किया, जबकि राजू यादव, हर्षल यादव और स्वच्छता समिति कोर कमेटी सदस्य ज्ञानकता कुजूर सहित एनएसएस वालंटियर्स का सहयोग रहा।

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