अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ के शासकीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों का जुलाई माह का वेतन ऑनलाइन उपस्थिति के आधार पर आहरित करने के लोक शिक्षण संचालनालय के आदेश का विरोध शुरू हो गया है। छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन सरगुजा ने आदेश को अव्यवहारिक बताते हुए इसे तत्काल संशोधित करने की मांग की है।
फेडरेशन के जिलाध्यक्ष संदीप कुमार पाण्डेय ने कहा कि, प्रदेश के कई विद्यालय दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित हैं, जहां मोबाइल नेटवर्क की समस्या बनी रहती है। इसके अलावा ऑनलाइन उपस्थिति के लिए उपयोग किए जा रहे वीएसके ऐप में भी कई तकनीकी खामियां हैं। कई बार शिक्षक विद्यालय में उपस्थित रहते हैं, लेकिन ऐप गलत लोकेशन दिखाता है, विद्यालय से दूरी अधिक बताता है या सर्वर ठीक से काम नहीं करता है। ऐसे में शिक्षक चाहकर भी अपनी ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं करा पाते। उन्होंने बताया कि तकनीकी समस्याओं की जानकारी पहले भी विभागीय अधिकारियों को दी जा चुकी है, इसके बावजूद यदि केवल ऑनलाइन उपस्थिति के आधार पर वेतन जारी किया जाता है तो कई शिक्षकों का वेतन प्रभावित हो सकता है, जबकि उनकी अनुपस्थिति नहीं बल्कि तकनीकी खामी इसकी वजह होगी। संदीप पाण्डेय ने कहा कि तकनीकी समस्याओं का समाधान किए बिना वेतन काटना या रोकना शिक्षकों के साथ अन्याय होगा। इससे शिक्षकों का मनोबल भी प्रभावित होगा। उन्होंने मांग की कि जब तक वीएसके ऐप पूरी तरह सुचारू और त्रुटिरहित नहीं हो जाता, तब तक शिक्षकों का वेतन विद्यालय की उपस्थिति पंजी और प्रधान पाठक अथवा प्राचार्य द्वारा प्रमाणित वेतन देयक के आधार पर ही आहरित किया जाए। फेडरेशन ने यह भी मांग की है कि केवल तकनीकी कारणों से ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं होने की स्थिति में किसी भी शिक्षक का वेतन न काटा जाए और न ही उसे रोका जाए। शिक्षकों का कहना है कि पहले विभाग डिजिटल व्यवस्था को पूरी तरह विश्वसनीय बनाए, उसके बाद ही इसे वेतन से जोड़ा जाए।

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