पूर्व उपमुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार, भाजपा, आरएसएस पर सीधे हमला बोला
अंबिकापुर। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी सरगुजा ने गुरूवार को राजीव भवन में पत्रकारों के समक्ष केंद्र सरकार और भाजपा, आरएसएस पर सीधा हमला बोला। छत्तीसगढ़ के पूर्व उप मुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा कि, भगवान श्री राम के नाम पर जुटाया गया चंदा और चढ़ावा अब राजनीतिक लूट का शिकार हो गया है। उन्होंने कहा राम मंदिर निर्माण के लिए रामशिला पूजन के नाम पर 14,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि देशभर से एकत्र की गई। इसमें गरीब, किसान, मजदूर और महिलाओं ने अपनी मेहनत की कमाई और गहने दान किए। इधर घोटाला सामने आने के बाद चंपत राय और अनिल मिश्रा जैसे शीर्ष पदाधिकारियों ने इस्तीफा दिया, जो मामले को गंभीर बनाता है। इनका इस्तीफा भी स्वीकार कर लिया गया। यह सिर्फ आर्थिक घोटाला नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, विश्वास और भावनाओं के साथ किया गया घोर विश्वासघात है।
टीएस सिंहदेव ने खर्चों पर उठे सवाल के प्ररिपेक्ष्य में दो बड़े आयोजनों के खर्च का जिक्र करते हुये कहा कि, 22 जनवरी 2024 की प्राण-प्रतिष्ठा पर लगभग 113 करोड़ रुपये खर्च हुए, जिसमें 8,000 अतिथि शामिल हुए। 25 नवंबर 2025 के ध्वजारोहण कार्यक्रम पर लगभग 10.12 करोड़ रुपये खर्च हुए। इसके अलावा फर्जी रसीदों, नकद चढ़ावा, लेखा-जोखा और हेराफेरी के आरोप भी लगाए। उन्होंने कहा कि एसआईटी अब इन बड़े आयोजनों के खर्चों की जांच कर रही है, लेकिन सिर्फ छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई हो रही है। शीर्ष पदाधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं हुई है। ऐसे में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम की आस्था पर डाका डालने वालों को बचाने की बातें सामने आ रही है, जबकि इन्हें बेनकाब करने की जरूरत है। उन्होंने कहा भगवान श्री राम के नाम पर धार्मिक भाव और धार्मिकता की तिलांजलि दी जा रही है।
पूर्व उपमुख्यमंत्री ने कहा कि, सुप्रीम कोर्ट का निर्णय सामने आने के बाद 2 करोड़ की जमीन को साढ़े 18 करोड़ में खरीदना और ट्रस्ट के जिम्मेदार पदाधिकारी का जवाब कि, जमीन का भाव तेजी से बढ़ रहा है, हास्यास्पद है। सिंहदेव ने कहा कि राम मंदिर में मूर्ति स्थापना के समय प्रधानमंत्री, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री, आरएसएस प्रमुख के साथ 5 लोग मंच पर दिखे। इनके द्वारा देश के आस्थावान लोगों की धज्जी उड़ा दी गई। 70 बार रुपये की हेराफेरी का मामला सामने आने के बाद भी जिम्मेदारों के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई। देश के प्रधानमंत्री और गृहमंत्री भी चुप्पी साधे रहे। देश के प्रमुख शंकराचार्यों ने कहा कि मंदिर मूर्ति स्थापना और प्राणप्रतिष्ठा के लिये तैयार नहीं है, लेकिन ये 110 करोड़ रुपये से अधिक खर्च करके मीडिया इवेंट देश के सामने प्रस्तुत करते रहे। इस मौके पर नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष शफी अहमद, हेमंत सिन्हा, इंद्रजीत सिंह धंजल, हेमंत तिवारी, मो. इस्लाम, दुर्गेश गुप्ता, सीमा सोनी, मदन जायसवाल, अशफाक अली, सतीश बारी सहित अन्य कांग्रेसजन उपस्थित थे।
एसआईटी का गठन बड़े मामलों को दबाने के लिए
कांग्रेस जिला अध्यक्ष बालकृष्ण पाठक ने कहा कि, एसआईटी का गठन बड़े मामलों को दबाने के लिये किया गया है, यह स्पष्ट हो गया है। मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के जज से कराई जानी चाहिये। कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री द्वितेन्द्र मिश्रा ने भी पत्रकारों के समक्ष श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और इनके पदाधिकारियों के इस्तीफा को निशाने पर लेते हुये अन्य बिंदुओं पर प्रकाश डाला।    
सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच से डर क्यों..?
टीएस सिंहदेव ने कहा, ट्रस्ट का गठन प्रधानमंत्री की देखरेख में हुआ तो घोटाले की जिम्मेदारी कौन लेगा? अगर सब ठीक था तो इस्तीफे क्यों हुए? अगर कुछ गलत नहीं है तो सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच से डर क्यों? इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की चुप्पी पर निशाना साधते हुये सिंहदेव ने कहा कि दोषियों को बचाने की कोशिश और केवल छोटे लोगों पर कार्रवाई क्यों की जा रही है। उन्होंने कहा कांग्रेस की मांग है कि, प्रधानमंत्री को ट्रस्ट गठन और पीएमओ की भूमिका को स्पष्ट करके चंपत राय, अनिल मिश्रा और अन्य पर एफआईआर दर्ज कराना चाहिये। सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में इसकी स्वतंत्र न्यायिक जांच कराई जाए। ट्रस्ट भंग हो, और धर्माचार्यों और विशेषज्ञों वाला नया पारदर्शी ट्रस्ट बने। चंदा, चढ़ावा, भूमि खरीद का ऑडिट सार्वजनिक किया जाए।
आरएसएस है व्यक्तियों का समूह
टीएस सिंहदेव ने कहा कि, आरएसएस कोई संगठन नहीं, व्यक्तियों का समूह है। श्री राम मंदिर न्यास में धार्मिक स्थल की देखरेख और प्रबंधन के लिये देश की सनातनी व्यवस्था को छोड़कर संगठन विशेष के लोगों को जोड़ा गया। पूर्व में आरएसएस का समाज सेवा का स्वरूप था, जो आपदा-विपदा में नजर आते थे। आरएसएस के कर्ताधर्ता अब अनुशांगिक संगठन बनकर भाजपा से जुड़ गए। उन्होंने कहा कि, आरएसएस का आज खुलेआम राजनीति में दखल है। भाजपा के मंत्री और आईएएस अधिकारी तक यहां समीक्षा के लिये जाते हैं।

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