कटकोना गांव में आक्रोश, 143 परिवारों की जमीन अधिग्रहण पर रोकने की मांग

अंबिकापुर। एसईसीएल की अमेरा परियोजना द्वारा सरगुजा जिले के ग्राम पंचायत कटकोना में बिना ग्राम सभा की अनुमति के 143 भूमि स्वामियों को मुआवजा नोटिस भेजे जाने के विरोध में ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया है। ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर को पुन: आवेदन सौंपते हुए अधिग्रहण की पूरी प्रक्रिया निरस्त करने और आरटीआई के तहत दस्तावेज उपलब्ध कराने कहा है। इधर प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि मामला एसईसीएल को भेजा जा चुका है। आगे की कार्रवाई नियमानुसार की जाएगी।
ग्रामवासियों के अनुसार एसईसीएल द्वारा 30.05.2026 को पोस्टमैन के जरिए ग्राम पंचायत कटकोना के 143 भूमि स्वामियों को भूमि के एवज में मुआवजा संबंधी नोटिस भेजा है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस संबंध में ग्राम सभा में आज तक कोई प्रस्ताव पारित नहीं हुआ है, न ही किसी को जानकारी दी गई। इसे लेकर ग्रामीणों ने 23.06.2026 को जिला कलेक्टर से मुलाकात करके लिखित आवेदन दिया था। कलेक्टर ने इन्हें 15 दिन के बाद आने को कहा था। 14.07.2026 को पुन: कलेक्टर से मिले, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों को बताया गया कि आवेदन एसईसीएल को भेज दिया गया है। इसके बाद आयुक्त सरगुजा संभाग के संज्ञान में भी मामले को लाया जाएगा।
अधिकारियों ने कहा-आपका गांव हुआ अधिग्रहित
ग्रामीणों का कहना है कि, 15.07.2026 को अनुविभागीय अधिकारी, तहसीलदार, नायब तहसीलदार और पटवारी की टीम कटकोना पहुंची। अधिकारियों ने ग्रामीणों से कहा कि आपका गांव अधिग्रहित हो चुका है, अब आगे की प्रक्रिया होगी। इस पर ग्रामीणों ने जवाब दिया कि यदि 2001 में अधिग्रहण हुआ था तो उसका ग्राम सभा प्रस्ताव सहित सभी कानूनी दस्तावेज सार्वजनिक किया जाए। ग्रामीणों ने ग्राम सभा के प्रस्ताव दिनांक 8 जून 2026 को मान्य कर 143 भूमि स्वामियों की अधिग्रहण कार्रवाई को तत्काल निरस्त करने कहा है, और बिना ग्राम सभा की लिखित सहमति के गांव में प्रवेश, सर्वेक्षण या अधिग्रहण नहीं करने की मांग की है। इनके द्वारा ग्रामीणों को डराने-धमकाने वाले एसईसीएल के अधिकारियों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई करने की मांग की है।
पूर्व सरपंचों ने सहमति देने से किया इन्कार
2001 से 2025 तक पदस्थ रहे सभी पूर्व सरपंचों सत्यवती सिंह पैकरा, सुमित सिंह मरकाम, तारा सिंह पैकरा, दिनेश सिंह पैकरा, विमला सिंह मरकाम ने कहा कि उनके कार्यकाल में एसईसीएल के संबंध में न कोई एनओसी दिया गया है और न ही सीबीए एक्ट की कोई अधिसूचना मिली है। वर्तमान सरपंच पुष्पा सिंह पैकरा और उपसरपंच शिवकुमारी राजवाड़े ने कहा ग्रामीणों ने आज जमीन दे दी तो आने वाली पीढ़ी बेघर और लाचार हो जाएगी। जमीन कम है फिर भी हमारा जीवन चल रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता Óबलदेव प्रसादÓ ने कहा कि भारत सरकार ने पेसा 1996 लागू किया है और छ.ग. राजस्व परिपत्र 31.01.2000 के अनुसार अनुसूचित क्षेत्र में भूमि अधिग्रहण से पहले 5वीं अनुसूची वाले क्षेत्रों में जल, जंगल, जमीन पर ग्राम सभा की सहमति अनिवार्य है। सुप्रीम कोर्ट ने भी आदिवासी क्षेत्रों में बिना ग्राम सभा की मंजूरी कोई प्रोजेक्ट नहीं हो सकता, स्पष्ट किया है।

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