अंबिकापुर। भारतेन्दु साहित्य एवं कला समिति सरगुजा द्वारा समिति अध्यक्ष नीलिमा मिश्र के  एम.जी. रोड स्थित निवास पर मासिक विचार एवं काव्य गोष्ठी का आयोजन प्रबुद्ध विचारक बब्बनजी पांडेय  की अध्यक्षता में किया।  माता सरस्वती और भारतेंदु हरिश्चंद्र को याद करते हुए लोक गायक रंजीत सारथी ने सुमधुर सरस्वती वंदना  प्रस्तुत की। बब्बनजी ने समिति के मासिक आयोजन की सार्थकता पर विचार प्रकट करते हुए कहा कि इससे रचनात्मक कार्यों को गति मिल रही है। लेखन के क्षेत्र में नवोदित रचनाकारों को सीखने का अनुकूल अवसर मिल रहा है। उन्होंने आत्मीय संबंधों को हमेशा बनाये रखने के लिये रिश्तों को अहमियत देने और एक दूसरे के प्रति फिक्रमंद रहने की जरूरत पर ज़ोर दिया।
पूर्व प्राचार्य एवं वरिष्ठ कवयित्री संध्या सिंह ने सम-सामयिक विषय पर नई कविता का पाठ किया। मानव कल्याण विकास संगठन छत्तीसगढ़ की अध्यक्ष आशा पांडेय ने ममतामयी मां को समर्पित भावपूर्ण दोहों की मनोहारी प्रस्तुति दी। डॉ. सुधीर पाठक ने कहा कि भारतेंदु ने हिंदी साहित्य के विकास में अप्रतिम योगदान दिया है। तत्कालीन परिस्थितियों में जब देश पर अंग्रेजी सत्ता का जोर था, उस समय भारतेंदु ने अपनी लेखनी के माध्यम से उनका मुखर विरोध और जनजागरण का स्तुत्य कार्य किया। उनके नाम पर स्थापित नगर की भारतेंदु साहित्य कला समिति का साहित्यिक सांस्कृतिक  प्रयास प्रशंसनीय है। वरिष्ठ कवि बी.डी. लाल ने हिंदी और सरगुजिहा की निकटता की व्याख्या  करते हुए अपनी कालजयी रचनाओं का पाठ किया। वरिष्ठ कवयित्री गीता दुबे,पूनम दुबे वीणा ने सस्वर भजन सुना कर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। समिति अध्यक्ष नीलिमा मिश्र ने गोष्ठी में उपस्थित सदस्यों का आभार व्यक्त कतरे हुए अपनी प्रतिनिधि रचना का पाठ किया। सभा को समिति संरक्षक एवं वरिष्ठ कांग्रेसी नेता द्वितेंद मिश्र ने सम्बोधित करते हुए कहा कि आगामी 28 मई को पण्डित जे.एन. मिश्र की पुण्यतिथि मनाई जायेगी। इस अवसर पर साहित्य एवं समाजसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए पं. जे.एन. मिश्र सम्मान प्रदान किया जाएगा। इस मौके पर अशोक सोनकर ने भी अपना सारगर्भित विचार व्यक्त किया। युवा  रचनाकार प्रकाश कश्यप ने कार्यक्रम का संचालन किया।  

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