विशेष पिछड़ी जनजाति के छात्रों के लिए 1.82 करोड़ से बनेगा छात्रावास, शिक्षा और विकास को मिली नई रफ्तार
रायपुर,
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कबीरधाम जिले के बोड़ला विकासखंड के बैगा बाहुल्य ग्राम सिंघारी में विशेष पिछड़ी जनजाति के विद्यार्थियों के लिए प्रस्तावित 50 सीटर छात्रावास भवन निर्माण कार्य का भूमिपूजन किया। लगभग 1 करोड़ 82 लाख रुपए की लागत से बनने वाला यह छात्रावास क्षेत्र के विद्यार्थियों को आवासीय सुविधा के साथ बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराएगा।
         इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि प्रदेश सरकार वनांचल और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले विशेष पिछड़ी जनजातियों के बच्चों तक शिक्षा की सुविधाएं पहुंचाने के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल व्यक्तिगत विकास का माध्यम नहीं, बल्कि समाज और क्षेत्र की प्रगति का आधार भी है। ऐसे क्षेत्रों में छात्रावासों की सुविधा मिलने से विद्यार्थियों की पढ़ाई नियमित होगी और उन्हें बेहतर अवसर प्राप्त होंगे।
        उन्होंने कहा कि बैगा समाज प्रदेश की सांस्कृतिक परंपरा और पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सरकार की कोशिश है कि विकास योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और वन क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को भी शिक्षा, स्वास्थ्य तथा आधारभूत सुविधाएं सहज रूप से उपलब्ध हों। उन्होंने कहा कि कई बार दूरस्थ गांवों के बच्चों को स्कूल और आवास की कठिनाइयों के कारण पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ती है, लेकिन छात्रावास बनने से विद्यार्थियों को सुरक्षित वातावरण और आवश्यक सुविधाएं मिल सकेंगी।
         उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने ग्रामीणों से बच्चों की शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की अपील करते हुए कहा कि शिक्षित युवा ही आने वाले समय में समाज और क्षेत्र के विकास की मजबूत नींव बनेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार जनजातीय अंचलों में अधोसंरचना विकास, सड़क, पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार पर विशेष प्राथमिकता के साथ काम कर रही है।  कार्यक्रम में कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष श्री ईश्वरी साहू, जनपद अध्यक्ष श्रीमती बालका राम किंकर वर्मा, उपाध्यक्ष जिला पंचायत श्री कैलाश चंद्रवंशी, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष श्री विदेशी राम धुर्वे, उपाध्यक्ष जनपद पंचायत श्री नंद श्रीवास, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती रूपा राजकुमार धुर्वे, श्री लोकचंद साहू, श्री मनीराम साहू, कलेक्टर श्री गोपाल वर्मा, जिला पंचायत सीईओ श्री अभिषेक अग्रवाल सहित जनप्रतिनिधि और विभागों के अधिकारी तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

Spread the love

You missed

प्रशिक्षु उप निरीक्षकों को आरएफएसएल की जानकारी देने हुई दो दिवसीय कार्यशाला  संयुक्त संचालक, क्षेत्रीय न्यायालयिक विधि विज्ञान प्रयोगशाला कार्यालय के अधिकारियों ने दी विस्तृत जानकारीफोटो-2  छ.ग.फ्रंटलाइनअंबिकापुर। सरगुजा रेंज के विभिन्न जिलों में व्यवहारिक प्रशिक्षण करने हेतु आये सभी नव पदस्थ प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों को नई तकनिकी फोरेंसिक साइंस थ्योरी एवं प्रेटिकल प्रशिक्षण (आरएफएसएल) की जानकारी हेतु रेंज स्तर पर कार्यशाला का आयोजन पुलिस को-ऑडिनेशन सेन्टर, सरगुजा भवन में पुलिस महानिरीक्षक सरगुजा रेंज दीपक कुमार झा के निर्देशन में किया गया। इस दौरान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सरगुजा राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में फोरेंसिक साइंस थ्योरी एवं प्रेक्टिकल प्रशिक्षण के अधिकारी आर.के. पैकरा एवं कुलदीप कुजूर के द्वारा प्रशिक्षण दिया गया। इस नई तकनीकी प्रयोगशाला प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य किसी भी गंभीर प्रकरण के विवेचना के शुरूआती दौर से ही संग्रहित किये जाने वाले साक्ष्यों को पूर्णत: पारदर्शिता के साथ सुरक्षित एकत्रित किया जाता है ताकि भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय के समक्ष सुरक्षित पेश किया जा सके, जो कि अपराधिक कानूनों में फॉरेंसिक जांच की महत्ता दिया गया है।रेंज स्तर पर इस प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन दो बैच में कराया गया। प्रथम बैच 03 जुलाई को संपन्न हुआ, जिसमें जिला सूरजपुर, बलरामपुर एवं कोरिया के 38 प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों को प्रशिक्षण मिला। द्वितीय बैच में 07 जुलाई को सरगुजा, जशपुर एवं एमसीबी जिले के 40 प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों को इस प्रशिक्षण दिया गया। फोरेंसिक साइंस थ्योरी एवं प्रेटिकल प्रशिक्षण कार्यशाला में मुख्य रूप से संयुक्त संचालक, क्षेत्रीय न्यायालयिक विधि विज्ञान प्रयोगशाला अंबिकापुर के अधिकारी आर. के पैकरा एवं कुलदीप कुजूर के द्वारा अपने अनुभवों को साझा करते हुये कई ऐसे पुराने प्रकरणों के बारे में बताया जो कि बहुत ही बारीकी से उन्होंने साल्व किया है। उन्होंने कहा कि आप सब जब भी मैदानी थाना, चौकी क्षेत्रों में कार्य करेंगे तो अलग-अलग तरह के अनसुलझे प्रकरण आयेंगे, जैसे में बर्निंग केश, डिकम्पोज बॉडी, इलेक्ट्रिक शॉक, हैंगिंग, ड्रावनिंग, हत्या, शव निरीक्षण, घटनास्थल का निरीक्षण जैसे प्रकरणों का शुरूआती दौर से ही एक-एक साक्ष्यों का तकनीकी उपकरणों के माध्यम से सावधानी पूर्वक साक्ष्य संग्रहित करने के तरीके एवं बारीकियों के बारे में अधिकारियों ने विस्तृत जानकारी दी।बताया गया कि 1 जुलाई 2024 से लागू हुये नये अपराधिक कानून भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता एवं भारतीय साक्ष्य अधिनियम में फारेंसिक जांच की भूमिका को विशेष महत्व दिया गया है। इसमें विशेष रूप से 7 वर्ष या उससे अधिक सजा वाले अपराधों में फारेंसिक टीम के अधिकारियों के द्वारा जांच की अनिवार्यता है। इस हेतु रेंज के सभी जिलों में फारेंसिक वैज्ञानिक अधिकारी पदस्थ किये गये हंै, एवं आधुनिक मोबाइल फारेंसिक वैन प्रदाय किया है। प्रशिक्षण के अगली कड़ी में सभी प्रशिक्षु उप निरीक्षकों को क्षेत्रीय न्यायालयिक विधि विज्ञान प्रयोगशाला अंबिकापुर में ले जाकर बारीकी से एक-एक कर तकनीकि उपकरणों के बारे में जानकारी देकर घटना स्थल पर किस प्रकार प्रयोग/जांच किया जाना चाहिए, इन सारी तकनीकि उपकरणों के बारे में अवगत कराया गया। इसके उपरांत दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला में हर बिन्दुओं पर बारी-बारी से सभी प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों से उपस्थित अधिकारियों के द्वारा फीडबैक लिया गया, इस दौरान प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों से एक-एक करके पुन: तकनीकी उपकरणों एवं उसके उपयोग जैसे प्रश्नों के बाद त्रुटियों में सुधार किया गया।पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों एवं संयुक्त संचालक, क्षेत्रिय न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला के अधिकारियों ने कहा कि क्षेत्रिय एफएसएल से जांच में पारदर्शिता बढ़ेगी और बैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर अपराधियों तक पहुंचने में आसानी होगी जो कि न्यायिक प्रक्रिया में गति मिलेगी एवं लंबित मामलों के निपटारे में शीघ्रता आयेगी। प्रशिक्षण कार्यशाला के दौरान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सरगुजा अमोलक सिंह ढिल्लो, सीएसपी अंबिकापुर राहुल बंसल, रक्षित निरीक्षक अंबिकापुर तृप्ति सिंह राजपुत, पुमनि. कार्यालय के रीडर रेशम लाल साहू, स्थापना प्रभारी सुनील वर्मा सहित रेंज में पदस्थ सभी प्रशिक्षु उपनिरीक्षक उपस्थित रहे।